{"_id":"6613a07cec7afb3fad0bcd33","slug":"lok-sabha-election-2024-uttarakhand-netaji-workers-are-in-rebellion-2024-04-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Election 2024: मैं 26 साल से पार्टी में, आप बताओ कितने हो पुराने...बगावती तेवर में है नेताजी के कार्यकर्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Election 2024: मैं 26 साल से पार्टी में, आप बताओ कितने हो पुराने...बगावती तेवर में है नेताजी के कार्यकर्ता
Mon, 08 Apr 2024 01:15 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधमसिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधमसिंह नगर
Published by: हीरा मेहरा
Updated Mon, 08 Apr 2024 01:15 PM IST
सार
उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज गई है। तराई की एक विधानसभा में खुले पार्टी के चुनाव कार्यालय में चाय पानी के खर्च पर दो नेताओं की तकरार हो गई। पढ़िए चुनाव की कहानी...
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
तराई की एक विधानसभा में खुले पार्टी के चुनाव कार्यालय में चाय पानी के खर्च पर दो नेताओं की तकरार हो गई। खुद को आगामी मेयर मानकर चल रहे नेताजी ने दूसरे नेता को छोटा करार दे दिया। खुद को छोटा कहे जाने से आहत नेताजी ने दर्द सोशल मीडिया पर बयां कर दिया।
विज्ञापन
नेताजी ने पार्टी की सदस्यता की रसीद के साथ पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने जिक्र किया कि 26 सालों से पार्टी की सेवा करने के बाद 2012 में पार्टी में आकर खुद को बड़ा समझने वाले नेताजी ने उनको छोटा नेता कह दिया। सवाल उठाया कि पहले आप बताओ कि आप कितने पुराने हो। दूसरे नेता को चुनौती देकर की गई पोस्ट पार्टी में चर्चा का विषय बनी हुई है।
विज्ञापन
बगावती तेवर में है नेताजी के कार्यकर्ता
अल्मोड़ा संसदीय सीट के एक मैदानी विधानसभा क्षेत्र में एक पार्टी के नेता बगावती मोड पर आ गए हैं। उनका कहना है कि प्रचार-प्रसार करो और हाथ भी कुछ न आए इससे अच्छा है प्रत्याशी से दूरी ही बनाए रखो। काम कुछ करना है नहीं। फिर नेता जी हारे या जीते सुनना तो स्थानीय नेता को ही पड़ता है। चुनाव आते ही सौहार्द और प्रेम उमड़ आता है और पूरे पांच साल तक वे नजर नहीं आते हैं।
विज्ञापन
ऐसे में जनता के सामने जाने की हिम्मत नहीं हो रही है। नेताओं का कहना है कि आखिर कब तक एक ही आदमी हाथ जोड़े खड़े दिखाई देगा। पार्टी का फैसला है, तब महानुभाव का सम्मान है। कार्यकर्ताओं का सम्मान तब है जब प्रत्याशी उन्हें पहचाने कि वह उसके लिए कितना जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। अब तो अंतिम बार चुनाव प्रचार है अगली बार से चुनाव के दौरान कहीं दूर चले जाना है।