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आजीवन सजायाफ्ता कैदी की हार्ट अटैक से मौत
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सितारगंज। संपूर्णानंद सेंट्रल जेल के आजीवन सजायाफ्ता कैदी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इससे जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। जेलर ने मृतक के परिजनों को मामले की जानकारी दी और कैदी के शव को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। मृतक कैदी को आठ साल पहले हरिद्वार न्यायालय से उम्रकैद की सजा हुई थी।
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संपूर्णानंद सेंट्रल जेल के अधीक्षक दधिराम मौर्या ने बताया कि सुबह करीब साढ़े 10 बजे आजीवन सजायाफ्ता कैदी मूलरूप से फैजगंज जिला बदायूं निवासी योगेश (33) पुत्र रामपाल के सीने में दर्द उठा। वह बैरिक से तुरंत जेल की डिस्पेंसरी में पहुंचा और फार्मेसिस्ट को सीने में दर्द की शिकायत बताते हुए वहीं गिर पड़ा। स्वास्थ्य टीम तुरंत उसे लेकर नगर के सीएचसी आई। यहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
उन्होंने बताया कि योगेश को पेट संबंधी बीमारी थी और वह आए दिन दवाई खाता रहता था। बताया कि मृतक के खिलाफ साल 2010 में हरिद्वार कोतवाली में साजिशन अपहरण व हत्या के आरोप में आईपीसी की धारा 302, 201, 363, व 366 ए के तहत केस दर्ज हुआ था। हरिद्वार के अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम ने 27 जून 2012 को उसे आजीवन कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। जिसके बाद से वह हरिद्वार जेल में सजा भोग रहा था। बीते 28 दिसंबर को योगेश को यहां सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था।
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---::: आखिर कब तक फार्मेसिस्टों के दम पर चलेगी जेल ::: सितारगंज। संपूर्णानंद खुली व सेंट्रल जेल में स्वास्थ्य सेवाएं बेदम हैं। आखिर कब तक जेल में कैदियों के स्वास्थ्य सुरक्षा फार्मेसिस्टों पर रहेगी। जेल में वर्ष 2010 से 40 बेड का अस्पताल भवन खंडहर होने की वजह से बंद पड़ा है। चिकित्साधिकारी के पद पर भी नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में जेल में रहने वाले कैदियों के स्वास्थ्य का जिम्मा सिर्फ फार्मेसिस्ट संभाल रहे हैं। इससे जेल में सजा काट रहे गंभीर रोगों से ग्रसित कैदियों का समुचित नहीं हो पा रहा है। जेल अधीक्षक दधिराम मौर्या ने बताया कि कई बार कारागार मुख्यालय व शासन को डॉक्टर की नियुक्ति के लिए पत्र लिख चुके हैं। लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हुई। सितारगंज के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर पार्ट टाइम डयूटी के दौरान मरीजों को देखने आते हैं।
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