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सरकार को 300 रुपये प्रति क्विंटल भेजा धान
धन सिंह बिष्ट /अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
Updated Sat, 07 Oct 2017 12:25 AM IST
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बहुचर्चित एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में चकबंदी अधिकारियों के हस्ताक्षरों से हुए फर्जीवाड़े को अब एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) उजागर करेगी। एसआईटी ने बाजपुर और काशीपुर तहसील के चकबंदी अधिकारियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट को एफएसएल भेजने की तैयारी कर ली है। तहसील के कोषागार से एसआईटी ने चकबंदी कार्यालय के मूल दस्तावेज कब्जे में ले लिए हैं। भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में जुटी एसआइटी के सामने इस राज का खुलासा हुआ था कि बाजपुर और काशीपुर तहसील में चकबंदी अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर भूमि की प्रकृति बदली गई।
तत्कालीन एसएलओ ने उसी 143 की रिपोर्ट को आधार बनाकर काश्तकारों को करोड़ों रुपयों का मुआवजा निर्धारित कर दिया। चकबंदी अधिकारियों से पूछताछ में दोनों तहसीलों के अधिकांश चकबंदी अधिकारियों के हस्ताक्षर भी संदिग्ध पाए गए। सत्यता के लिए एसआईटी ने कुछ हस्ताक्षरों का मिलान किया और वह संदिग्ध पाए गए। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार अब एसआईटी हस्ताक्षरों का सच जानने के लिए दोनों तहसील के चकबंदी दस्तावेजों को देहरादून स्थित फॉरेंसिक लैब भेजने की तैयारी कर रही है। इसके लिए शुक्रवार को एसआईटी ने तहसील के कोषागार से चकबंदी दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया है।
जपुर के तत्कालीन एसडीएम ने दर्ज किये अपने बयान भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में जुटी एसआईटी के नोटिस पर पहुंचे बाजपुर के तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फोनिया ने शुक्रवार को अपने बयान दर्ज कराए। वे वर्तमान में राजस्व परिषद देहरादून में संबंद्ध हैं। पूछताछ में एसआईटी ने फोनिया से भी उनके द्वारा 143 के दस्तावेजों में किए गए हस्ताक्षरों के बारे में पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए। इसके साथ ही बाजपुर तहसील के पांच काश्तकारों से भी पूछताछ की।
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अब तक 124 लोगों के बयान दर्ज भूमि मुआवजा घोटाले को परत दर परत खोलने के लिए एसआईटी अब तक 124 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिसमें अकृषि भूमि पर संशोधित दर से आठ से दस गुना मुआवजा लेने वाले काश्तकार, एसडीएम, रीडर, पेशकार, तहसीलदार नायब, राजस्व, निरीक्षक पटवारी, चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी, चकबंदी कानूनगो, चकबंदी लोकपाल, परियोजना निदेशक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रुद्रपुर, नजीबाबाद और क्षेत्रीय अधिकारी उत्तराखंड राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण शामिल हैं। प्रर्वतन निदेशालय को भेजी जांच रिपोर्ट भूमि मुआवजा घोटाले की जांच की गंभीरता को देखते हुए एक माह पूर्व प्रवर्तन निदेशालय ने भी एसआईटी को पत्र भेजकर घोटाले की जांच रिपोर्ट मांगी थी। सप्ताह भर पूर्व एसआईटी ने सहायक निदेशक भारत सरकार प्रवर्तन निदेशालय को बिंदुवार अपनी प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रेषित कर दी है, जिसके आधार पर अंदेशा लगाया जा रहा है कि मनी लांड्रिंग के मामलों की जांच करने वाला प्रवर्तनन निदेशालय भी जल्द ही रिपोर्ट पर संज्ञान लेकर मामले में सक्रिय हो सकता है।
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तत्कालीन एसएलओ ने उसी 143 की रिपोर्ट को आधार बनाकर काश्तकारों को करोड़ों रुपयों का मुआवजा निर्धारित कर दिया। चकबंदी अधिकारियों से पूछताछ में दोनों तहसीलों के अधिकांश चकबंदी अधिकारियों के हस्ताक्षर भी संदिग्ध पाए गए। सत्यता के लिए एसआईटी ने कुछ हस्ताक्षरों का मिलान किया और वह संदिग्ध पाए गए। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार अब एसआईटी हस्ताक्षरों का सच जानने के लिए दोनों तहसील के चकबंदी दस्तावेजों को देहरादून स्थित फॉरेंसिक लैब भेजने की तैयारी कर रही है। इसके लिए शुक्रवार को एसआईटी ने तहसील के कोषागार से चकबंदी दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया है।
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जपुर के तत्कालीन एसडीएम ने दर्ज किये अपने बयान भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में जुटी एसआईटी के नोटिस पर पहुंचे बाजपुर के तत्कालीन एसडीएम भगत सिंह फोनिया ने शुक्रवार को अपने बयान दर्ज कराए। वे वर्तमान में राजस्व परिषद देहरादून में संबंद्ध हैं। पूछताछ में एसआईटी ने फोनिया से भी उनके द्वारा 143 के दस्तावेजों में किए गए हस्ताक्षरों के बारे में पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए। इसके साथ ही बाजपुर तहसील के पांच काश्तकारों से भी पूछताछ की।
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अब तक 124 लोगों के बयान दर्ज भूमि मुआवजा घोटाले को परत दर परत खोलने के लिए एसआईटी अब तक 124 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिसमें अकृषि भूमि पर संशोधित दर से आठ से दस गुना मुआवजा लेने वाले काश्तकार, एसडीएम, रीडर, पेशकार, तहसीलदार नायब, राजस्व, निरीक्षक पटवारी, चकबंदी अधिकारी, सहायक चकबंदी अधिकारी, चकबंदी कानूनगो, चकबंदी लोकपाल, परियोजना निदेशक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रुद्रपुर, नजीबाबाद और क्षेत्रीय अधिकारी उत्तराखंड राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण शामिल हैं। प्रर्वतन निदेशालय को भेजी जांच रिपोर्ट भूमि मुआवजा घोटाले की जांच की गंभीरता को देखते हुए एक माह पूर्व प्रवर्तन निदेशालय ने भी एसआईटी को पत्र भेजकर घोटाले की जांच रिपोर्ट मांगी थी। सप्ताह भर पूर्व एसआईटी ने सहायक निदेशक भारत सरकार प्रवर्तन निदेशालय को बिंदुवार अपनी प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रेषित कर दी है, जिसके आधार पर अंदेशा लगाया जा रहा है कि मनी लांड्रिंग के मामलों की जांच करने वाला प्रवर्तनन निदेशालय भी जल्द ही रिपोर्ट पर संज्ञान लेकर मामले में सक्रिय हो सकता है।