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जिले में दोबारा दबे पांव दस्तक दे रहा कुष्ठ रोग

Sun, 20 Nov 2016 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर Updated Sun, 20 Nov 2016 11:56 PM IST
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Knocking back quietly in the district leprosy
अस्‍पताल - फोटो : अमर उजाला

वर्षों पहले जिले के कई लोगों को अपनी चपेट में लेने वाला कुष्ठ रोग जिले में दोबारा दबे पांव दस्तक दे रहा है। जिला कुष्ठ रोग विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल दर साल कुष्ठ रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है और पिछले तीन सालों में कुष्ठ रोगियों की संख्या बढ़ी है। 

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 आमतौर पर लोगों द्वारा कुष्ठ रोग को मामूली समझ कर इलाज में अनदेखी की जाती है, लेकिन समय रहते कुष्ठ रोग का इलाज नहीं कराने से बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग की लेटलतीफी और लापरवाही के चलते जिले में कुष्ठ रोगियों की संख्या बढ़ गई है। मरीजों की संख्या में इजाफा होना इस बात को दर्शाता है कि कुष्ठ रोग विभाग और स्वास्थ्य महकमे की ओर से कहीं न कहीं लापरवाही बरती जा रही है।
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कुष्ठ रोगियों की संख्या में साल दर साल इजाफा होना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवालिया निशान उठा रहा है। इससे मरीजों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। वहीं इन सब के बावजूद कुष्ठ रोग विभाग की ओर से कई लापरवाही बरती जा रही हैं। अगर विभाग का मरीजों के प्रति यही रवैया रहा तो रोगियों कि संख्या में और इजाफा हो सकता है।
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मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों को यह बीमारी बहुत तेजी से अपनी चपेट में लेती है क्योंकि कुष्ठ रोग गंदगी और दूषित हवा के कारण फैलता है। वहीं दूसरे पहलू पर गौर किया जाए तो समाज में लोगों द्वारा सफाई के प्रति लापरवाही बरतने से भी कुष्ठ रोग को पैर पसारने का मौका मिल रहा है। 
विभाग के अधिकारियों के अनुसार लोगों में जागरुकता की कमी होने के चलते मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। कुष्ठ  रोगी अंतिम चरण में आकर अपना इलाज कराने आते हैं। इससे समय रहते बीमारी ठीक करने में दिक्कत आती है। कुष्ठ रोग की दवा एमडीटी (मल्टी ड्रग थैरेपी) जिला अस्पताल और कुष्ठ रोग विभाग में मुफ्त उपलब्ध है। इस साल खटीमा क्षेत्र में सबसे अधिक 27 कुष्ठ रोगी पाए गए हैं जिसके बाद किच्छा क्षेत्र में 22 कुष्ठ रोगी मिले हैं। 

टीम गठित की जाएगी
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी एसपी दुग्ताल ने बताया कि आंकड़े गंभीर हैं, विभाग की ओर से टीम गठित की जाएगी। आमतौर पर यह रोग गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगों को अपनी चपेट में लेता है। इस बार विभाग की ओर से इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए अहम बैठक कर रणनीति बनाई जाएगी। जल्दी जिले को कुष्ठ रोग मुक्त बनाया जाएगा। 


लड़कियों के लिए है घातक है बीमारी
आमतौर पर कुष्ठ रोग होना किसी भी व्यक्ति के लिए बुरे सपने की तरह है, लेकिन समाज में यह बीमारी लड़कियों को होना बेहद ही घातक है। असल में लड़कियों की त्वचा पर हल्के निशान पड़ जाने से भी भविष्य में मां बाप को बीमारी के चलते रिश्ता अच्छा नहीं मिलने का डर सताने लगता है। वहीं डॉक्टर कहते हैं कि बीमारी से बिना डरे ही शुरुआत में उपचार करा लिया जाए तो इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।

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