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चेक बाउंस होने पर जसपुर के लकड़ी व्यापारी को छह माह की सजा
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काशीपुर। जसपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने चेक बाउंस के एक मुकदमे में आरोपी को छह माह का कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जसपुर के मुख्य बाजार निवासी अमरीश अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता अजहरुद्दीन सैफी के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि वह हार्डवेयर और प्लाईवुड का व्यवसाय करता है। लकड़ी मंडी जसपुर निवासी मौ. आसिम ने उसकी दुकान से रंग, रोगन के डिब्बे, फैवीकोल, लकड़ी का प्राइमर उधार खरीदा था। आरोपी पर उसकी फर्म की 50 हजार रुपये की देनदारी हो गई। देनदारी की एवज में उसने 22 सितंबर, 2013 को दो चेक 30 हजार और 20 हजार रुपये की राशि के दिए। उसने ये चेक अपने खाते में लगाए तो चेक खाते में राशि न होने के कारण बाउंस हो गए।
परिवाद का संज्ञान लेते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज सिंह राणा ने दोनो पक्षों को सुना। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीशीलन कर अदालत ने आरोपी मौ. आसिम को धारा 138 एनआई एक्ट का दोषी पाया। अदालत ने आरोपी को छह माह का कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि से 95 हजार रुपये परिवादी को प्रतिकर के रुप में अदा की जाएगी। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को एक माह का सश्रम कारावास भोगना होगा। संवाद
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जसपुर के मुख्य बाजार निवासी अमरीश अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता अजहरुद्दीन सैफी के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि वह हार्डवेयर और प्लाईवुड का व्यवसाय करता है। लकड़ी मंडी जसपुर निवासी मौ. आसिम ने उसकी दुकान से रंग, रोगन के डिब्बे, फैवीकोल, लकड़ी का प्राइमर उधार खरीदा था। आरोपी पर उसकी फर्म की 50 हजार रुपये की देनदारी हो गई। देनदारी की एवज में उसने 22 सितंबर, 2013 को दो चेक 30 हजार और 20 हजार रुपये की राशि के दिए। उसने ये चेक अपने खाते में लगाए तो चेक खाते में राशि न होने के कारण बाउंस हो गए।
परिवाद का संज्ञान लेते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज सिंह राणा ने दोनो पक्षों को सुना। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीशीलन कर अदालत ने आरोपी मौ. आसिम को धारा 138 एनआई एक्ट का दोषी पाया। अदालत ने आरोपी को छह माह का कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि से 95 हजार रुपये परिवादी को प्रतिकर के रुप में अदा की जाएगी। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को एक माह का सश्रम कारावास भोगना होगा। संवाद
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