{"_id":"5cc9ec4cbdec22071d1bd86d","slug":"innocent-death-of-high-fever-and-vomiting-diarrhea","type":"story","status":"publish","title_hn":"तेज बुखार और उल्टी दस्त से मासूम की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तेज बुखार और उल्टी दस्त से मासूम की मौत
Thu, 02 May 2019 12:28 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Thu, 02 May 2019 12:28 AM IST
विज्ञापन
बच्चे की मौत
- फोटो : demo pics
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्राम ढाई नंबर निवासी एक आठ माह की बच्ची की तेज बुखार के साथ उल्टी दस्त होने से मौत हो गई। चार अस्पतालों में उपचार कराने के बाद भी मासूम को राहत नहीं मिली। मासूम का पिता मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।
विज्ञापन
ग्राम ढाई नंबर निवासी अजय कुमार पुत्र छोटे लाल की आठ माह की बेटी अंशिका को तीन दिन से तेज बुखार और उल्टी दस्त हो रहे थे।
अजय के अनुसार वह दिल्ली में काम करता है। सोमवार 29 अप्रैल को अंशिका को तेज बुखार था और अजय बेटी को सरकारी अस्पताल ले गया, लेकिन बेटी को आराम नहीं मिला। मंगलवार को बाजपुर के निजी अस्पताल में ले गया वहां भी बुखार की शिकायत होने लगी। इसके बाद मंगलवार को गूलरभोज में भी दवा दिलाई। हालत बिगड़ने पर पहले दिनेशपुर के निजी अस्पताल और उसके बाद बुधवार को अजय अंशिका को रुद्रपुर के निजी अस्पताल में लेकर पहुंचा। हालत अधिक खराब होने पर डाक्टरों ने उपचार करने में असमर्थता जताई। दोपहर में रुद्रपुर से घर लौटते समय मासूम ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. शैलजा भट्ट ने कहा कि परिजन जिला अस्पताल में ले आते तो बच्ची की जांच कर बीमारी का पता लगा सकते थे। मासूम की मौत किस कारण हुई यह बता नहीं सकती। लेकिन छोटी अवस्था में बच्ची की मौत तेज बुखार (हाईग्रेड पाइरेसिया) के कारण भी हो सकती है।
विज्ञापन
बच्चों को उल्टी दस्त होने पर बरतें एहतियात
- बच्चे को पहली उल्टी व दस्त होने के तुरंत बाद ओआरएस का घोल पिलाना शुरू कर दें।
- ओआरएस प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर नि:शुल्क उपलब्ध रहता है।
- बच्चों को डायरिया और उल्टी दस्त से बचाने के लिए उबला पानी पिलाएं।
- छह माह से कम उम्र के बच्चे को मां का ही दूध पिलाएं।
- बच्चे को अधिक दिक्कत न होने पर दवाओं का इस्तेमाल न करें।
- डॉ. गौरव अग्रवाल, फिजिशियन, जवाहर लाल नेहरू जिला अस्पताल, रुद्रपुर।