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अपर बैगुल नहर में फिर छोड़ा गया जहरीला पानी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2020 12:10 AM IST
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Infected Water Draines In Upper Baigul Canal
सितारगंज सिसौना गांव में नहर में छोंड़े गए जहरीले पानी से उठते झाग। - फोटो : SITARGANJ
सितारगंज। सिडकुल की फैक्ट्रियों पर पीसीबी के लगाम कसने के बाद भी प्रदूषित जहरीला पानी छोड़ने से कंपनियां बाज नहीं आ रही हैं। सोमवार की शाम को सिंचाई अपर बैगुल नहर में कुछ कंपनियों ने फिर जहरीला पानी छोड़ दिया, जिसकी दुर्गंध से लोगों का जीना मुहाल है। ग्रामीणों ने डीएम से मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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औद्योगिक आस्थान सिडकुल में स्थापित उद्योगों में से कुछ कंपनियां सीईटीपी को गंदा पानी न देकर पास से बहने वाली अपर बैगुल नहर में बहा रही हैं। अगस्त में भी इसी तरह का मामला सामने आने पर पीसीबी के अधिकारियों ने जांच के बाद रिपोर्ट एनजीटी को भेजी थी। एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) ने 25 अगस्त को सिडकुल की 16 कंपनियों पर करीब आठ करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। अभी इस कार्रवाई को महीना भर भी नहीं बीता कि सोमवार की शाम करीब पांच बजे फिर नहर जहरीले पानी से दूषित हो गई। नहर के आसपास के खेतों में खड़ी धान की फसल को भी इस पानी से क्षति पहुंचने की आशंका है। सिसौना के पूर्व प्रधान किशन चंद्र कंबोज ने बताया कि इस नहर से किसान अपने खेतों में पानी सिंचित करते हैं और आसपास के गांवों के मवेशी भी नहर का पानी पीते हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि कई वर्षों से नहर को दूषित करने का खेल चलता आ रहा है, जिसका हर बार विरोध किया जाता है। एनजीटी ने कंपनियों पर जुर्माना तो लगाया लेकिन आज तक नहर में प्रवाहित किए जाने वाले गंदे पानी के स्रोतों का पता नहीं किया गया। इससे कंपनियां सीईटीपी को पानी न देकर गाहे-बगाहे नहर में पानी छोड़ देती हैं और इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने डीएम रंजना राजगुरु से नहर में आने वाले जहरीले पानी की रोकथाम के स्थायी उपाय कराने की मांग की।
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कोट
सिडकुल की अपर बैगुल नहर में जहरीला पानी छोड़ने के मामले का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। नमूने लेकर जांच की जाएगी। जांच के बाद दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। - नरेश गोस्वामी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड काशीपुर।
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