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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   Increasing fuel ethanol in the first Lok Sabha had also raised the issue of fame

पहली लोकसभा मेें भी उठा था ईंधन में एथनॉल बढ़ाने का मुद्दा

Mon, 03 Aug 2015 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/रुद्रपुर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/रुद्रपुर। Updated Mon, 03 Aug 2015 12:31 AM IST
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केंद्रीय मंत्रिमंडल की दिल्ली में शनिवार को हुई बैठक में ईंधन में एथनॉल की मात्रा बढ़ाने पर चर्चा हुई, यह मुद्दा देश की पहली लोकसभा में भी उठाया गया था।

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 मगर तब इसे मंजूरी नहीं मिल सकी थी। यदि तभी इसे स्वीकृति मिल जाती तो गन्ना किसान आज खुशहाल होते। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा से साफ है कि जल्द ही इसे मंजूरी मिल सकती है।
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1947 में देश को आजादी मिलने के बाद 1952 में पहली लोकसभा का गठन हुआ। इस लोकसभा में ग्राम खुखुंदू, तहसील सलेमपुर, देवरिया, उत्तरप्रदेश के विश्वनाथ राय भी सांसद चुने गए थे।
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वह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। विश्वनाथ राय को तब भी यह मालूम था कि ईंधन में मिलने वाला एथनॉल गन्ने के शीरे से बनता है और यही गन्ना किसानों, पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है।

यदि इसका ईंधन में उपयोग बढ़ाया जाए तो गन्ना किसानों के दिन बहुरने में देर नहीं लगेगी। इससे जहां गन्ने का रकबा बढ़ने की उम्मीद थी, वहीं किसानों को भी बेहतर दाम मिलना तय था।

इसी बात को ध्यान में रखकर विश्वनाथ ने पहली लोकसभा की बैठक में जोरशोर से यह मुद्दा उठाया था। बाकायदा दमदार तर्क भी पेश किए थे।

उनका कहना था कि एथनॉल का उपयोग बढ़ने से देश के किसानों की स्थिति में सुधार होगा तो वहीं देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल आयातकों/निर्यातकों की मजबूत लॉबी की एकजुटता ने ऐसा नहीं होने दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि यदि ऐसा हुआ तो मांग घटने से उनका कारोबार कम हो जाएगा।

पूर्व सांसद के पुत्र/सेवानिवृत्त कर्नल प्रमोद शर्मा (हाल निवासी राघवनगर, किच्छा) ने उनके पिता की ओर से लोकसभा में पेश रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई है। कर्नल शर्मा के अनुसार गन्ना किसानों की दुर्दशा हो रही है।


उचित मूल्य न मिलने से उनका मोहभंग हो रहा है। इससे गन्ने का रकबा, उत्पादन भी घट रहा है। कहा कि ईंधन में एथनॉल की मात्रा बढ़ाने का प्रस्ताव पास होना चाहिए। कृषि विशेषज्ञों की ओर से भी सार्थक पहल जरूरी है।

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