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गोली लगने से घायल परिवहन कर अधिकारी की इलाज के दौरान मौत
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मृतक जसवीर सिंह का फाइल फोटो।
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। लाइसेंसी रिवाल्वर से खुद को गोली मारने वाले परिवहन कर अधिकारी जसवीर सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई। गोली लगने के कारणों का अब भी पता नहीं चल सका है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
रामनगर रोड निवासी परिवहन कर अधिकारी जसवीर सिंह वर्तमान में रुद्रपुर में तैनात थे। वह राज्य आंदोलनकारी भी रहे थे। मंगलवार की सुबह उन्होंने अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से अपनी कनपटी पर गोली दाग दी थी। उस समय उनकी पत्नी तरनजीत कौर घर पर ही थीं। गोली उनके सिर में फंस गई। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी हालत बिगड़ गई। निजी अस्पताल में भी रक्तस्राव बंद न होने पर उन्हें दिल्ली रेफर किया गया था।
बाद में उन्हें मुरादाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया था। बुधवार सुबह पौने नौ बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जसवीर अपने पीछे वृद्ध मां-पिता, पत्नी और दो मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं। पिता की मौत सूचना पाकर कनाडा से उनका बेेटा यश सिंह और बेटी सिमरन भी काशीपुर पहुंच गए। देर शाम गंगेबाबा रोड स्थित शमशान घाट पर इकलौते बेटे यश सिंह ने मुखाग्नि दी।
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काशीपुर में कोठी बनाना चाहते थे
काशीपुर। परिवहन कर अधिकारी जसवीर सिंह अपने परिवार के प्रति भी बहुत जिम्मेदार थे। जसवीर के पिता एडवोकेट मंजूर सिंह ने लखीमपुर खीरी (यूपी) के गोला गोकर्णनाथ में खेती की जमीन ली थी। पिता के बीमार होने के कारण जसवीर ही वहां खेती बाड़ी की देखरेख करते थे लेकिन लखीमपुर में उसका मन नहीं लगता था। राज्य आंदोलनकारी होने के नाते जसवीर का उत्तराखंड से खास लगाव था। इस कारण उन्होंने हाल ही में यूपी की जमीन का सौदा कर दिया था। जसवीर इन दिनों तराई में खेती की जमीन की तलाश में जुटे थे।
वह काशीपुर में एक कोठी भी बनाना चाहते थे। हालांकि परिवार के अन्य सदस्य अपना पुश्तैनी मकान छोड़ने को तैयार नहीं थे। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के कारण जसवीर को नई-नई गाड़ियां खरीदने का भी शौक था। परिवार की जिम्मेदारियों को लेकर भी जसवीर बहुत संवेदनशील थे। उन्होंने अपने दोनों बच्चों को आइलेट कराने के बाद छोटे भाई रघुवीर की बेटी को भी आईलेट करा दिया था। रघुवीर सिंह की वर्ष 2004 में रामनगर रोड पर हल्दुआ के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। संवाद
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रामनगर रोड निवासी परिवहन कर अधिकारी जसवीर सिंह वर्तमान में रुद्रपुर में तैनात थे। वह राज्य आंदोलनकारी भी रहे थे। मंगलवार की सुबह उन्होंने अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से अपनी कनपटी पर गोली दाग दी थी। उस समय उनकी पत्नी तरनजीत कौर घर पर ही थीं। गोली उनके सिर में फंस गई। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी हालत बिगड़ गई। निजी अस्पताल में भी रक्तस्राव बंद न होने पर उन्हें दिल्ली रेफर किया गया था।
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बाद में उन्हें मुरादाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया था। बुधवार सुबह पौने नौ बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जसवीर अपने पीछे वृद्ध मां-पिता, पत्नी और दो मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं। पिता की मौत सूचना पाकर कनाडा से उनका बेेटा यश सिंह और बेटी सिमरन भी काशीपुर पहुंच गए। देर शाम गंगेबाबा रोड स्थित शमशान घाट पर इकलौते बेटे यश सिंह ने मुखाग्नि दी।
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काशीपुर में कोठी बनाना चाहते थे
काशीपुर। परिवहन कर अधिकारी जसवीर सिंह अपने परिवार के प्रति भी बहुत जिम्मेदार थे। जसवीर के पिता एडवोकेट मंजूर सिंह ने लखीमपुर खीरी (यूपी) के गोला गोकर्णनाथ में खेती की जमीन ली थी। पिता के बीमार होने के कारण जसवीर ही वहां खेती बाड़ी की देखरेख करते थे लेकिन लखीमपुर में उसका मन नहीं लगता था। राज्य आंदोलनकारी होने के नाते जसवीर का उत्तराखंड से खास लगाव था। इस कारण उन्होंने हाल ही में यूपी की जमीन का सौदा कर दिया था। जसवीर इन दिनों तराई में खेती की जमीन की तलाश में जुटे थे।
वह काशीपुर में एक कोठी भी बनाना चाहते थे। हालांकि परिवार के अन्य सदस्य अपना पुश्तैनी मकान छोड़ने को तैयार नहीं थे। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के कारण जसवीर को नई-नई गाड़ियां खरीदने का भी शौक था। परिवार की जिम्मेदारियों को लेकर भी जसवीर बहुत संवेदनशील थे। उन्होंने अपने दोनों बच्चों को आइलेट कराने के बाद छोटे भाई रघुवीर की बेटी को भी आईलेट करा दिया था। रघुवीर सिंह की वर्ष 2004 में रामनगर रोड पर हल्दुआ के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। संवाद