{"_id":"616c80d07b6e953bed7081f4","slug":"in-ten-years-the-yield-of-sugarcane-increased-by-220-quintals-per-hectare-kashipur-news-hld4417202158","type":"story","status":"publish","title_hn":"दस साल में 220 कुंतल प्रतिहेक्टेयर बढ़ी गन्ने की उपज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दस साल में 220 कुंतल प्रतिहेक्टेयर बढ़ी गन्ने की उपज
विज्ञापन
गन्ने का प्रतीकात्मक फोटो।
- फोटो : KASHIPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशीपुर। प्रदेश में लगातार विकसित हो रहीं गन्ने की नई प्रजातियों ने अपना कमाल दिखा दिया है। बीते एक दशक के दौरान गन्ने की औसत उपज 220 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बढ़ गई है जो किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में काफी मददगार साबित हो रही है।
गन्ना किसानों की उपज दोगुनी करने में सरकारें जुटी हुई हैं। किसानों की उपज बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बात अगर गन्ना विभाग की करें तो गन्ना किसानों की आय बढ़ाने की लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गन्ना अनुसंधान केंद्र लगातार नई प्रजातियों की खोज में जुटा रहता है। बीते दस साल के दौरान कई नई प्रजातियों का गन्ना खेतों में उतारा गया। नई प्रजाति का गन्ना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। बीते दस साल के दौरान प्रति हेक्टेयर गन्ने की उपज में 220 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। दस साल पहले पेराई सत्र 2010-11 में प्रति हेक्टेयर गन्ने की औसत उपज 609 क्विंटल हुआ करती थी। उस दौरान गन्ना किसानों की स्थिति बहुत बेहतर नहीं थी। किसानों की समस्या को देखते हुए गन्ना विभाग में अनुसंधान शुरू हुए। एक के बाद एक नए प्रयोग किए गए। इसके फलस्वरूप पहले से ज्यादा उपज वाली फसलें खेतों तक पहुंचीं। नई फसलों की उपज पुरानी फसलों से कहीं ज्यादा है।
कोट
किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। प्रदेश में बड़े पैमाने पर गन्ने का उत्पादन होता है। बीते दस साल के दौरान 220 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गन्ने की उपज बढ़ी है। यह किसानों के साथ-साथ विभाग के लिए अच्छी खबर है।
विज्ञापन
-हंसा दत्त पांडेय, आयुक्त गन्ना एवं चीनी उद्योग उत्तराखंड।
पेराई सत्र/उपज प्रति हेक्टेयर क्विंटल में
2010-11/609
2016-17/695
2017-18/706
2018-19/755
2019-20/823
2020-21/829
विज्ञापन
गन्ना किसानों की उपज दोगुनी करने में सरकारें जुटी हुई हैं। किसानों की उपज बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बात अगर गन्ना विभाग की करें तो गन्ना किसानों की आय बढ़ाने की लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गन्ना अनुसंधान केंद्र लगातार नई प्रजातियों की खोज में जुटा रहता है। बीते दस साल के दौरान कई नई प्रजातियों का गन्ना खेतों में उतारा गया। नई प्रजाति का गन्ना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। बीते दस साल के दौरान प्रति हेक्टेयर गन्ने की उपज में 220 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। दस साल पहले पेराई सत्र 2010-11 में प्रति हेक्टेयर गन्ने की औसत उपज 609 क्विंटल हुआ करती थी। उस दौरान गन्ना किसानों की स्थिति बहुत बेहतर नहीं थी। किसानों की समस्या को देखते हुए गन्ना विभाग में अनुसंधान शुरू हुए। एक के बाद एक नए प्रयोग किए गए। इसके फलस्वरूप पहले से ज्यादा उपज वाली फसलें खेतों तक पहुंचीं। नई फसलों की उपज पुरानी फसलों से कहीं ज्यादा है।
विज्ञापन
कोट
किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। प्रदेश में बड़े पैमाने पर गन्ने का उत्पादन होता है। बीते दस साल के दौरान 220 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गन्ने की उपज बढ़ी है। यह किसानों के साथ-साथ विभाग के लिए अच्छी खबर है।
विज्ञापन
-हंसा दत्त पांडेय, आयुक्त गन्ना एवं चीनी उद्योग उत्तराखंड।
पेराई सत्र/उपज प्रति हेक्टेयर क्विंटल में
2010-11/609
2016-17/695
2017-18/706
2018-19/755
2019-20/823
2020-21/829