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बेखौफ माफिया ने हेलीपेड और वन भूमि भी नहीं छोड़ी

Sun, 26 Mar 2017 01:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, सितारगंज। 
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, सितारगंज।  Updated Sun, 26 Mar 2017 01:27 AM IST
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Illegal mining in sitarganj
illegal mining

सितारगंज। औद्योगिक नगरी में खनन का कारोबार भी बड़े पैमाने पर हो रहा है। कैलाश नदी के साधूनगर, उकरौली खनन क्षेत्र में पट्टों की आड़ में माफिया धड़ल्ले से अवैध खनन कर रहे हैं। माफिया ने नदी में गहरे गड्ढे खोद डाले हैं। यहां तक कि हेलीपेड, वन भूमि को भी माफिया ने नहीं छोड़ा। प्रशासन अवैध खनन रोकने में नाकाम रहा है। पूर्व में स्थानीय प्रशासन द्वारा माफिया के खिलाफ करोड़ों के जुर्माने की संस्तुति कर रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजी गई लेकिन, यह फाइलें जिले में धूल फांक रही हैं। जिले में तेज तर्रार डीएम, एसएसपी के आने से क्षेत्र में नासूर बने अवैध खनन रुकने की उम्मीद है।

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  सिडकुल से सटे उकरौली गांव में खनन माफिया नदी में बेरोकटोक जमकर अवैध खनन कर रहे हैं। साधूनगर गांव में भी धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है। दोनों क्षेत्रों में राज्य सरकार की ओर से जारी निजी पट्टों की आड़ में माफिया वन, राजस्व विभाग की जमीनें तक खोद रहे हैं। सिडकुल कार्यालय, हेलीपेड के पास भी जमकर अवैध खनन किया गया है। हालात ये हैं कि नदी में माफिया ने गहरे गड्ढे खोद दिए हैं। बाकायदा रात को भी नदी में जेसीबी गरजती हैं। नदी किनारे उपखनिज के स्टॉक लगाकर सुबह तक उन्हें वाहनों से उठा लिया जाता है।
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नदी से बेतरतीब ढंग से अवैध खनन होने के कारण उकरौली गांव के साथ ही सिडकुल के उद्योगों को भी खतरा है। सिडकुल के अफसरों द्वारा कई बार स्थानीय प्रशासन, जिला मुख्यालय को अवैध रोकने के लिए पत्र लिखे गए। ग्रामीणों ने प्रशासन से इसकी शिकायत भी की। पिछले दिनों प्रशासन द्वारा नदी में छापेमारी कर कई माफिया के खिलाफ करोड़ों के जुर्माने की कार्रवाई की गई। डीएम को जुर्माने की रिपोर्ट भी भेजी लेकिन, एक भी माफिया पर जिला मुख्यालय से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे माफिया के हौसले बुलंद हैं। तेजतर्रार नवागंतुक डीएम डॉ. नीरज खैरवाल, एसएसपी डॉ. सदानंद दाते के चार्ज लेते ही अवैध खनन रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई शुरू हो गई है। इससे प्रतीत होता है कि क्षेत्र में नासूर बना अवैध खनन रुक सकेगा।
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सितारगंज। नदी से अवैध तरीके से खनन सामग्री लाने वाले वाहन भी लोगों की जान के दुश्मन बन गए हैं। मार्च में छह लोग इन वाहनों के शिकार होकर अपनी जान गवां चुके हैं लेकिन, प्रशासन ये सब जानने के बाद भी बेखबर रहता है। 17 मार्च की सुबह बिज्टी चौराहे पर अवैध खनन सामग्री से ओवरलोड डंपर ने सिडकुल की एक कंपनी के चार श्रमिकों की जान ले ली।

अगले दिन खटीमा मार्ग पर बघौरा गांव के पास सड़क किनारे खड़े बाइक सवार व्यापारी परमजीत सिंह के पुत्र रजत खुराना की डंपर ने जान ले ली। इसके बाद 20 मार्च को साधूनगर कैलाश नदी के कश्मीरीघाट पर अवैध खनन में लिप्त ट्रैक्टर ट्रॉली ने नकुलिया गांव के अरविंद राणा को मौत के घाट उतार दिया। हादसों के विरोध में नगरवासियों ने स्थानीय प्रशासन से ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की, लेकिन, कोरे आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। अब भी ओवरलोड वाहन सरपट दौड़ रहे हैं। 


सितारगंज। कैलाश नदी के उकरौली, साधूनगर क्षेत्र में निजी पट्टों से बिना रॉयल्टी के खनन सामग्री निकलती है। वाहन स्वामी बिना रॉयल्टी के माल खरीदकर आसपास के स्टोन क्रशरों को बेच रहे हैं। क्रशर मालिक भी कम दाम पर खनन सामग्री लेने के लिए बिना रॉयल्टी के वाहनों से माल ले लेते हैं। इसकी प्रशासन द्वारा कोई जांच नहीं की जाती है। 

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