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Udham Singh Nagar News: पीढि़यों से रुद्रपुर का परिवार माटी को दे रहा गणपति का आकार या निराकार को आकार रूप दे रहा सुधन्या का परिवार
Tue, 19 Sep 2023 12:48 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 19 Sep 2023 12:48 AM IST
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रुद्रपुर बंगाली इंदिरा कॉलोनी में मूर्ति बनाते मुकेश माहल्दार। संवाद
रुद्रपुर। शहर और ग्रामीण स्थलों में कई जगह आज गणपति बप्पा विराजेंगे। बाजार में लोग छोटी से लेकर बड़ी मूर्तियां तक खरीद रहे हैं। मूर्तिकार महीनों पहले से ही गणपति बप्पा की मूर्तियां बनाने में जुट गए थे। मूर्तिकारों के पास 800 रुपये से लेकर 30,000 रुपये तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं।
इंदिरा बंगाली कॉलोनी निवासी विष्णु माहल्दार के पिता सुधन्या माहल्दार को लोग मास्टर के नाम से जानते हैं। सुधन्या जनता इंटर कॉलेज में कला विषय के शिक्षक थे। उस दौरान काफी कम वेतन मिलने के कारण उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन मूर्ति बनाने में किया। अब उनकी तीसरी पीढ़ी मूर्तियां बनाकर अच्छा व्यवसाय कर रही हैं।
विष्णु के बेटे मुकेश माहल्दार ने बताया कि रुद्रपुर में सबसे पहले उनके दादा ने ही मूर्तियां बनाकर बेचीं। तब से हल्द्वानी, अल्मोड़ा, रामपुर, किच्छा, मुरादाबाद आदि जगहों से गणेश विसर्जन के लिए लोग मूर्तियां मंगाते हैं। बताया कि विसर्जन के लिए वह चिकनी मिट्टी से और मंदिर में स्थापित करने के लिए सीमेंट की मूर्तियां बनाते हैं।
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मुकेश ने अपने पिता और पिता ने दादा से मूर्तियां बनानी सीखीं। इधर, सुधन्या के नाती दिवाकर कक्कड़ ने बताया कि मूर्ति बनाने में उनकी पत्नी गौरी कक्कड़ भी उनका साथ निभा रहीं हैं। बताया कि वह मूर्तियों को आकार देते हैं तो पत्नी उनमें रंग करती है। बताया कि पूरा परिवार ही भगवान की मूर्तियां बनाकर व्यवसाय कर रहा है।
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इंदिरा बंगाली कॉलोनी निवासी विष्णु माहल्दार के पिता सुधन्या माहल्दार को लोग मास्टर के नाम से जानते हैं। सुधन्या जनता इंटर कॉलेज में कला विषय के शिक्षक थे। उस दौरान काफी कम वेतन मिलने के कारण उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन मूर्ति बनाने में किया। अब उनकी तीसरी पीढ़ी मूर्तियां बनाकर अच्छा व्यवसाय कर रही हैं।
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विष्णु के बेटे मुकेश माहल्दार ने बताया कि रुद्रपुर में सबसे पहले उनके दादा ने ही मूर्तियां बनाकर बेचीं। तब से हल्द्वानी, अल्मोड़ा, रामपुर, किच्छा, मुरादाबाद आदि जगहों से गणेश विसर्जन के लिए लोग मूर्तियां मंगाते हैं। बताया कि विसर्जन के लिए वह चिकनी मिट्टी से और मंदिर में स्थापित करने के लिए सीमेंट की मूर्तियां बनाते हैं।
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मुकेश ने अपने पिता और पिता ने दादा से मूर्तियां बनानी सीखीं। इधर, सुधन्या के नाती दिवाकर कक्कड़ ने बताया कि मूर्ति बनाने में उनकी पत्नी गौरी कक्कड़ भी उनका साथ निभा रहीं हैं। बताया कि वह मूर्तियों को आकार देते हैं तो पत्नी उनमें रंग करती है। बताया कि पूरा परिवार ही भगवान की मूर्तियां बनाकर व्यवसाय कर रहा है।