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Udham Singh Nagar News: दुनियाभर में बढ़ रही हिंदी की ताकत
Thu, 14 Sep 2023 12:24 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 14 Sep 2023 12:24 AM IST
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डॉ. सुभाष चंद्र कुशवाहा।
रुद्रपुर। डिग्री कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष और प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. शंभू दत्त पांडेय शैलेय बताते हैं कि हिंदी सबसे अधिक समर्थ और आमजन की भाषा है। देश, विदेश में हिंदी भाषा की ताकत बढ़ी है। अब सरकारी कामकाज में हिंदी भाषा का उपयोग पहले से कहीं अधिक होने लगा है। आईएएस की परीक्षा में अंग्रेजी और हिंदी दोनों ही माध्यम में प्रश्नपत्र मिलता है। हिंदी की इस बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अब बाजार भी हिंदी भाषा का इस्तेमाल करने लगा है। इसके बावजूद हिंदी के सामने अब भी कुछ लोगों की औपनिवेशिक सोच, अंतरराष्ट्रीय बाजारवाद, पूंजीवाद आदि चुनौतियां हैं। अभिजात्य वर्ग के कई लोग अंग्रेजी भाषा के इस्तेमाल पर गर्व महसूस करते हैं।
समाज को एक सूत्र में पिरोती है हिंदी : डॉ. कुशवाहा
काशीपुर। राधेहरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र कुशवाहा बताते हैं कि हिंदी समाज को एक सूत्र में पिरोने की पूर्ण सामर्थ्य रखती है। हिंदी की प्रमाणिकता के लिए उच्चारण, मनन एवं अभिव्यक्ति में पूर्ण सामंजस्य है। हिंदी समाज में समरसता, सहजता एवं माधुर्य की भावना का प्रचार-प्रसार करने एवं व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देती है। हिंदी से व्यक्ति को मानवीय मूल्यों का विकास, समाज को समझने एवं परिशोधन करने की क्षमता मिलती है। प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी कार्यालयों एवं न्यायिक सेवाओं में हिंदी के प्रचार-प्रसार पर ध्यान दिया जा रहा है। समाज में कुछ लोग निम्न स्तर का मानकर हिंदी की अनदेखी कर रहे हैं। यह चिंताजनक है।
नई पीढ़ी के बीच भी हिंदी बना रही महत्व : डॉ. दीपिका
काशीपुर। चंद्रावती तिवारी स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय ने बताया कि राष्ट्र भाषा प्रचार समिति वर्धा के सुझाव पर पहली बार वर्ष 1953 में हिंदी दिवस मनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा को बढ़ावा देना और लोगों को इसके महत्व के प्रति जागरूक करना था। लोगों को जागरूक करने के लिए हिंदी दिवस पर प्रतियोगिताएं, समारोह, भाषण, कविताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। नई पीढ़ी के बीच हिंदी अपना महत्व बना रही है। देश में 14 से 21 सितंबर तक राजभाषा सप्ताह मनाया जाता है। इसे हिंदी सप्ताह कहा जाता है। कहीं हिंदी पखवाड़ा भी मनाया जाता है। इसके बावजूद कुछ लोग हिंदी बोलने में शर्म महसूस करते हैं। ऐसे लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
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तराई के दो सरकारी विद्यालयों में हिंदी शिक्षक नहीं
रुद्रपुर। शिक्षा विभाग में मातृभाषा की अनदेखी हो रही है। तराई के आठ सरकारी विद्यालयों में हिंदी शिक्षकों के नौ पद खाली हैं। इनमें से सात विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है। सीईओ आरसी आर्या ने बताया कि खाली पदों को भरने के लिए प्रस्ताव मुख्यालय में भेजा गया है। बृहस्पतिवार को प्रस्तावित विभागीय बैठक में शिक्षकों के खाली पदों पर चर्चा की जाएगी। खाली पदों पर नियुक्ति होने तक अतिथि शिक्षक हिंदी पढ़ाएंगे।
राजकीय हाईस्कूल रंपुरा और अटल उत्कृष्ट थारू जीआईसी खटीमा में हिंदी पढ़ाने के लिए अतिथि शिक्षक तक नहीं हैं। स्कूल का भवन निर्माण कार्य होने के कारण रंपुरा के विद्यार्थी एएन झा इंटर कॉलेज में पढ़ रहे हैं। जीआईसी सकैनिया गदरपुर में दो, जीआईसी सैंजना खटीमा, राजकीय हाईस्कूल रंपुरा रुद्रपुर, राउमावि खेमपुर गदरपुर, राउमावि सिसौना सितारगंज, राउमावि आस्तातिही सितारगंज, राउमावि सरपुड़ा खटीमा में हिंदी शिक्षक नहीं हैं। इन विद्यालयों में अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं।
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समाज को एक सूत्र में पिरोती है हिंदी : डॉ. कुशवाहा
काशीपुर। राधेहरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र कुशवाहा बताते हैं कि हिंदी समाज को एक सूत्र में पिरोने की पूर्ण सामर्थ्य रखती है। हिंदी की प्रमाणिकता के लिए उच्चारण, मनन एवं अभिव्यक्ति में पूर्ण सामंजस्य है। हिंदी समाज में समरसता, सहजता एवं माधुर्य की भावना का प्रचार-प्रसार करने एवं व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देती है। हिंदी से व्यक्ति को मानवीय मूल्यों का विकास, समाज को समझने एवं परिशोधन करने की क्षमता मिलती है। प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी कार्यालयों एवं न्यायिक सेवाओं में हिंदी के प्रचार-प्रसार पर ध्यान दिया जा रहा है। समाज में कुछ लोग निम्न स्तर का मानकर हिंदी की अनदेखी कर रहे हैं। यह चिंताजनक है।
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नई पीढ़ी के बीच भी हिंदी बना रही महत्व : डॉ. दीपिका
काशीपुर। चंद्रावती तिवारी स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय ने बताया कि राष्ट्र भाषा प्रचार समिति वर्धा के सुझाव पर पहली बार वर्ष 1953 में हिंदी दिवस मनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा को बढ़ावा देना और लोगों को इसके महत्व के प्रति जागरूक करना था। लोगों को जागरूक करने के लिए हिंदी दिवस पर प्रतियोगिताएं, समारोह, भाषण, कविताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। नई पीढ़ी के बीच हिंदी अपना महत्व बना रही है। देश में 14 से 21 सितंबर तक राजभाषा सप्ताह मनाया जाता है। इसे हिंदी सप्ताह कहा जाता है। कहीं हिंदी पखवाड़ा भी मनाया जाता है। इसके बावजूद कुछ लोग हिंदी बोलने में शर्म महसूस करते हैं। ऐसे लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
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तराई के दो सरकारी विद्यालयों में हिंदी शिक्षक नहीं
रुद्रपुर। शिक्षा विभाग में मातृभाषा की अनदेखी हो रही है। तराई के आठ सरकारी विद्यालयों में हिंदी शिक्षकों के नौ पद खाली हैं। इनमें से सात विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है। सीईओ आरसी आर्या ने बताया कि खाली पदों को भरने के लिए प्रस्ताव मुख्यालय में भेजा गया है। बृहस्पतिवार को प्रस्तावित विभागीय बैठक में शिक्षकों के खाली पदों पर चर्चा की जाएगी। खाली पदों पर नियुक्ति होने तक अतिथि शिक्षक हिंदी पढ़ाएंगे।
राजकीय हाईस्कूल रंपुरा और अटल उत्कृष्ट थारू जीआईसी खटीमा में हिंदी पढ़ाने के लिए अतिथि शिक्षक तक नहीं हैं। स्कूल का भवन निर्माण कार्य होने के कारण रंपुरा के विद्यार्थी एएन झा इंटर कॉलेज में पढ़ रहे हैं। जीआईसी सकैनिया गदरपुर में दो, जीआईसी सैंजना खटीमा, राजकीय हाईस्कूल रंपुरा रुद्रपुर, राउमावि खेमपुर गदरपुर, राउमावि सिसौना सितारगंज, राउमावि आस्तातिही सितारगंज, राउमावि सरपुड़ा खटीमा में हिंदी शिक्षक नहीं हैं। इन विद्यालयों में अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं।

डॉ. सुभाष चंद्र कुशवाहा।

डॉ. सुभाष चंद्र कुशवाहा।