Exclusive: किसानों की उपज सीधे व्यापारियों तक पहुंचाएगा हालोमंडी एप, MNC की नौकरी छोड़ी; आशु ने दिखाई नई राह
चौखुटिया की आशु राठौर ने किसानों को नई राह दिखाई है। उन्होंने होनहार युवाओं की मदद से 15 लाख रुपये में डिजिटल हालोमंडी एप बनाया है। यह किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक शानदार पहल है।
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अब किसान अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर नहीं होंगे। चौखुटिया (उत्तराखंड) की आशु राठौर ने किसानों को नई राह दिखाई है। उन्होंने होनहार युवाओं की मदद से 15 लाख रुपये में डिजिटल हालोमंडी एप बनाया है। यह किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक शानदार पहल है। उनका यह प्रयास न केवल किसानों को डिजिटल रूप से मजबूत बनाएगा बल्कि उन्हें अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार भी उपलब्ध कराएगा।
दिल्ली की प्रतिष्ठित एमएनसी कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत आशु राठौर हमेशा से प्रदेश के किसानों और व्यापारियों के लिए कुछ बड़ा करने का सपना देखतीं थीं। उन्होंने देखा कि उत्तराखंड के किसान और छोटे व्यापारी कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कृषि उत्पादों का सही मूल्य न मिलना, बाजार तक पहुंच की कठिनाइयां और व्यापार के सीमित अवसर आदि समस्याओं के हल के लिए उन्हें यह एप बनाने की प्रेरणा मिली।
एप के जरिये आपस में जुड़ते हैं किसान, होलसेलर और रिटेलर
एप के माध्यम से किसान, होलसेलर और रिटेलर एक दूसरे से जुड़ते हैं। एप फसलों को सीधे सूचीबद्ध भी करता है। खरीदारों को खोजने की जरूरत नहीं पड़ती, एप उन्हें ऑटोमेटिक जोड़ता है। एआई और विशेषज्ञ परामर्श, कृषि डॉक्टरों की सहायता से फसल से जुड़ीं समस्याओं के समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों तक पहुंच और फसलों में आने वाली बीमारियों की पहचान और इलाज सब कुछ एप पर उपलब्ध है।
पॉडकास्ट के जरिये मिलेंगी कई जानकारियां
पॉडकास्ट से अनुभवी किसानों से खेती के सर्वोत्तम तरीकों की जानकारी, इन्वेंट्री प्रबंधन से वस्तुओं की पहचान, एनालिटिक्स पर नजर रखना, बिक्री और खरीद में सुधार के लिए विश्लेषण एवं निगरानी भी करता है। बाजार और मौसम की जानकारी का त्वरित अपडेट, एआई की मदद से उपज का अनुमान लगाना आदि लाभ ले सकते हैं।
ऐसे काम करता है एप्लिकेशन
आशू ने बताया कि यह एप पूरे देश में लांच किया गया है। किसान इसे गूगल प्ले स्टोर से निशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं। इस एप के माध्यम से किसान और व्यापारी आपस में सीधे संपर्क कर पारदर्शी तरीके से व्यापार कर सकते हैं। किसान अपनी उपज सीधे व्यापारियों को बेच सकते हैं। फसल के सही दाम और बाजार की ताजा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं। ऑडियो और वीडियो पॉडकास्ट के जरिये नई तकनीकों और खेती की आधुनिक विधियां सीख सकते हैं। इतना ही नहीं, किसान इसमें इन्वेंट्री बनाकर अपनी उपज का नाम, मात्रा और दर आदि दर्ज कर सकते हैं। इससे उन्हें पूर्व में बेची उपज की जानकारी मिलेगी।
शिपोटल टेक्नोलॉजीज की ली मदद
इस एप को विकसित करने के लिए शिपोटल टेक्नोलॉजीज की तकनीकी विशेषज्ञता ली गई है। इसमें ईतेश कांडपाल और नीलू अग्रवाल ने अहम भूमिका निभाई। पंतनगर विवि के बीटेक छात्रों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ा गया ताकि उत्तराखंड के युवा भी इस इनोवेटिव पहल का हिस्सा बन अपने प्रदेश के विकास में योगदान दे सकें।
एप विकसित करने में इनका रहा योगदान
हालोमंडी एप विकसित करने में उत्तराखंड के होनहार युवा भावना बिष्ट, पंकज सिंह डोभाल, कविता, प्रिया रावत, मुन्ना सिंह, चंद्रशेखर थुवाल और विजय सिंह सहित पंतनगर विवि के बीटेक छात्र वैभव त्रिपाठी, यश, आदित्य एवं नवदीप जोशी की भूमिका महत्वपूर्ण रही।