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तालाबंदी न हो सकी तो धरना देकर गरजे प्रधान
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रुद्रपुर। 12 सूत्री मांगों के लिए 10 दिनों से ब्लॉक कार्यालयों में तालाबंदी के बावजूद सरकार की उपेक्षा से आहत जिलेभर के सैकड़ों ग्राम प्रधान विकास भवन में तालाबंदी करने पहुंच गए। हालांकि विकास भवन गेट पर तैनात पुलिस फोर्स ने प्रधानों को रोक दिया। ग्राम प्रधानों की पुलिसकर्मियों के साथ कहासुनी और धक्कामुक्की हुई। आक्रोशित प्रधानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर सवा तीन घंटे तक विकास भवन गेट पर धरना दिया। पंचायती राज विभाग के सचिव एसडी आर्य की ओर से मुख्यमंत्री के साथ वार्ता कराने का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्राम प्रधान ने धरना समाप्त किया और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा।
सोमवार सुबह 10 बजे उत्तराखंड ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल की अगुवाई में ग्राम प्रधानों ने तालाबंदी करने के लिए नेशनल हाईवे-87 से विकास भवन को ओर कूच किया। हाईवे की तरफ से कुछ ग्राम प्रधानों को पुलिस ने बेरिकेडिंग लगाकर रोकने का प्रयास किया लेकिन आक्रोशित ग्राम प्रधान धक्कामुक्की करते हुए विकास भवन गेट पर पहुंच गए। उन्होंने मुख्य गेट पर तालाबंदी करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें सख्ती के साथ रोक दिया। इसको लेकर प्रधानों की पुलिसकर्मियों से नोकझोंक भी हुई।
प्रधानों का आक्रोश देखते हुए एडीएम जगदीश चंद्र कांडपाल और एसपी सिटी ममता बोरा ने विकास भवन के दोनों गेट को भीतर से बंद करने के निर्देश दिए। इसके बाद आक्रोशित ग्राम प्रधान गेट के सामने धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि कहा कि एक से 10 जुलाई तक 12 सूत्री मांगों के लिए ब्लॉक कार्यालयों में लगातार तालाबंदी और धरना देने के बावजूद सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुंचा। विधायकों को दो-दो करोड़ रुपये की निधि दी जा रही है जबकि ग्राम पंचायतों के बजट में कटौती कर ग्रामीण भारत को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता तिलकराज बेहड़, राजेंद्र पाल सिंह और हरीश पनेरू ने भी ग्राम प्रधानों के आंदोलन का समर्थन किया। विधायक राजकुमार ठुकराल ने धरनास्थल पर पहुंचकर ग्राम प्रधानों को आश्वासन दिया कि उन्होंने पंचायती राज मंत्री को फोन पर ग्राम प्रधानों की समस्याओं अवगत करा दिया है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से भी ग्राम प्रधानों की वार्ता कराने का आश्वासन दिया। लेकिन ग्राम प्रधान लिखित आश्वासन के बाद धरना समाप्त करने की बात पर अड़े रहे।
करीब सवा एक बजे पंचायती राज विभाग के सचिव एसडी आर्य की ओर से मुख्यमंत्री से वार्ता का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्राम प्रधानों ने धरना समाप्त किया। इसके बाद ग्राम प्रधानों ने गांधी पार्क में बैठक कर अगली रणनीति बनाई। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सम्मल ने कहा कि 17 जुलाई को ग्राम प्रधान संगठन की हल्द्वानी में बैठक होगी। यदि 20 जुलाई तक मांगें पूरी नहीं की गईं तो 21 से रुद्रपुर के गांधी पार्क में क्रमिक अनशन और फिर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। वहां दीपक मिश्रा, पूजा वर्मा, रूपा ठाकुर, गुलशन सिंधी, महेश राठौर, संजय चौधरी, रविंदर सिंह, ऊषा चंद सहित अनेक ग्राम प्रधान मौजूद रहे।
महिला पुलिस कर्मियों ने संभाला विकास भवन गेट पर मोर्चा
रुद्रपुर। आक्रोशित ग्राम प्रधानों के विकास भवन परिसर में घुसने के प्रयास के दौरान पुलिस-प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। काफी जद्दोजहद के बाद ग्राम प्रधानों को विकास भवन गेट पर प्रवेश करने से रोका गया। बाद में सवा तीन घंटे तक विकास गेट पर महिला पुलिस फोर्स ने मोर्चा संभाले रखा। (संवाद)
ग्राम प्रधानों को धरनास्थल उठाने की थी तैयारी
रुद्रपुर। कलक्ट्रेट परिसर के करीब सौ मीटर दायरे में धरना-प्रदर्शन को प्रतिबंधित किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से रुद्रपुर के गांधी पार्क को धरनास्थल बनाया गया है। इसके बावजूद ग्राम प्रधान विकास भवन की तालाबंदी के बाद परिसर में धरना देने पहुंच गए। सूत्रों के अनुसार विकास भवन गेट पर धरना दे रहे ग्राम प्रधानों को पहले धरनास्थल से उठाकर गांधी पार्क में ले जाने की तैयारी थी लेकिन ग्राम प्रधानों की संख्या अधिक होने और कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के कारण वहीं धरना दे रहे ग्राम प्रधानों को सिर्फ समझाने का प्रयास किया गया।
ग्राम प्रधान संगठन अध्यक्ष को मनाते रहे अधिकारी
रुद्रपुर। ग्राम प्रधानों के आक्रामक रुख को देखते हुए जिला प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बचता रहा। एडीएम जगदीश कांडपाल उत्तराखंड प्रधान संगठन के अध्यक्ष भास्कर सम्मल को अकेले में ले जाकर वार्ता करते रहे। उन्होंने सम्मल के सामने फोन पर डीएम से भी वार्ता की लेकिन ग्राम प्रधान अपनी मांगों पर अडिग रहे।
विकास भवन गेट से लौटे फरियादी
रुद्रपुर। ग्राम प्रधानों के धरने के कारण सुबह 10 बजे से दोपहर करीब सवा एक बजे तक विकास भवन के दोनों गेट बंद होने के कारण अपनी समस्या लेकर पहुंचे सैकड़ों फरियादी खाली हाथ लौट गए। इसके साथ ही कई कर्मचारी घंटों विकास भवन गेट पर खड़े रहे। धरने के दौरान एक बार ग्राम प्रधानों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने की कार्रवाई की चर्चा भी हुई। ग्राम प्रधानों ने एडीएम की तरफ इशारा कर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कार्रवाई हुई तो कलक्ट्रेट में ही धरने पर बैठ जाएंगे।
ग्राम प्रधानों की 12 मांगें
1- सीएससी को 2500 रुपये प्रतिमाह ग्राम पंचायतों से दिए जाने का निर्णय वापस लिया जाए।
2- 15वें वित्त मेें हो रही कटौती पर रोक लगाई जाए।
3- 73वें संविधान संशोधन के प्रावधानों को लागू कर 29 विषयों को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाए।
4- ग्राम प्रधानों का मानदेय 1500 रुपये बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया जाए और पांच हजार रुपये पेंशन मिले।
5- मनरेेगा के कार्य दिवस प्रति परिवार 100 से 200 दिन किए जाएं।
6- ग्राम पंचायतों में जेई और कंप्यूटर ऑपरेटर की शीघ्र नियुक्ति की जाए।
7- ग्राम विकास विभाग और ग्राम पंचायत विभाग का पूर्व की भांति एकीकरण किया जाए।
8- ग्राम पंचायतों के लिए भी पांच लाख रुपये प्रति वर्ष की ग्राम पंचायत निधि की व्यवस्था की जाए।
9- ग्राम पंचायतों को प्रतिवर्ष आपदा मद से प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये दिए जाएं।
10- ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों में ग्राम पंचायत की खुली बैठक का प्रस्ताव और अनुमति को अनिवार्य किया जाए।
11- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयनित ग्राम पंचायतों के लाभार्थियों को अतिशीघ्र धनराशि दी जाए।
12- कोरोना काल के कारण ग्राम पंचायतों का कार्यकाल दो वर्ष बढ़ाया जाए।
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सोमवार सुबह 10 बजे उत्तराखंड ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल की अगुवाई में ग्राम प्रधानों ने तालाबंदी करने के लिए नेशनल हाईवे-87 से विकास भवन को ओर कूच किया। हाईवे की तरफ से कुछ ग्राम प्रधानों को पुलिस ने बेरिकेडिंग लगाकर रोकने का प्रयास किया लेकिन आक्रोशित ग्राम प्रधान धक्कामुक्की करते हुए विकास भवन गेट पर पहुंच गए। उन्होंने मुख्य गेट पर तालाबंदी करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें सख्ती के साथ रोक दिया। इसको लेकर प्रधानों की पुलिसकर्मियों से नोकझोंक भी हुई।
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प्रधानों का आक्रोश देखते हुए एडीएम जगदीश चंद्र कांडपाल और एसपी सिटी ममता बोरा ने विकास भवन के दोनों गेट को भीतर से बंद करने के निर्देश दिए। इसके बाद आक्रोशित ग्राम प्रधान गेट के सामने धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि कहा कि एक से 10 जुलाई तक 12 सूत्री मांगों के लिए ब्लॉक कार्यालयों में लगातार तालाबंदी और धरना देने के बावजूद सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुंचा। विधायकों को दो-दो करोड़ रुपये की निधि दी जा रही है जबकि ग्राम पंचायतों के बजट में कटौती कर ग्रामीण भारत को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता तिलकराज बेहड़, राजेंद्र पाल सिंह और हरीश पनेरू ने भी ग्राम प्रधानों के आंदोलन का समर्थन किया। विधायक राजकुमार ठुकराल ने धरनास्थल पर पहुंचकर ग्राम प्रधानों को आश्वासन दिया कि उन्होंने पंचायती राज मंत्री को फोन पर ग्राम प्रधानों की समस्याओं अवगत करा दिया है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से भी ग्राम प्रधानों की वार्ता कराने का आश्वासन दिया। लेकिन ग्राम प्रधान लिखित आश्वासन के बाद धरना समाप्त करने की बात पर अड़े रहे।
करीब सवा एक बजे पंचायती राज विभाग के सचिव एसडी आर्य की ओर से मुख्यमंत्री से वार्ता का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्राम प्रधानों ने धरना समाप्त किया। इसके बाद ग्राम प्रधानों ने गांधी पार्क में बैठक कर अगली रणनीति बनाई। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सम्मल ने कहा कि 17 जुलाई को ग्राम प्रधान संगठन की हल्द्वानी में बैठक होगी। यदि 20 जुलाई तक मांगें पूरी नहीं की गईं तो 21 से रुद्रपुर के गांधी पार्क में क्रमिक अनशन और फिर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। वहां दीपक मिश्रा, पूजा वर्मा, रूपा ठाकुर, गुलशन सिंधी, महेश राठौर, संजय चौधरी, रविंदर सिंह, ऊषा चंद सहित अनेक ग्राम प्रधान मौजूद रहे।
महिला पुलिस कर्मियों ने संभाला विकास भवन गेट पर मोर्चा
रुद्रपुर। आक्रोशित ग्राम प्रधानों के विकास भवन परिसर में घुसने के प्रयास के दौरान पुलिस-प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। काफी जद्दोजहद के बाद ग्राम प्रधानों को विकास भवन गेट पर प्रवेश करने से रोका गया। बाद में सवा तीन घंटे तक विकास गेट पर महिला पुलिस फोर्स ने मोर्चा संभाले रखा। (संवाद)
ग्राम प्रधानों को धरनास्थल उठाने की थी तैयारी
रुद्रपुर। कलक्ट्रेट परिसर के करीब सौ मीटर दायरे में धरना-प्रदर्शन को प्रतिबंधित किया गया है। जिला प्रशासन की ओर से रुद्रपुर के गांधी पार्क को धरनास्थल बनाया गया है। इसके बावजूद ग्राम प्रधान विकास भवन की तालाबंदी के बाद परिसर में धरना देने पहुंच गए। सूत्रों के अनुसार विकास भवन गेट पर धरना दे रहे ग्राम प्रधानों को पहले धरनास्थल से उठाकर गांधी पार्क में ले जाने की तैयारी थी लेकिन ग्राम प्रधानों की संख्या अधिक होने और कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के कारण वहीं धरना दे रहे ग्राम प्रधानों को सिर्फ समझाने का प्रयास किया गया।
ग्राम प्रधान संगठन अध्यक्ष को मनाते रहे अधिकारी
रुद्रपुर। ग्राम प्रधानों के आक्रामक रुख को देखते हुए जिला प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बचता रहा। एडीएम जगदीश कांडपाल उत्तराखंड प्रधान संगठन के अध्यक्ष भास्कर सम्मल को अकेले में ले जाकर वार्ता करते रहे। उन्होंने सम्मल के सामने फोन पर डीएम से भी वार्ता की लेकिन ग्राम प्रधान अपनी मांगों पर अडिग रहे।
विकास भवन गेट से लौटे फरियादी
रुद्रपुर। ग्राम प्रधानों के धरने के कारण सुबह 10 बजे से दोपहर करीब सवा एक बजे तक विकास भवन के दोनों गेट बंद होने के कारण अपनी समस्या लेकर पहुंचे सैकड़ों फरियादी खाली हाथ लौट गए। इसके साथ ही कई कर्मचारी घंटों विकास भवन गेट पर खड़े रहे। धरने के दौरान एक बार ग्राम प्रधानों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने की कार्रवाई की चर्चा भी हुई। ग्राम प्रधानों ने एडीएम की तरफ इशारा कर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कार्रवाई हुई तो कलक्ट्रेट में ही धरने पर बैठ जाएंगे।
ग्राम प्रधानों की 12 मांगें
1- सीएससी को 2500 रुपये प्रतिमाह ग्राम पंचायतों से दिए जाने का निर्णय वापस लिया जाए।
2- 15वें वित्त मेें हो रही कटौती पर रोक लगाई जाए।
3- 73वें संविधान संशोधन के प्रावधानों को लागू कर 29 विषयों को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाए।
4- ग्राम प्रधानों का मानदेय 1500 रुपये बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया जाए और पांच हजार रुपये पेंशन मिले।
5- मनरेेगा के कार्य दिवस प्रति परिवार 100 से 200 दिन किए जाएं।
6- ग्राम पंचायतों में जेई और कंप्यूटर ऑपरेटर की शीघ्र नियुक्ति की जाए।
7- ग्राम विकास विभाग और ग्राम पंचायत विभाग का पूर्व की भांति एकीकरण किया जाए।
8- ग्राम पंचायतों के लिए भी पांच लाख रुपये प्रति वर्ष की ग्राम पंचायत निधि की व्यवस्था की जाए।
9- ग्राम पंचायतों को प्रतिवर्ष आपदा मद से प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये दिए जाएं।
10- ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों में ग्राम पंचायत की खुली बैठक का प्रस्ताव और अनुमति को अनिवार्य किया जाए।
11- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयनित ग्राम पंचायतों के लाभार्थियों को अतिशीघ्र धनराशि दी जाए।
12- कोरोना काल के कारण ग्राम पंचायतों का कार्यकाल दो वर्ष बढ़ाया जाए।