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तीन दिन के किसान कुंभ का राज्यपाल ने किया उद्घाटन
अमर उजाला ब्यूरो,हल्द्वानी
Updated Sun, 25 Feb 2018 12:39 AM IST
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Agriculture
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पंतनगर विश्वविद्यालय के किसान कुंभ में पहुंचे राज्यपाल केके पाल ने कहा कि मौसम के बदलते रुख के हिसाब से खेती किसानी में बदलाव के लिए विश्वविद्यालय भी किसानों की मदद करे। राज्यपाल ने फसल अवशेष के जलाने से हो रहे प्रदूषण पर चिंता जताई और कहा कि किसान भी समझें कि इससे खेती को भी नुकसान होता है।
तीन दिन के किसान मेले के उद्घाटन सत्र में राज्यपाल ने कहा कि जलवायु बदलाव के कारण फसल उत्पादन को प्रभावित न होने देने के लिए काम करने की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन दीर्घकालिक है और इस लिहाज से हमें भी बदलना चाहिए। विश्वविद्यालय सूखे की स्थिति का सामना कर सकने वाले बीज का विकास करे, पानी की कमी से निपटने के लिए बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली से आगे बढ़कर काम करे और जरूरत पड़े तो विदेश की नई तकनीकों का स्थानीय स्तर पर प्रयोग करे।
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राज्यपाल ने कहा कि फसल अवशेष को न जलाने केलिए किसानों को जागरूक किया जाना चाहिए। विशेषज्ञ भी किसानों को फसल अवशेष का उपयोग उत्पादकता बढ़ाने में करने की जानकारी दें। राज्यपाल ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में केंद्र सरकार की ओर से हुए बदलाव को सराहा और कहा कि इससे किसानों को फायदा होगा। विश्वविद्यालय के कुलपति एके मिश्रा ने कहा कि किसानों की आय को दोगुना करने के लिए विश्वविद्यालय काम कर रहा है।
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इससे पूर्व राज्यपाल ने गांधी मैदान में लगे किसान मेले का फीता काटकर उद्घाटन किया और मेले में लगे स्टाल देखे। निदेशक प्रसार शिक्षा वाईपीएस डबास, स्थानीय विधायक राजेश शुक्ला, प्रबंध परिषद के सदस्य राजेंद्र पाल सिंह के अतिरिक्त अन्य वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित थे। तीन दिन के इस किसान मेले में नेपाल के अलावा देश के विभिन्न राज्यों से आए किसान शामिल हुए। मेले में करीब 70 स्टाल लगाए गए हैं और पहले दिन करीब 626 किसानों ने पंजीकरण कराया।
गायों को चाहिए अपने लिए पर्याप्त जगह
पंतनगर। किसान मेले में पंत विश्वविद्यालय की ओर से बनाई गई आदर्श गौशाला पशुपालकों को यह भी जता गई कि दुधारू पशुओं को अपने रहने के लिए पर्याप्त जगह मिले तो वे स्वस्थ भी रहेंगे और खूब दूध भी देंगे।
विभागाध्यक्ष डा.डीवी सिंह ने बताया कि आदर्श गौशाला में कुट्टी काटने की मशीन, मलमूत्र निस्तारण के उपाय, जानवर के बैठने के लिए नीचे से पुवाल बिछाने की व्यवस्था और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के साथ साथ इस गौशाला को सौर ऊर्जा से रोशन किया गया है। डा. सिंह ने बताया कि तराई भाबर के साथ यह पहाड़ के पशुपालकों के लिए भी उत्तम है। आदर्श गौशाला का डिजाइन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पशुओं की जरूरत के हिसाब से किया गया है। दो जानवरों के लिए 15 गुणा 15 और चार जानवरों के लिए 15 गुणा 30 स्वायर मीटर स्थान की जरूरत होती है। गौशाला की लागत लगभग साठ हजार रुपये आती है।
पहाड़ में खेती के लिए मुफीद साबित होगा सराची 75 जेड पावर वीडर
पंतनगर। तराई भाबर में खेती के लिए कई कृषि यंत्र हैं लेकिन अब पहाड़ के काश्तकार भी खेती में तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। पहाड़ की विषम भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कोलकाता की कंपनी सराची ने तैयार किया है सराची 75 जेड पावर वीडर।
किसान मेले में पहुंचे कंपनी के सेल्स एंड मार्केटिंग विभाग के राज्य प्रभारी गौरव शर्मा ने बताया कि पैट्रोल से चलने वाला यह एक बेहद छोटा टैक्टर है जिससे पहाड़ में खेतों में आसानी से खुदाई की जा सकती है। विशेष बात यह है कि इसे महिलाएं भी चला सकती हैं। शर्मा ने बताया कि अब तक उनकी कंपनी पिथौरागढ़ और डीडीहाट में 100 से अधिक सराची जेड पावर वीडर बेचे चुकी है। इसकी लागत 50 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक है। कृषि और उद्यान विभाग के माध्मय से काश्तकार इसे अनुदान पर भी ले सकते हैं।