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Udham Singh Nagar News: सरकारी अस्पताल का गेट बना वाहन स्टैंड
Tue, 19 Mar 2024 12:15 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 19 Mar 2024 12:15 AM IST
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काशीपुर सरकारी अस्पताल के बाहार बेढंग खड़ी ई रिक्शा। संवाद
काशीपुर। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते सरकारी अस्पताल का गेट ई-रिक्शा स्टैंड बन गया है। इस दौरान इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। विभागीय अधिकारी पार्किंग का ठेका दोबारा होने की बात कर रहे हैं।
एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय की पार्किंग का ठेका सितंबर 2022 में हुआ था। अगस्त 2023 को ठेका समाप्त होने के बाद ई-रिक्शा और अन्य वाहन अस्पताल परिसर में घुस रहे हैं। यहां ई-रिक्शा और वाहन गेट के पास बेतरतीब ढंग से खड़े हो रहे हैं। वहीं निशुल्क पार्किंग व्यवस्था के बाद भी दोपहिया वाहनों को इमरजेंसी गेट पर खड़ा कर रहे हैं। इससे एंबुलेंस को बैक करने तक की जगह नहीं मिल पा रही है। इससे किसी भी मरीज की जान पर बन सकती है।
इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। बता दें कि कोरोनाकाल के बाद से अस्पताल में सुरक्षा कर्मी की व्यवस्था नहीं हो सकी है जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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चार मार्च को पार्किंग के टेंडर खुल चुके हैं। लेकिन ठेके की 4.10 लाख की धनराशि अधिक होने से किसी ने भी टेंडर नहीं डाले। नियमानुसार टेंडर दो बार और होंगे। यदि इसमें भी कोई नहीं आता है, तो डीएम से अनुमति लेकर टेंडर की राशि तय की जाएगी। - डॉ. खेमपाल, सीएमएस, सरकारी अस्पताल काशीपुरI
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एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय की पार्किंग का ठेका सितंबर 2022 में हुआ था। अगस्त 2023 को ठेका समाप्त होने के बाद ई-रिक्शा और अन्य वाहन अस्पताल परिसर में घुस रहे हैं। यहां ई-रिक्शा और वाहन गेट के पास बेतरतीब ढंग से खड़े हो रहे हैं। वहीं निशुल्क पार्किंग व्यवस्था के बाद भी दोपहिया वाहनों को इमरजेंसी गेट पर खड़ा कर रहे हैं। इससे एंबुलेंस को बैक करने तक की जगह नहीं मिल पा रही है। इससे किसी भी मरीज की जान पर बन सकती है।
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इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। बता दें कि कोरोनाकाल के बाद से अस्पताल में सुरक्षा कर्मी की व्यवस्था नहीं हो सकी है जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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चार मार्च को पार्किंग के टेंडर खुल चुके हैं। लेकिन ठेके की 4.10 लाख की धनराशि अधिक होने से किसी ने भी टेंडर नहीं डाले। नियमानुसार टेंडर दो बार और होंगे। यदि इसमें भी कोई नहीं आता है, तो डीएम से अनुमति लेकर टेंडर की राशि तय की जाएगी। - डॉ. खेमपाल, सीएमएस, सरकारी अस्पताल काशीपुरI