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एयरपोर्ट जरुरी लेकिन विवि की जमीन के बजाय तलाशें अन्य विकल्प

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 30 Nov 2020 12:48 AM IST
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Go for another option rather university' land
पंत विश्व विद्यालय का प्रशासनिक भवन। - फोटो : RUDRAPUR
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की प्राग फार्म से लगी भूमि पर प्रस्तावित न्यू ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए भूमि हस्तांतरित करने संबंधी शासन के निर्देश से विवि की प्रबंध परिषद के पूर्व सदस्य सहित वैज्ञानिक भी इसके विरोध में हैं। इन लोगों के अनुसार क्षेत्र के विकास के लिए एयरपोर्ट बनना जरूरी है लेकिन इसके लिए पंत विवि की भूमि को खुर्दबुर्द करने के बजाय अन्य विकल्पों पर गौर करना चाहिए।
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इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए प्रदेश के 63 गणमान्य लोगों ने सरकार को अनुरोध पत्र भेजे हैं। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के निदेशक लक्ष्मीकांत और पंतनगर विवि के कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने मुख्य सचिव और सीएम को पत्र लिखकर विवि की भूमि को खुर्दबुर्द नहीं करने की गुहार लगाई है।
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उन्होंने पत्र में लिखा है कि पर्वतीय फसलों के विभिन्न प्रजातियों के उच्च गुणवत्तायुक्त बीजों का उत्पादन केवल पंत विवि के मैदानी क्षेत्र में ही हो सकता है। क्षेत्र की अन्य संस्थाओं द्वारा उत्पादित बीजों की उत्पादक क्षमता पंत विवि के बीजों की अपेक्षा कम होती है। विवि की भूमि पर एयरपोर्ट का निर्माण किया जाता है तो भारी पत्थरों के प्रयोग से शेष बची भूमि में अनायास दबाव पड़ेगा। एयरपोर्ट से लगी शेष भूमि की कृषि पारिस्थितिकी पूरी तरह से असंतुलित हो जाएगी। कुलपति ने चार अप्रैल 2008 को आयोजित प्रबंध परिषद की 225वीं बैठक में पारित संकल्प का हवाला देते हुए विवि की भूमि नहीं देने का अनुरोध किया है।
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- जिस शिक्षा, शोध और प्रसार की सोच के साथ इस विवि की स्थापना हुई थी, यह सरकार उस पर कुठाराघात कर रही है, और धीरे-धीरे उसकी जमीनें छीनकर उसे समेटा जा रहा है। वह भी तब, जब सरकार के पास कई विकल्प मौजूद हैं। यहां बड़े एयरपोर्ट की आवश्यकता है यह भी सच है। लेकिन पहले पूर्व में बनी योजनाओं के तहत नगला बाईपास तक या सैनिक फार्म तक एयरपोर्ट को विकसित किया जाना चाहिए था। राजेंद्र पाल सिंह (पाटू) पूर्व सदस्य विवि प्रबंध परिषद
- सरकार विवि की भूमि देकर गलत कर रही है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। सरकार की इच्छाशक्ति में कमी है। एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए पूर्व में बने प्लान ए या बी के तहत बाधक बनी अवैध कालोनियों को हटवाकर इसका विस्तार नहीं करवा पाई। विवि के कर्मियों, शिक्षकों सहित संगठनों को भी इसके विरोध में मुखर होना चाहिए। -डॉ. पीएन सिंह, पूर्व अध्यक्ष पंतनगर विवि शिक्षक संघ
- सरकारों की गलत नीतियों से पंत विवि बदहाली की ओर जा रहा है। विवि की लगभग चार हजार एकड़ कृषि योग्य भूमि पहले ही सिडकुल व अन्य विभागों को चसौंपी जा चुकी है। अब सरकार को विवि की भूमि के बजाए अन्य विकल्प तलाश कर वहां एयरपोर्ट विकसित करना चाहिए।
-डॉ. अजीत कर्नाटक, कुलपति भरसार विवि।
- विवि की उपजाऊ भूमि जो न्यू ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए दी जा रही है। इससे विवि के स्थापित उद्देश्यों पर कुठाराघात होगा। एयरपोर्ट निर्माण के लिए बंजर भूमि ही उपयुक्त होती है, क्योंकि वहां पर घास और अन्य वनस्पतियां नहीं पनपती हैं। इससे वहां घास में कीड़े मकोड़े नहीं पनपते हैं और उन्हें खाने के लिए पक्षी भी नहीं आते हैं। इससे विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ में जोखिम भी कम होता है।

-डॉ. आरपीएस गंगवार, निदेशक महिला प्रौद्योगिकी संस्थान देहरादून
विवि की जमीन एयरपोर्ट को देना तर्कसंगत नहीं
रुद्रपुर। किसान पूर्व सैनिक संगठन के संयोजक कर्नल प्रमोद शर्मा ने कहा कि अपने राष्ट्र के साथ एशिया में अन्न की पूर्ति करने में इस विश्वविद्यालय का योगदान उल्लेखनीय है। इसके साथ ही केमिकल युक्त अनाज, फल, सब्जी, पानी से होने वाले असाध्य रोग धीरे-धीरे बहुत बड़ी समस्या बन चुके हैं। इस विषय पर शोध अभी शुरू भर हुआ है। इन रोगों के रोकथाम पर अभी बहुत काम होना बाकी है। किसानों को उनके उत्पाद का मूल्य न मिलना देश के लिए एक भारी चुनौती बन हुआ है। इन सब समस्याओं से निपटने के लिए शोध कार्यों के लिए बहुत बड़े क्षेत्र और इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को अपने निर्णय पर पुन: विचार करना चाहिए। विवि की जमीन हस्तांतरित नहीं करनी चाहिए।
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