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Udham Singh Nagar News: काशीपुर में ढहेगा कूड़े का पहाड़... 31 हजार मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण शुरू

Sat, 23 May 2026 12:50 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Sat, 23 May 2026 12:50 AM IST
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Garbage mountain to collapse in Kashipur... Disposal of 31,000 metric tons of waste begins
काशीपुर। नगर निगम के ट्रंचिंग ग्राउंड में वर्षों से जमा और पर्यावरण के लिए नासूर बने पुराने कूड़े के पहाड़ (लीगेसी वेस्ट) को खत्म करने का काम तेजी से चल रहा है। वर्षों पुराने हजारों मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग व निस्तारण किया जा रहा है। इस मुहिम से जहां एक ओर शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद मिल रही है वहीं दूसरी ओर कचरे से उपयोगी सामग्रियां अलग कर उनका रीसाइक्लिंग व औद्योगिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
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यह कूड़े का पहाड़ न सिर्फ वायु प्रदूषण फैला रहा था बल्कि आसपास की खेती की जमीन को बंजर करने के साथ ही पास से बहने वाली ढेला नदी के पानी को भी जहरीला बना रहा था।
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कार्यदायी कंपनी एमएसडब्लूएम काशीपुर प्रा.लि. के परिचालन महाप्रबंधक विकास कुमार ने बताया कि ट्रंचिंग ग्राउंड को पूरी तरह साफ करने का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 300 से 400 मीट्रिक टन पुराने कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। इसके अलावा डंप साइट पर मौजूद कुल 31 हजार मीट्रिक टन कूड़े में से लगभग 25 हजार मीट्रिक टन का निस्तारण किया जा चुका है। महाप्रबंधक ने बताया कि शहर से हर रोज 70 से 80 मीट्रिक टन नया कूड़ा भी निकलता है। कई बार मौसम खराब होने या बारिश होने की वजह से काम रोकना पड़ता है।
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कचरे से कंचन: पेपर मिल कर रही है आरडीएफ का इस्तेमाल

- कूड़े से प्लास्टिक, शीशा और धातु जैसी उपयोगी सामग्री को अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा रहा है।

- कचरे से निकलने वाले ज्वलनशील हिस्से (आरडीएफ) का प्रयोग शहर की ही एक पेपर मिल ईंधन के रूप में कर रही है।

- प्रोसेसिंग के बाद बची मिट्टी जैसी उपयोगी सामग्री को दोबारा भराव और अन्य कार्यों में इस्तेमाल में लाया जा रहा है।



काशीपुर का वेस्ट मैनेजमेंट

कुल जमा कूड़ा अब तक हुआ निस्तारण प्रतिदिन निस्तारण की क्षमता शहर से रोज निकलने वाला कूड़ा

31,000 मीट्रिक टन 25,000 मीट्रिक टन 300 से 400 मीट्रिक टन 70 से 80 मीट्रिक टन

प्रदूषण और बीमारियों पर लगेगा प्रभावी अंकुश

इस वैज्ञानिक प्रक्रिया से डंपिंग साइट से निकलने वाली दुर्गंध, जहरीली गैसों और लीचेड (कूड़े का गंदा पानी) जैसी गंभीर समस्याओं में भारी कमी आ रही है। काम पूरा होने के बाद आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा। साथ ही, भूमिगत जल (भूजल) और मिट्टी के प्रदूषण पर भी प्रभावी नियंत्रण हो सकेगा। - रविंद्र सिंह बिष्ट, नगर आयुक्त, काशीपुर
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