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Udham Singh Nagar News: गंगवार परिवार का जिपं की कुर्सी से दो दशक का वर्चस्व खत्म
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रुद्रपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्वाचन के बाद कुर्सी में दो दशक से चला रहा एक ही परिवार का वर्चस्व टूट गया। गंगवार परिवार ने अंतिम समय तक टिकट के लिए जोर आजमाइश की, लेकिन पार्टी ने तरजीह नहीं दी। हालांकि निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू गंगवार ने पर्चा खरीद लिया। सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन गंगवार ने अपने कदम खींच लिए।
राज्य गठन के बाद हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में गंगवार परिवार के एकाधिकार की शुरुआत हुई थी। 2004 और 2009 में स्व. सुशीला गंगवार जिपं अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। 2014 में उनके पति ईश्वरी प्रसाद गंगवार और 2019 में बहू रेनू गंगवार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। परिवार के पास तीन बार कांग्रेस और एक बार भाजपा में रहते कुर्सी आई थी।
इस चुनाव में भी रेनू गंगवार को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पार्टी में भारी विरोध के चलते परिवार की जिपं सीट को स्वतंत्र घोषित कर दिया गया। पार्टी का एक धड़ा उनके खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस सीट पर जीत के बाद रेनू की टिकट की दौड़ शुरू हो गई थी, मगर पार्टी में भारी विरोध के चलते उनकी राह मुश्किल होती गई। भाजपा ने सामान्य कार्यकर्ता अजय मौर्या पर भरोसा जताया और पार्टी में एकजुटता के चलते वे कुर्सी पर काबिज हो गए। रेनू गंगवार ने कहा कि पार्टी का निर्णय स्वीकार किया है। पार्टी ने सामान्य कार्यकर्ता अजय मौर्या को जिपं अध्यक्ष बनाया है, उसके लिए पार्टी और अजय मौर्या को बधाई है। 20 सालों तक जनता की सेवा की है और आगे की जनता के साथ खड़े रहेंगे। पार्टी सिपाही के रूप में वे कार्य करेंगे।
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जिपं उपाध्यक्ष के लिए नामांकन नहीं
जिला पंचायत उपाध्यक्ष के लिए किसी प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल नहीं किया। इस सीट पर एक जिला पंचायत सदस्य ने दो नामांकन पत्र खरीदे थे। सोमवार को नामांकन प्रक्रिया के दौरान किसी ने पर्चा दाखिल नहीं किया। इसके बाद यह पद रिक्त हो गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल ने बताया कि रिक्त पद को भविष्य में भर लिया जाएगा। ब्यूरो
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राज्य गठन के बाद हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में गंगवार परिवार के एकाधिकार की शुरुआत हुई थी। 2004 और 2009 में स्व. सुशीला गंगवार जिपं अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। 2014 में उनके पति ईश्वरी प्रसाद गंगवार और 2019 में बहू रेनू गंगवार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। परिवार के पास तीन बार कांग्रेस और एक बार भाजपा में रहते कुर्सी आई थी।
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इस चुनाव में भी रेनू गंगवार को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पार्टी में भारी विरोध के चलते परिवार की जिपं सीट को स्वतंत्र घोषित कर दिया गया। पार्टी का एक धड़ा उनके खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस सीट पर जीत के बाद रेनू की टिकट की दौड़ शुरू हो गई थी, मगर पार्टी में भारी विरोध के चलते उनकी राह मुश्किल होती गई। भाजपा ने सामान्य कार्यकर्ता अजय मौर्या पर भरोसा जताया और पार्टी में एकजुटता के चलते वे कुर्सी पर काबिज हो गए। रेनू गंगवार ने कहा कि पार्टी का निर्णय स्वीकार किया है। पार्टी ने सामान्य कार्यकर्ता अजय मौर्या को जिपं अध्यक्ष बनाया है, उसके लिए पार्टी और अजय मौर्या को बधाई है। 20 सालों तक जनता की सेवा की है और आगे की जनता के साथ खड़े रहेंगे। पार्टी सिपाही के रूप में वे कार्य करेंगे।
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जिपं उपाध्यक्ष के लिए नामांकन नहीं
जिला पंचायत उपाध्यक्ष के लिए किसी प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल नहीं किया। इस सीट पर एक जिला पंचायत सदस्य ने दो नामांकन पत्र खरीदे थे। सोमवार को नामांकन प्रक्रिया के दौरान किसी ने पर्चा दाखिल नहीं किया। इसके बाद यह पद रिक्त हो गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल ने बताया कि रिक्त पद को भविष्य में भर लिया जाएगा। ब्यूरो