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काशीपुर में हो रही है महाराष्ट्र के जी-9 केले की पैदावार
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काशीपुर में किसान दिलबाग सिंह द्वारा उगाई गई केले की फसल।
- फोटो : KASHIPUR
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महाराष्ट्र में पाया जाने वाला जी-9 केला अब लोगों को काशीपुर में भी उपलब्ध होने लगा है। काशीपुर के एक किसान ने केले की इस प्रजाति की पैदावार अपने खेतों में शुरू की है जिसकी बाजार से अच्छी मांग मिल रही है।
काशीपुर में किसान परंपरागत फसल धान, गेहूं और गन्ने के साथ ही बेमौसमी धान, सफेद मूसली, चुकंदर, मैथा, पहाड़ी मूली, चिकोरी आदि की पैदावार भी अपने खेतों में करते हैं। कुछ समय पूर्व यहां कुछ किसानों ने केले की खेती करने का प्रयास किया लेकिन अनुकूल प्रजाति न मिलने पर पैदावार अच्छी न हो सकी।
इधर कुछ समय पूर्व ग्राम रजपुरा रानी के प्रगतिशील किसान दिलबाग सिंह ने भी अपने खेतों में परंपरागत फसलों की जगह केले की पैदावार करने का मन बनाया और आधा एकड़ भूमि में केले के पौधे लगाए। पैदावार अच्छी होने पर अब दिलबाग सिंह ने पांच एकड़ खेत में केले के पौधे लगाए हैं जिन पर काफी मात्रा में केले का उत्पादन हुआ है।
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दिलबाग सिंह ने बताया कि पिछले साल वह महाराष्ट्र के जलगांव स्थित जैन एरीकेशन नर्सरी से केले की जी-9 प्रजाति के पौधे लाए थे। केले की पौध जून के अंत से जुलाई तक लगाई जाती है। एक एकड़ भूमि में 1742 पौधे लगाए जाते हैं। केले की एक गेल का वजन 15 किलो तक होता है।
इन दिनों व्यापारी 12 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खेत से केले ले रहे हैं। अच्छी पैदावार होने पर किसान को करीब 15 हजार रुपये प्रति एकड़ मुनाफा हो जाता है। केले की फसल में अधिक मेहनत और देखभाल की जरूरत पड़ती है। फसल तैयार होने पर पेड़ों को गिरने से बचाने के लिए खेत के अंदर वैरीकेडिंग करनी होती है। इस फसल से भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है।
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काशीपुर में किसान परंपरागत फसल धान, गेहूं और गन्ने के साथ ही बेमौसमी धान, सफेद मूसली, चुकंदर, मैथा, पहाड़ी मूली, चिकोरी आदि की पैदावार भी अपने खेतों में करते हैं। कुछ समय पूर्व यहां कुछ किसानों ने केले की खेती करने का प्रयास किया लेकिन अनुकूल प्रजाति न मिलने पर पैदावार अच्छी न हो सकी।
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इधर कुछ समय पूर्व ग्राम रजपुरा रानी के प्रगतिशील किसान दिलबाग सिंह ने भी अपने खेतों में परंपरागत फसलों की जगह केले की पैदावार करने का मन बनाया और आधा एकड़ भूमि में केले के पौधे लगाए। पैदावार अच्छी होने पर अब दिलबाग सिंह ने पांच एकड़ खेत में केले के पौधे लगाए हैं जिन पर काफी मात्रा में केले का उत्पादन हुआ है।
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दिलबाग सिंह ने बताया कि पिछले साल वह महाराष्ट्र के जलगांव स्थित जैन एरीकेशन नर्सरी से केले की जी-9 प्रजाति के पौधे लाए थे। केले की पौध जून के अंत से जुलाई तक लगाई जाती है। एक एकड़ भूमि में 1742 पौधे लगाए जाते हैं। केले की एक गेल का वजन 15 किलो तक होता है।
इन दिनों व्यापारी 12 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खेत से केले ले रहे हैं। अच्छी पैदावार होने पर किसान को करीब 15 हजार रुपये प्रति एकड़ मुनाफा हो जाता है। केले की फसल में अधिक मेहनत और देखभाल की जरूरत पड़ती है। फसल तैयार होने पर पेड़ों को गिरने से बचाने के लिए खेत के अंदर वैरीकेडिंग करनी होती है। इस फसल से भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है।