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रुद्रपुर में उत्तरायणी महोत्सव के लोक कलाकारों ने बांधा समा
Wed, 16 Jan 2019 12:16 AM IST
अरुण कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: अरुण कुमार
Updated Wed, 16 Jan 2019 12:16 AM IST
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रुद्रपुर उत्तरायणी महोत्सव में लोक नृत्य करते कलाकार
- फोटो : amar ujala
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शैल सांस्कृतिक समिति रुद्रपुर की ओर से आयोजित उत्तरायणी महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को कुमाऊंनी और जौनसारी लोक कलाकारों ने समा बांध दिया। मशहूर जौनसारी लोक गायिका रेशमा शाह ने लोकगीत ‘ले भूजि जाला ले च्यूड़ा...’ की शानदार प्रस्तुति देकर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
रुद्रपुर के गांधी पार्क में आयोजित उत्तरायणी महोत्सव के समापन दिवस पर कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वित्त मंत्री प्रकाश पंत और विधायक राजकुमार ठुकराल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। लोक गायक विनोद रावत ने लोक कलाकारों के साथ कुमाऊंनी में वंदना पेश की। वित्त मंत्री ने कहा कि उत्तरायणी महोत्सव हमारी सांस्कृतिक के साथ ही आध्यात्मिक आस्था का भी प्रतीक है। उन्होंने लोगों को मकर संक्रांति पर्व की बधाई दी। उन्होंने लोगों से मकर संक्रांति पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संकल्प लेने की अपील की। साथ ही रुद्रपुर में उत्तरायणी महोत्सव का आयोजन कर रही शैल सांस्कृतिक समिति को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया। महोत्सव में गायक चंदर प्रकाश ने ‘पहाड़ को ठंडो पानी...’, गायिका बसंती बिष्ट ने ‘ओ मेरी ओ मेरी भूली...’ आदि गीत गाकर लोगों को झूमने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम के दौरान समिति पदाधिकारियों ने वित्त मंत्री से उत्तरायणी कौतिक को राज्य मेला का दर्जा दिलाने की मांग की। संचालन राज्य गीत के रचनाकर हेमंत बिष्ट एवं शिक्षक हरीश दनाई ने किया। इस दौरान शैल सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष भारत लाल साह, महामंत्री दिवाकर पांडे, कोषाध्यक्ष नरेंद्र रावत, मेला संयोजक गोपाल पटवाल, नीलम कांडपाल, सुनीता नेगी, कमलेश बिष्ट, दिनेश भट्ट, कुंवर नेगी, महेश कांडपाल, कीर्तिनिधि शर्मा, सतीश ध्यानी, शालिनी बोरा, लीला पाठक आदि मौजूद थे।
उत्तराखंड का प्रमुख ऋतु पर्व है मकर संक्रांति
रुद्रपुर। उत्तराखंड के राज्य गीत के रचनाकार हेमंत बिष्ट कहते हैं कि देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही मकर संक्रांति उत्तराखंड का प्रमुख ऋतु पर्व है। मकर संक्रांति पर खाए जाने वाले भोजन में ऋतु परिवर्तन से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य भी छिपे हुए हैं।
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रुद्रपुर में शैल सांस्कृतिक समिति की ओर आयोजित उत्तरायणी महोत्सव में बतौर एंकर पहुंचे शहीद मेजर राजेश अधिकारी राइंका नैनीताल के प्रवक्ता एवं राज्य गीत के रचनाकर हेमंत बिष्ट ने बातचीत में कहा कि मकर संक्रांति को उत्तराखंड में उत्तरायणी महोत्सव, पंजाब में लोहड़ी, दक्षिण भारत में पोंगल और असोम में बीहू उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व को शीत से ग्रीष्म ऋतु में प्रस्थान का प्रतीक माना जाता है। उड़द दाल की तासीर गर्म और चावल की तासीर ठंडी होती है। उड़द और चावल की खिचड़ी को शीत और ग्रीष्म ऋतु के मिलन के रूप में देखा जाता है।
फोटो-15 आरडीपी 12 पी- हेमंत बिष्ट।
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रुद्रपुर के गांधी पार्क में आयोजित उत्तरायणी महोत्सव के समापन दिवस पर कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वित्त मंत्री प्रकाश पंत और विधायक राजकुमार ठुकराल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। लोक गायक विनोद रावत ने लोक कलाकारों के साथ कुमाऊंनी में वंदना पेश की। वित्त मंत्री ने कहा कि उत्तरायणी महोत्सव हमारी सांस्कृतिक के साथ ही आध्यात्मिक आस्था का भी प्रतीक है। उन्होंने लोगों को मकर संक्रांति पर्व की बधाई दी। उन्होंने लोगों से मकर संक्रांति पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संकल्प लेने की अपील की। साथ ही रुद्रपुर में उत्तरायणी महोत्सव का आयोजन कर रही शैल सांस्कृतिक समिति को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया। महोत्सव में गायक चंदर प्रकाश ने ‘पहाड़ को ठंडो पानी...’, गायिका बसंती बिष्ट ने ‘ओ मेरी ओ मेरी भूली...’ आदि गीत गाकर लोगों को झूमने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम के दौरान समिति पदाधिकारियों ने वित्त मंत्री से उत्तरायणी कौतिक को राज्य मेला का दर्जा दिलाने की मांग की। संचालन राज्य गीत के रचनाकर हेमंत बिष्ट एवं शिक्षक हरीश दनाई ने किया। इस दौरान शैल सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष भारत लाल साह, महामंत्री दिवाकर पांडे, कोषाध्यक्ष नरेंद्र रावत, मेला संयोजक गोपाल पटवाल, नीलम कांडपाल, सुनीता नेगी, कमलेश बिष्ट, दिनेश भट्ट, कुंवर नेगी, महेश कांडपाल, कीर्तिनिधि शर्मा, सतीश ध्यानी, शालिनी बोरा, लीला पाठक आदि मौजूद थे।
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उत्तराखंड का प्रमुख ऋतु पर्व है मकर संक्रांति
रुद्रपुर। उत्तराखंड के राज्य गीत के रचनाकार हेमंत बिष्ट कहते हैं कि देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही मकर संक्रांति उत्तराखंड का प्रमुख ऋतु पर्व है। मकर संक्रांति पर खाए जाने वाले भोजन में ऋतु परिवर्तन से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य भी छिपे हुए हैं।
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रुद्रपुर में शैल सांस्कृतिक समिति की ओर आयोजित उत्तरायणी महोत्सव में बतौर एंकर पहुंचे शहीद मेजर राजेश अधिकारी राइंका नैनीताल के प्रवक्ता एवं राज्य गीत के रचनाकर हेमंत बिष्ट ने बातचीत में कहा कि मकर संक्रांति को उत्तराखंड में उत्तरायणी महोत्सव, पंजाब में लोहड़ी, दक्षिण भारत में पोंगल और असोम में बीहू उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व को शीत से ग्रीष्म ऋतु में प्रस्थान का प्रतीक माना जाता है। उड़द दाल की तासीर गर्म और चावल की तासीर ठंडी होती है। उड़द और चावल की खिचड़ी को शीत और ग्रीष्म ऋतु के मिलन के रूप में देखा जाता है।
फोटो-15 आरडीपी 12 पी- हेमंत बिष्ट।