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सलमता, खैराना गांव में कहर बरपा रही कैलाश नदी
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सितारगंज के खैराना गांव में कैलाश नदी से हो रहे भूमि कटाव को देखते ग्रामीण।
- फोटो : SITARGANJ
सितारगंज। कैलाश नदी सलमता और खैराना गांव में जमकर कहर बरपा रही है। करीब छह किसानों की करीब ढाई एकड़ भूमि कटकर नदी में समा गई है। लेकिन न तो इन किसानों को भूमि का मुआवजा ही मिला और न ही शासन प्रशासन की ओर से बाढ़ सुरक्षा के ठोस उपाय किए गए।
बृहस्पतिवार की सुबह कैलाश नदी का जलस्तर बढ़ गया। इससे खैराना (बिचपुरी) और सलमता गांव में नदी ने कृषि भूमि में कटाव शुरू कर दिया। खेतों को जाने वाला करीब दस मीटर चौड़ा कच्चा रास्ता भी कट गया। नदी से खैराना गांव के तुला सिंह की चार बीघा, सुग्रीव सिंह की चार बीघा, बिचपुरी के शेर सिंह की तीन बीघा, तीरथ सिंह राणा की दो बीघा व सलमता के गोपाल सिंह राणा की चार बीघा कृषि भूमि कट गई है।
किसानों ने बताया कि पिछले आठ सालों से गांवों में नदी हर वर्षाकाल में उनकी कृषि भूमि को लील रही है। 2018 में सिंचाई विभाग ने 19.50 लाख की लागत से बाढ़ सुरक्षा कार्य कराने के लिए प्रस्ताव बनाकर डीएम को भेजा था लेकिन अभी तक बाढ़ सुरक्षा के कार्य नहीं किए गए। सात अगस्त 2020 को डीएम और 18 अगस्त को एसडीएम को भी पत्र भेजकर बाढ़ सुरक्षा कार्य कराने की मांग की लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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बृहस्पतिवार की सुबह कैलाश नदी का जलस्तर बढ़ गया। इससे खैराना (बिचपुरी) और सलमता गांव में नदी ने कृषि भूमि में कटाव शुरू कर दिया। खेतों को जाने वाला करीब दस मीटर चौड़ा कच्चा रास्ता भी कट गया। नदी से खैराना गांव के तुला सिंह की चार बीघा, सुग्रीव सिंह की चार बीघा, बिचपुरी के शेर सिंह की तीन बीघा, तीरथ सिंह राणा की दो बीघा व सलमता के गोपाल सिंह राणा की चार बीघा कृषि भूमि कट गई है।
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किसानों ने बताया कि पिछले आठ सालों से गांवों में नदी हर वर्षाकाल में उनकी कृषि भूमि को लील रही है। 2018 में सिंचाई विभाग ने 19.50 लाख की लागत से बाढ़ सुरक्षा कार्य कराने के लिए प्रस्ताव बनाकर डीएम को भेजा था लेकिन अभी तक बाढ़ सुरक्षा के कार्य नहीं किए गए। सात अगस्त 2020 को डीएम और 18 अगस्त को एसडीएम को भी पत्र भेजकर बाढ़ सुरक्षा कार्य कराने की मांग की लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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