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Udham Singh Nagar News: विदेशी छोड़ अब भारतीय डेटा आधारित होगी फिटनेस
Sat, 24 Jan 2026 12:30 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 24 Jan 2026 12:30 AM IST
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पंतनगर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि में शारीरिक शिक्षा विभाग के सह निदेशक एचएस पपोला ने कृषि विश्वविद्यालयों में छात्रों के लिए भारतीय डेटा आधारित फिजिकल फिटनेस नॉर्म्स विकसित करने की पहल की है। भारत के किसी भी कृषि विवि में यह पहला वैज्ञानिक प्रयास है जिसकी पहचान के लिए इसे उपहार नाम दिया गया है।
भारत में ज्यादातर फिटनेस टेस्ट विदेशी नॉर्म्स पर आधारित हैं। जो यूरोपियन या अमेरिकन शरीर संरचना के अनुसार बनाए गए हैं। जबकि भारतीय शरीर, जीवनशैली, पोषण और कार्य-परिस्थितियां उनसे बिल्कुल अलग हैं। वर्तमान में फिटनेस का कोई वैज्ञानिक ढांचा, मापन या डेटा नहीं था। जहां कृषि विज्ञान और पशु क्लोनिंग में पंत विवि ने दुनिया में नाम कमाया वहीं मानव फिटनेस को आज तक वैज्ञानिक रूप से नहीं मापा गया था।
इसके चलते पंतनगर विवि जैसी वैज्ञानिक सोच और अनुसंधानों की पहचान वाले विवि में करीब 65 वर्षों तक खेल व्यवस्था सिर्फ प्रतियोगिताओं तक सीमित रही। पपोला ने यह सिद्ध किया कि फिटनेस कोई अनुमान या भावना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से मापी जाने वाली क्षमता है। डिग्री केवल पद के लिए नहीं, बल्कि समाज को वैज्ञानिक समाधान देने के लिए होती है।
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प्राध्यापक डॉ. पूनम त्यागी ने बताया कि यह नॉर्म्स पहली बार बनाए गए हैं जो कृषि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होंगे।
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भारत में ज्यादातर फिटनेस टेस्ट विदेशी नॉर्म्स पर आधारित हैं। जो यूरोपियन या अमेरिकन शरीर संरचना के अनुसार बनाए गए हैं। जबकि भारतीय शरीर, जीवनशैली, पोषण और कार्य-परिस्थितियां उनसे बिल्कुल अलग हैं। वर्तमान में फिटनेस का कोई वैज्ञानिक ढांचा, मापन या डेटा नहीं था। जहां कृषि विज्ञान और पशु क्लोनिंग में पंत विवि ने दुनिया में नाम कमाया वहीं मानव फिटनेस को आज तक वैज्ञानिक रूप से नहीं मापा गया था।
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इसके चलते पंतनगर विवि जैसी वैज्ञानिक सोच और अनुसंधानों की पहचान वाले विवि में करीब 65 वर्षों तक खेल व्यवस्था सिर्फ प्रतियोगिताओं तक सीमित रही। पपोला ने यह सिद्ध किया कि फिटनेस कोई अनुमान या भावना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से मापी जाने वाली क्षमता है। डिग्री केवल पद के लिए नहीं, बल्कि समाज को वैज्ञानिक समाधान देने के लिए होती है।
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प्राध्यापक डॉ. पूनम त्यागी ने बताया कि यह नॉर्म्स पहली बार बनाए गए हैं जो कृषि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होंगे।