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हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाले मामलों की विशेष निगरानी करें : डीएम
Wed, 29 Apr 2026 01:26 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Wed, 29 Apr 2026 01:26 AM IST
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रुद्रपुर। डीएम नितिन सिंह भदौरिया ने हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाले मामलों की पहचान कर विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में मातृ मृत्यु दर की समीक्षा बैठक में कहा कि आशा और एएनएम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, नियमित जांच में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मातृ मृत्यु के कारण और रोकथाम के उपायों पर चर्चा की गई। सामने आया कि जिले में अब तक 18 मातृ मृत्यु के मामले सामने आए हैं। 18 मामलों में से 11 मामलों की विस्तृत समीक्षा पहले ही की जा चुकी थी। सात मामलों की समीक्षा बैठक में की गई। बैठक में मृत्यु के कारणों का विश्लेषण किया गया। प्रत्येक केस की रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया गया। प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं एनीमिया (खून की कमी) और समय पर अस्पताल न पहुंचने के कारणों पर चर्चा हुई।
जिले में पंजीकृत ऐसे चिकित्सालयों को चिह्नित किया जाए जहां पंजीकृत चिकित्सकों की निगरानी में प्रसव नहीं कराए जा रहे हैं। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। गृह प्रसव कराने वाली दाइयों पर भी निगरानी रखी जाए। यदि कोई दाई अवैध रूप से प्रसव कराती हुई पाई जाती है तो उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए। सीडीओ दिवेश शाशनी ने कहा कि मातृ मृत्यु दर को कम करना सरकार की प्राथमिकता है। इसमें कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल, एसीएमओ डॉ. डीपी सिंह, पीएमएस डॉ. आरके सिंह, डीपीएम हिमांशु मुस्यूनी आदि मौजूद थे।
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बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मातृ मृत्यु के कारण और रोकथाम के उपायों पर चर्चा की गई। सामने आया कि जिले में अब तक 18 मातृ मृत्यु के मामले सामने आए हैं। 18 मामलों में से 11 मामलों की विस्तृत समीक्षा पहले ही की जा चुकी थी। सात मामलों की समीक्षा बैठक में की गई। बैठक में मृत्यु के कारणों का विश्लेषण किया गया। प्रत्येक केस की रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया गया। प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं एनीमिया (खून की कमी) और समय पर अस्पताल न पहुंचने के कारणों पर चर्चा हुई।
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जिले में पंजीकृत ऐसे चिकित्सालयों को चिह्नित किया जाए जहां पंजीकृत चिकित्सकों की निगरानी में प्रसव नहीं कराए जा रहे हैं। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। गृह प्रसव कराने वाली दाइयों पर भी निगरानी रखी जाए। यदि कोई दाई अवैध रूप से प्रसव कराती हुई पाई जाती है तो उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए। सीडीओ दिवेश शाशनी ने कहा कि मातृ मृत्यु दर को कम करना सरकार की प्राथमिकता है। इसमें कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल, एसीएमओ डॉ. डीपी सिंह, पीएमएस डॉ. आरके सिंह, डीपीएम हिमांशु मुस्यूनी आदि मौजूद थे।
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