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जायडस फैक्टरी बंद होने के खिलाफ दूसरे दिन भी धरने पर डटे रहे कर्मचारी
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सितारगंज सिडकुल जायडस फैक्टरी बंद होने से धरने पर बैठे कर्मचारियों से वार्ता करते कैबिनेट मंत्र
- फोटो : SITARGANJ
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सितारगंज। जायडस फैक्टरी के बंद होने के खिलाफ कर्मचारियों का धरना दूसरे दिन रविवार को भी जारी रहा। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने धरनास्थल पहुंचकर कर्मचारियों की मांगें सुनीं। उन्होंने प्रबंधन और कर्मचारी संगठन की वार्ता कराकर उनके अधिकार दिलाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।
बीते शनिवार को जायडस फैक्टरी बंद होने से 150 स्थायी और ठेकेदार के अधीन काम करने वाले करीब एक हजार कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ कर्मचारियों का धरना जारी है। रविवार को कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा धरना स्थल पहुंचे और कर्मचारियों से वार्ता की। कर्मचारियों ने बताया कि 17 जून की सायं फैक्टरी गेट पर बंदी का नोटिस चस्पा कर दिया गया। इसकी कर्मचारियों को कोई पूर्व सूचना नहीं दी। 18 जून सुबह की पहली शिफ्ट से ही परिसर में कर्मचारियों के प्रवेश पर रोक लगा दी।
आरोप लगाया कि गैरकानूनी ढंग से फैक्टरी को बंद किया गया है। श्रम कानूनों के अनुसार श्रमिकों को पैसा नहीं दिया गया। इस पर कैबिनेट मंत्री बहुगुणा ने कर्मचारियों को उनके अधिकार दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंनेे अधिकारियों को प्रबंधन के साथ कर्मचारी संगठन की वार्ता कराकर उनके अधिकार दिलाने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को प्रबंधन से वार्ता कराई जाएगी। कहा कि ऐसा न होने पर फैक्टरी प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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धरनास्थल पर एसीटीआईयू के प्रदेश महामंत्री केके बोरा समेत कई श्रमिक संगठन मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, मोहन सिंह, साबर सिंह, रामजीत, पुष्कर सिंह ने भी अपना समर्थन दिया। वहां जायडस वेलनेस इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष विकास सती, भगवान पंत, रंजना राणा, उमेश गोला, पूरन सिंह, अमित नेगी, धर्मेंद्र सिंह, शंकर टम्टा, दीपक नयाल, अजय नेगी, हरीश रावत आदि थे।
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बीते शनिवार को जायडस फैक्टरी बंद होने से 150 स्थायी और ठेकेदार के अधीन काम करने वाले करीब एक हजार कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ कर्मचारियों का धरना जारी है। रविवार को कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा धरना स्थल पहुंचे और कर्मचारियों से वार्ता की। कर्मचारियों ने बताया कि 17 जून की सायं फैक्टरी गेट पर बंदी का नोटिस चस्पा कर दिया गया। इसकी कर्मचारियों को कोई पूर्व सूचना नहीं दी। 18 जून सुबह की पहली शिफ्ट से ही परिसर में कर्मचारियों के प्रवेश पर रोक लगा दी।
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आरोप लगाया कि गैरकानूनी ढंग से फैक्टरी को बंद किया गया है। श्रम कानूनों के अनुसार श्रमिकों को पैसा नहीं दिया गया। इस पर कैबिनेट मंत्री बहुगुणा ने कर्मचारियों को उनके अधिकार दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंनेे अधिकारियों को प्रबंधन के साथ कर्मचारी संगठन की वार्ता कराकर उनके अधिकार दिलाने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को प्रबंधन से वार्ता कराई जाएगी। कहा कि ऐसा न होने पर फैक्टरी प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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धरनास्थल पर एसीटीआईयू के प्रदेश महामंत्री केके बोरा समेत कई श्रमिक संगठन मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, मोहन सिंह, साबर सिंह, रामजीत, पुष्कर सिंह ने भी अपना समर्थन दिया। वहां जायडस वेलनेस इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष विकास सती, भगवान पंत, रंजना राणा, उमेश गोला, पूरन सिंह, अमित नेगी, धर्मेंद्र सिंह, शंकर टम्टा, दीपक नयाल, अजय नेगी, हरीश रावत आदि थे।