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धान की भूसी से पैदा हो रही बिजली
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ रुद्रपुर।
Updated Mon, 05 Oct 2015 12:27 AM IST
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औद्योगिक आस्थान सिडकुल सितारगंज की एक फैक्ट्री में राइस हस्क (धान की भूसी) से बिजली उत्पादन किया जा रहा है। साढ़े 28 करोड़ की लागत से स्थापित प्लांट में उत्पादित बिजली से फैक्ट्री अपनी जरूरतों को पूरा कर रही है।
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मानकों के अनुकूल बिजली उत्पादन होने पर उरेडा अधिकारी फैक्ट्री को सब्सिडी के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेज रहे हैं।
सितारगंज स्थित गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स लिमिटेड मक्के के दाने से ग्लूकोज बनाती है। इसके अलावा बायोगैस से बिजली का उत्पादन भी फैक्ट्री में किया जाता है।
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फैक्ट्री में धान की भूसी से बिजली बनाने के लिए 28 करोड़ 63 लाख 58 हजार रुपये से भारी भरकम प्लांट स्थापित किया गया है। प्लांट की क्षमता 5 मेगावाट बिजली उत्पादन करने की है।
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उरेडा परियोजना अधिकारी जीसी मेहरोत्रा ने बताया कि वर्तमान में प्लांट में 4.5 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।
भारत सरकार की बायोमास बेस्ड पावर जनरेशन योजना के तहत सब्सिडी का पात्र वहीं होगा, जिसके प्लांट में करीब 80 फीसदी बिजली का उत्पादन हो रहा है।
फैक्ट्री में लगे प्लांट में करीब 90 फीसदी बिजली का उत्पादन हो रहा है। तीन महीने तक लगतार फैक्ट्री के प्लांट का निरीक्षण कर बिजली उत्पादन को देखा गया।
जिसके बाद फैक्ट्री को 1 करोड़ 20 लाख रुपये की सब्सिडी देने के लिए निदेशालय के जरिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जितनी बिजली का प्लांट से उत्पादन हो रहा है, उसका उपयोग फैक्ट्री अपने लिए कर रही है। उन्होंने बताया कि धान की भूसी को आटोमेटिक मशीन के जरिए बॉयलर में जलाकर बिजली उत्पादित की जाती है।