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शिक्षकों के सामने छात्रों की मनोदशा बदलना चुनौती
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डॉ.जितेंद्र कुमार पंत।
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। कोरोना संक्रमण ने स्कूली बच्चों की मनोदशा पर खासा प्रभाव डाला है। संक्रमण के दौरान एकाकीपन और समूह की कमी की सबसे अधिक मार छात्रों के मानसिक विकास पर पड़ी है। अब जब स्थिति सामान्य हो गई है तब इन बच्चों की मनोदशा को बदलना अभिभावकों के साथ ही शिक्षकों के लिए चुनौती बन रहा है।
कोरोना के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई के मुकाबले ऑफलाइन कक्षाओं में ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चों में स्कूल आने के लिए उत्साह है लेकिन कई घंटे तक जमकर कक्षा में बैठने से उनके चेहरे की रंगत फीकी पड़ रही है। बहुत से ऐसे बच्चे हैं जो अभी तक अपना ध्यान पढ़ाई की ओर पूरी तरह से केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे छात्रों के साथ शिक्षकों को ज्यादा मेहनत करने पड़ रही है। एक ही विषयों को कई-कई बार समझाना पड़ रहा है। कई स्कूल प्रबंधन ने तो अपने स्कूलों में कमजोर छात्रों की अतिरिक्त कक्षाएं लेने के लिए शिक्षकों को कहा है ताकि वह कोर्स में पिछड़े नहीं। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन बच्चों के मनोरंजन के लिए पढ़ाई के साथ खेल का समय दे रहे हैं। ताकि उनकी एकाग्रता बढ़े और पढ़ाई में मन लगे।
शिक्षकों के सामने हैं चुनौतियां
- कोरोना के लंबे अंतराल के बाद छात्रों में आई उदासीनता और शिथिलता के कारण छात्रों व शिक्षकों में संवाद जरूरी है। छात्रों में सकारात्मक सुधार लाने के लिए उनके आंतरिक मनोदशा से भलीभांति परिचित होना आवश्यक है। विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति शत-प्रतिशत के लिए अभिभावकों का सहयोग बेहद जरूरी है। कोविड काल के बाद बच्चों की मनोदशा काफी बदल गई है। अब उन्हें समझाने में समय लग रहा है। ऐसे बच्चों को बार-बार विषयों के बारे में पढ़ाया और समझाया जा रहा है।- मनोज कुमार शर्मा, प्रवक्ता
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- छात्रों में लेखन क्षमता के साथ-साथ एकाग्रता और पढ़ने की प्रवृत्ति में आई कमी के सुधार के लिए नवाचार के साथ शिक्षण अधिगम की नवीन पद्धतियों को अपनाना होगा। कक्षा कक्ष में पठन-पाठन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जोर देना चाहिए। साथ ही जो कमजोर बच्चा है वह अपने सहपाठियों से काफी पीछे रह गए हैं। ऐसे में उनके लिए अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन किया जाना चाहिए। अब ऑफलाइन पढ़ाई में बच्चे ध्यान देने लगे हैं।
डॉ. जितेंद्र कुमार पंत, सहायक अध्यापक
बच्चे बोले : ऑनलाइन पढ़ाई में आ रही थी दिक्कतें
कोरोना संक्रमण के दौरान पढ़ाई का कोई दबाव नहीं था। ऑनलाइन पढ़ाई होने के चलते पढ़ाई से अपने आप धीरे-धीरे मन हट गया क्योंकि स्कूल जाते तो शिक्षक का डर था। गृहकार्य पूरा करते लेकिन घर में रहकर शिक्षक की डांट का कोई डर नहीं था। स्कूल आने पर अच्छा लगा कि शिक्षक उनके कमजोर विषयों को लेकर चिंतित थे और उन्होंने उनका कोर्स पूरा कराया। अभिषेक शर्मा, कक्षा 12
ऑनलाइन पढ़ाई से सब कुछ अव्यवस्थित हो गया। अब ऑफलाइन पढ़ाई करने से शिक्षकों के सामने अपनी समस्या रखने का मौका मिला। शिक्षक भी हमें सही ढंग से समझा सकते हैं। लंबे समय तक पढ़ाई से जुड़े नहीं रहने से अब कई बार लगातार कक्षा में बैठकर पढ़ाई करने का मन नहीं करता है। अब स्कूल में आकर पढ़ाई करने से काफी मदद मिलेगी और सीखने की प्रक्रिया में काफी सुधार आएगा। अतुल, कक्षा 11
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कोरोना के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई के मुकाबले ऑफलाइन कक्षाओं में ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चों में स्कूल आने के लिए उत्साह है लेकिन कई घंटे तक जमकर कक्षा में बैठने से उनके चेहरे की रंगत फीकी पड़ रही है। बहुत से ऐसे बच्चे हैं जो अभी तक अपना ध्यान पढ़ाई की ओर पूरी तरह से केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे छात्रों के साथ शिक्षकों को ज्यादा मेहनत करने पड़ रही है। एक ही विषयों को कई-कई बार समझाना पड़ रहा है। कई स्कूल प्रबंधन ने तो अपने स्कूलों में कमजोर छात्रों की अतिरिक्त कक्षाएं लेने के लिए शिक्षकों को कहा है ताकि वह कोर्स में पिछड़े नहीं। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन बच्चों के मनोरंजन के लिए पढ़ाई के साथ खेल का समय दे रहे हैं। ताकि उनकी एकाग्रता बढ़े और पढ़ाई में मन लगे।
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शिक्षकों के सामने हैं चुनौतियां
- कोरोना के लंबे अंतराल के बाद छात्रों में आई उदासीनता और शिथिलता के कारण छात्रों व शिक्षकों में संवाद जरूरी है। छात्रों में सकारात्मक सुधार लाने के लिए उनके आंतरिक मनोदशा से भलीभांति परिचित होना आवश्यक है। विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति शत-प्रतिशत के लिए अभिभावकों का सहयोग बेहद जरूरी है। कोविड काल के बाद बच्चों की मनोदशा काफी बदल गई है। अब उन्हें समझाने में समय लग रहा है। ऐसे बच्चों को बार-बार विषयों के बारे में पढ़ाया और समझाया जा रहा है।- मनोज कुमार शर्मा, प्रवक्ता
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- छात्रों में लेखन क्षमता के साथ-साथ एकाग्रता और पढ़ने की प्रवृत्ति में आई कमी के सुधार के लिए नवाचार के साथ शिक्षण अधिगम की नवीन पद्धतियों को अपनाना होगा। कक्षा कक्ष में पठन-पाठन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जोर देना चाहिए। साथ ही जो कमजोर बच्चा है वह अपने सहपाठियों से काफी पीछे रह गए हैं। ऐसे में उनके लिए अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन किया जाना चाहिए। अब ऑफलाइन पढ़ाई में बच्चे ध्यान देने लगे हैं।
डॉ. जितेंद्र कुमार पंत, सहायक अध्यापक
बच्चे बोले : ऑनलाइन पढ़ाई में आ रही थी दिक्कतें
कोरोना संक्रमण के दौरान पढ़ाई का कोई दबाव नहीं था। ऑनलाइन पढ़ाई होने के चलते पढ़ाई से अपने आप धीरे-धीरे मन हट गया क्योंकि स्कूल जाते तो शिक्षक का डर था। गृहकार्य पूरा करते लेकिन घर में रहकर शिक्षक की डांट का कोई डर नहीं था। स्कूल आने पर अच्छा लगा कि शिक्षक उनके कमजोर विषयों को लेकर चिंतित थे और उन्होंने उनका कोर्स पूरा कराया। अभिषेक शर्मा, कक्षा 12
ऑनलाइन पढ़ाई से सब कुछ अव्यवस्थित हो गया। अब ऑफलाइन पढ़ाई करने से शिक्षकों के सामने अपनी समस्या रखने का मौका मिला। शिक्षक भी हमें सही ढंग से समझा सकते हैं। लंबे समय तक पढ़ाई से जुड़े नहीं रहने से अब कई बार लगातार कक्षा में बैठकर पढ़ाई करने का मन नहीं करता है। अब स्कूल में आकर पढ़ाई करने से काफी मदद मिलेगी और सीखने की प्रक्रिया में काफी सुधार आएगा। अतुल, कक्षा 11

मनोज कुमार शर्मा।- फोटो : KASHIPUR