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अब बच्चों की एकाग्रता बनाए रखने की चुनौती
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प्रदीप सपरा।
- फोटो : KASHIPUR
काशीपुर। कोरोना संक्रमण के दौरान स्कूल पूरी तरह से नहीं खुल पाने का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। स्कूलों में नियमित कक्षाओं के नहीं लगने से बच्चों की एकाग्रता पर असर पड़ा है।
कोरोना संक्रमण के चलते शिक्षण व्यवस्था अब तक पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ सकी है। ऑनलाइन कक्षाओं का पढ़ाई पर असर पड़ा है। इससे जहां एक ओर बच्चों की लेखन क्षमता कम हो गई है तो दूसरी ओर विषय संबंधी प्रश्नोत्तर को लंबे समय तक याद नहीं रख पा रहे हैं। लंबे समय तक घर रहने का दुष्परिणाम बच्चों में अब भी नजर आ रहा है। शिक्षकों का मानना है कि कोरोना के कारण स्कूल बंद होने से विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति प्रभावित हुई है और उनकी एकाग्रता पर इसका असर पड़ा है। ऐसे में शिक्षकों का मानना है कि शिक्षण व्यवस्था को पटरी पर लाने में अभी कुछ समय और लगेगा। इसकी मुख्य वजह बच्चों को दो साल बाद बहुत कम समय स्कूल में बैठकर भौतिक रूप से पढ़ाई का समय मिला। जब तक बच्चे शिक्षण कार्य में कुछ सही होते कि वर्ष 2021-22 का सत्र खत्म होने और बोर्ड परीक्षाएं और गृह परीक्षाओं का समय आ गया। अब बच्चों को नए सत्र में पूरी तरह से भौतिक रूप से कक्षाओं में बैठने और पढ़ाई का पूरा मौका मिलेगा।
स्कूलों में शिक्षक बच्चों का बढ़ा रहे मनोबल
दो साल में शिक्षण व्यवस्था को पहुंची क्षति से उबरना सबसे बड़ी चुनौती है। इस समस्या से निपटने के लिए स्कूलों ने अपनी-अपनी रणनीति भी बनाई है। बच्चों को अध्ययन में कोई दिक्कत नहीं हो इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज किला स्ट्रीट के प्रधानाचार्य सुभाष शर्मा ने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को बोर्ड परीक्षाओं के टिप्स दिए हैं। उनका कहना है कि कोरोना काल में पढ़ाई में व्यवधान आया है, इसकी पूर्ति की पूरी कोशिश की गई है। वहीं अभिभावकों से भी कहा गया है कि वह परीक्षार्थियों पर किसी भी तरह का दबाव न डालें।
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शिक्षा विभाग बनाए कोई ठोस रणनीति
काशीपुर। कोरोना काल में पढ़ाई प्रभावित होने से छात्रों के साथ ही अभिभावक भी चिंतित हैं। अभिभावक कमला देवी, कमल शर्मा, सत्यवीर यादव ने कहा कि कोरोना महामारी में सबसे अधिक यदि प्रभाव पड़ा है तो वह शिक्षा व्यवस्था पर। उन्होंने कहा कि दो साल में हुए नुकसान की भरपाई के लिए स्कूलों के साथ ही शिक्षा विभाग को ठोस नीति बनानी चाहिए ताकि बच्चों का शिक्षण कार्य बेहतर ढंग से हो सके।
क्या कहना है शिक्षकों का
-कोरोना काल के बाद स्कूलों में पुरानी व्यवस्था को लागू करना चुनौतीपूर्ण रहा है और बच्चों में कोरोना का डर खत्म करने के लिए कई गतिविधियां की गई है। इसके चलते अब बच्चों में कोरोना का उतना डर नहीं है। बच्चे लगातार स्कूल आ रहे हैं।
सुभाष शर्मा, प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज किला स्ट्रीट
-सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं 26 अप्रैल से शुरू होने वाली है। ऐसे में बच्चों को अपने कोर्स को रिवीजन करने का पूरा मौका मिल रहा है। कोरोना संक्रमण से पढ़ाई पर असर तो पड़ा है, लेकिन शिक्षकों ने भी पूरी मेहनत के साथ बच्चों को पढ़ाया है।
प्रदीप सपरा, प्रधानाचार्य, छावनी चिल्ड्रन एकेडमी, कटोराताल।
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कोरोना संक्रमण के चलते शिक्षण व्यवस्था अब तक पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ सकी है। ऑनलाइन कक्षाओं का पढ़ाई पर असर पड़ा है। इससे जहां एक ओर बच्चों की लेखन क्षमता कम हो गई है तो दूसरी ओर विषय संबंधी प्रश्नोत्तर को लंबे समय तक याद नहीं रख पा रहे हैं। लंबे समय तक घर रहने का दुष्परिणाम बच्चों में अब भी नजर आ रहा है। शिक्षकों का मानना है कि कोरोना के कारण स्कूल बंद होने से विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति प्रभावित हुई है और उनकी एकाग्रता पर इसका असर पड़ा है। ऐसे में शिक्षकों का मानना है कि शिक्षण व्यवस्था को पटरी पर लाने में अभी कुछ समय और लगेगा। इसकी मुख्य वजह बच्चों को दो साल बाद बहुत कम समय स्कूल में बैठकर भौतिक रूप से पढ़ाई का समय मिला। जब तक बच्चे शिक्षण कार्य में कुछ सही होते कि वर्ष 2021-22 का सत्र खत्म होने और बोर्ड परीक्षाएं और गृह परीक्षाओं का समय आ गया। अब बच्चों को नए सत्र में पूरी तरह से भौतिक रूप से कक्षाओं में बैठने और पढ़ाई का पूरा मौका मिलेगा।
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स्कूलों में शिक्षक बच्चों का बढ़ा रहे मनोबल
दो साल में शिक्षण व्यवस्था को पहुंची क्षति से उबरना सबसे बड़ी चुनौती है। इस समस्या से निपटने के लिए स्कूलों ने अपनी-अपनी रणनीति भी बनाई है। बच्चों को अध्ययन में कोई दिक्कत नहीं हो इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज किला स्ट्रीट के प्रधानाचार्य सुभाष शर्मा ने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को बोर्ड परीक्षाओं के टिप्स दिए हैं। उनका कहना है कि कोरोना काल में पढ़ाई में व्यवधान आया है, इसकी पूर्ति की पूरी कोशिश की गई है। वहीं अभिभावकों से भी कहा गया है कि वह परीक्षार्थियों पर किसी भी तरह का दबाव न डालें।
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शिक्षा विभाग बनाए कोई ठोस रणनीति
काशीपुर। कोरोना काल में पढ़ाई प्रभावित होने से छात्रों के साथ ही अभिभावक भी चिंतित हैं। अभिभावक कमला देवी, कमल शर्मा, सत्यवीर यादव ने कहा कि कोरोना महामारी में सबसे अधिक यदि प्रभाव पड़ा है तो वह शिक्षा व्यवस्था पर। उन्होंने कहा कि दो साल में हुए नुकसान की भरपाई के लिए स्कूलों के साथ ही शिक्षा विभाग को ठोस नीति बनानी चाहिए ताकि बच्चों का शिक्षण कार्य बेहतर ढंग से हो सके।
क्या कहना है शिक्षकों का
-कोरोना काल के बाद स्कूलों में पुरानी व्यवस्था को लागू करना चुनौतीपूर्ण रहा है और बच्चों में कोरोना का डर खत्म करने के लिए कई गतिविधियां की गई है। इसके चलते अब बच्चों में कोरोना का उतना डर नहीं है। बच्चे लगातार स्कूल आ रहे हैं।
सुभाष शर्मा, प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज किला स्ट्रीट
-सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं 26 अप्रैल से शुरू होने वाली है। ऐसे में बच्चों को अपने कोर्स को रिवीजन करने का पूरा मौका मिल रहा है। कोरोना संक्रमण से पढ़ाई पर असर तो पड़ा है, लेकिन शिक्षकों ने भी पूरी मेहनत के साथ बच्चों को पढ़ाया है।
प्रदीप सपरा, प्रधानाचार्य, छावनी चिल्ड्रन एकेडमी, कटोराताल।

सुभाष शर्मा।- फोटो : KASHIPUR

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