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साहित्य समर्पण के लिए पहचाने जाते हैं विनोद
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हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में कवि एवं साहित्यकार विनोद भगत का खासा योगदान है। हिंदी साहित्य में उनकी रचनाएं व काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।
मूल रूप से भीमताल निवासी साहित्यकार विनोद भगत यहां कुर्मांचल कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहते हैं।
उनके माता-पिता सरकारी शिक्षक थे। भगत का रुझान शुरू से ही हिंदी साहित्य में रहा। भगत की कहानियां व कविताएं देश की कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। 2013 में उनका पहला काव्य संग्रह ‘पेट की आग’ प्रकाशित हुआ। इस संग्रह में उनकी कविताओं को काफी सराहा गया। उनकी रचनाएं चाहें कविताएं हों या कहानियां आम जनमानस के जीवन की जद्दोजहद पर आधारित होती हैं। उनकी ज्यादातर रचनाएं हिंदी में ही हैं।
हालांकि कुमाऊंनी भाषा में भी उन्होंने साहित्य सृजन किया है। ‘बारिश की एक बूंद’ नाम से उनका दूसरा काव्य संग्रह प्रकाशित हो रहा है। कोरोना के चलते दूसरे काव्य संग्रह में विलंब हुआ है। पहाड़ से युवाओं के पलायन पर एक लघु उपन्यास ‘दरकते सपने’ भी प्रकाशनाधीन हैं। हिंदी भाषा और कुमाऊंनी में लिखे गए इस उपन्यास के प्रकाशन से पूर्व ही इसका आरंभिक अंश सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहा। एक अकेली युवती के अभिशापित जीवन पर आधारित उनकी कहानी ‘एक और गुलाबो’ खूब चर्चित रही और पाठकों की ओर से सराही गई।
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मूल रूप से भीमताल निवासी साहित्यकार विनोद भगत यहां कुर्मांचल कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहते हैं।
उनके माता-पिता सरकारी शिक्षक थे। भगत का रुझान शुरू से ही हिंदी साहित्य में रहा। भगत की कहानियां व कविताएं देश की कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। 2013 में उनका पहला काव्य संग्रह ‘पेट की आग’ प्रकाशित हुआ। इस संग्रह में उनकी कविताओं को काफी सराहा गया। उनकी रचनाएं चाहें कविताएं हों या कहानियां आम जनमानस के जीवन की जद्दोजहद पर आधारित होती हैं। उनकी ज्यादातर रचनाएं हिंदी में ही हैं।
हालांकि कुमाऊंनी भाषा में भी उन्होंने साहित्य सृजन किया है। ‘बारिश की एक बूंद’ नाम से उनका दूसरा काव्य संग्रह प्रकाशित हो रहा है। कोरोना के चलते दूसरे काव्य संग्रह में विलंब हुआ है। पहाड़ से युवाओं के पलायन पर एक लघु उपन्यास ‘दरकते सपने’ भी प्रकाशनाधीन हैं। हिंदी भाषा और कुमाऊंनी में लिखे गए इस उपन्यास के प्रकाशन से पूर्व ही इसका आरंभिक अंश सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहा। एक अकेली युवती के अभिशापित जीवन पर आधारित उनकी कहानी ‘एक और गुलाबो’ खूब चर्चित रही और पाठकों की ओर से सराही गई।
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