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बंकरों में बमों की आवाज से कांप जाती थी रूह

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 12:50 AM IST
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Cultural programme.
यूक्रेन से खटीमा अपने आवास पहुंचे तुषार का स्वागत करते परिजन, रिश्तेदार एवं ग्रामीण। संवाद - फोटो : KHATIMA
खटीमा। यूक्रेन में फंसा चकरपुर के पचौरिया गांव निवासी भगवान सिंह रुमाल का बेटा तुषार सिंह सोमवार को घर पहुंचा तो परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बेटे को सामने पाकर मां के आंसू छलक पड़े। परिजनों, रिश्तेदारों और क्षेत्रवासियों ने केक काटकर खुशी मनाई। तुषार ने यूक्रेन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि छात्र दो दिन तक यूनिवर्सिटी में बंकरों में बंद रहे। दिन-रात बमों की आवाज से रूह कांप जाती थी।
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यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए तुषार ने बताया कि 24 फरवरी को अचानक हुई बमबारी से वह और उसके साथी सहम गए थे। छात्रों को अपनी यूनिवर्सिटी के बंकरों में रहने की हिदायत दी गई थी। 26 फरवरी को वे रोमानिया बॉर्डर पहुंचे, जहां से भारत सरकार की ओर से की गई व्यवस्था के तहत वे 27 फरवरी की देर शाम दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे।
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तुषार ने भारत सरकार का धन्यवाद किया और यूक्रेन में फंसे छात्रों और भारतीयों को सुरक्षित अपने वतन वापस लाने की मांग की। कांग्रेस प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष भुवन कापड़ी ने तुषार के घर पहुंचकर माल्यार्पण कर स्वागत किया। स्वागत करने वालों में त्रिलोक सिंह रुमाल, कैलाश पंत, मनोहर पांडेय, विनोद चंद, प्रकाश भट्ट, राजेंद्र सिंह, सुधीर वर्मा, राजू ठकुराठी, आनंद सिंह, मोहन सिंह, गोविंद बिष्ट आदि भी शामिल रहे।
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खटीमा के ये छात्र अभी भी फंसे हैं
अंकुर वर्मा, मिताली बिष्ट, भजन सिंह, रिषभ।
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