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परिणय सूत्र में बंधे श्रीराम-जानकी
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खटीमा में कुटरा में रामलीला मंचन के दौरान श्रीराम एवं भाइयों के परिणय उत्सव का दृश्य।
- फोटो : KHATIMA
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श्री विश्वेश्वर महादेव रामलीला कमेटी की ओर से कुटरा में चल रही रामलीला के चौथे दिन श्रीराम एवं माता जानकी के विवाह के साथ ही दशरथ कैकई संवाद के दृश्यों का स्थानीय कलाकारों ने सुंदर मंचन किया।
प्राथमिक स्कूल परिसर में चल रहे मंचन के चौथे दिवस का शुभारंभ कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भुवन कापड़ी, ईस्टर फैक्टरी के एचआर हेड अजय मेहता एवं देहरादून सचिवालय के समीक्षा अधिकारी नरेंद्र चंद ने भगवान श्रीराम के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कापड़ी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने जीवन भर सत्य के मार्ग पर चलकर शक्ति एवं अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
उन्होंने पीड़ित दलित शोषित समाज को एकजुट कर उनका जन जागरण किया। अपने कार्यों के कारण ही उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया। चौथे दिन की लीला में श्री राम, भाई लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न परिणय सूत्र में बधते हैं। इसके बाद राजा दशरथ श्रीराम को युवराज बनाने की घोषणा करते हैं।
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कुटिल मंथरा की बातों में आकर कैकई राजा दशरथ से श्रीराम के लिए वनवास मांग लेती हैं। इन लीलाओं को स्थानीय कलाकारों ने सुंदर ढंग से मंच पर जीवंत किया। दशरथ के पात्र नीरज जोशी एवं कैकई के पात्र मुकेश भट्ट ने अपने शानदार अभिनय एवं गायन से खूब वाहवाही बटोरी। लीला का संचालन पंडित जगदीश चंद्र शास्त्री ने किया। संवाद
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प्राथमिक स्कूल परिसर में चल रहे मंचन के चौथे दिवस का शुभारंभ कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भुवन कापड़ी, ईस्टर फैक्टरी के एचआर हेड अजय मेहता एवं देहरादून सचिवालय के समीक्षा अधिकारी नरेंद्र चंद ने भगवान श्रीराम के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कापड़ी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने जीवन भर सत्य के मार्ग पर चलकर शक्ति एवं अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
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उन्होंने पीड़ित दलित शोषित समाज को एकजुट कर उनका जन जागरण किया। अपने कार्यों के कारण ही उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया। चौथे दिन की लीला में श्री राम, भाई लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न परिणय सूत्र में बधते हैं। इसके बाद राजा दशरथ श्रीराम को युवराज बनाने की घोषणा करते हैं।
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कुटिल मंथरा की बातों में आकर कैकई राजा दशरथ से श्रीराम के लिए वनवास मांग लेती हैं। इन लीलाओं को स्थानीय कलाकारों ने सुंदर ढंग से मंच पर जीवंत किया। दशरथ के पात्र नीरज जोशी एवं कैकई के पात्र मुकेश भट्ट ने अपने शानदार अभिनय एवं गायन से खूब वाहवाही बटोरी। लीला का संचालन पंडित जगदीश चंद्र शास्त्री ने किया। संवाद