{"_id":"621a788b3b0046049c6bfb89","slug":"cultural-programme-kashipur-news-hld454888980","type":"story","status":"publish","title_hn":"द्रोण सागर से पानी निकासी में ऊंचाई बन रही रोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
द्रोण सागर से पानी निकासी में ऊंचाई बन रही रोड़ा
विज्ञापन
द्रोणसागर स्थित जलाशय।
- फोटो : KASHIPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशीपुर। काशीपुर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तीर्थ द्रोणसागर का सौंदर्यीकरण कराया जाना है। जलाशय के सौंदर्यीकरण के लिए सरोवर से पानी की निकासी आवश्यक है लेकिन जलाशय का तल काफी गहरा है और पानी की निकासी वाला स्थान काफी ऊंचा है। ऐसे में पानी कैसे निकाला जाए, यह एक बड़ा सवाल बन गया है। काफी माथापच्ची के बाद भी सवाल का जवाब नहीं मिल सका है। अब आईआईटी रुड़की से मदद लेने का प्रयास किया जा रहा है।
द्रोणसागर ताल दूर-दूर तक मशहूर है। समय-समय पर यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग आते रहते हैं। द्रोणसागर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना है। इसके लिए काफी समय से प्रयास किए जा रहे हैं। अब सरकार ने इसके सौंदर्यीकरण के लिए पांच करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इन पैसे से ताल को सुंदर बनाने के साथ साथ ताल पर पानी निकासी का सिस्टम लगाया जाना है। सिंचाई विभाग को पानी निकासी सिस्टम लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। सिंचाई विभाग की टीम ने बीते दिनों ताल का निरीक्षण किया। पता चला कि पानी की निकासी न होने के चलते पानी ताल में खराब हो रहा है। इससे ताल की सुंदरता पर भी बट्टा लग रहा है। ताल से पानी की निकासी की कोई भी व्यवस्था नहीं है। जलाशय तल जमीन से लगभग 15 फीट गहरा है।
एक समय जलाशय का पानी उत्तर की ओर निकाला जाता था। तब यह पानी एक गूल में जाता था। धीरे-धीरे आबादी बढ़ने से गूल बंद हो गई है। अब उसमें पानी निकालना संभव नहीं है।
विज्ञापन
ऐसे में पर्यटन विभाग ने पानी की निकासी के लिए सिंचाई विभाग व आईआईटी रुड़की से सुझाव मांगा। आईआईटी ने प्रोफेसर अरुण कुमार और सिंचाई विभाग के एसडीओ मोहम्मद इमरान को जिम्मेदारी सौंपी। मोहम्मद इमरान ने बताया कि जलाशय से पानी निकासी के लिए प्रोफेसर अरुण कुमार के नेतृत्व में कार्य होगा। जलाशय से पानी की निकासी के लिए रुद्रपुर मार्ग के किनारे से नाली बनाकर पानी छोड़ने के लिए सर्वे किया गया लेकिन जलाशय का लेबिल गहरा होने से पानी की निकासी असंभव है। इस मामले पर आईआईटी के प्रोफेसर निर्णय लेंगे। उन्हीं के बताने के अनुसार पानी निकासी की व्यवस्था होगी।
विज्ञापन
द्रोणसागर ताल दूर-दूर तक मशहूर है। समय-समय पर यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग आते रहते हैं। द्रोणसागर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना है। इसके लिए काफी समय से प्रयास किए जा रहे हैं। अब सरकार ने इसके सौंदर्यीकरण के लिए पांच करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इन पैसे से ताल को सुंदर बनाने के साथ साथ ताल पर पानी निकासी का सिस्टम लगाया जाना है। सिंचाई विभाग को पानी निकासी सिस्टम लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। सिंचाई विभाग की टीम ने बीते दिनों ताल का निरीक्षण किया। पता चला कि पानी की निकासी न होने के चलते पानी ताल में खराब हो रहा है। इससे ताल की सुंदरता पर भी बट्टा लग रहा है। ताल से पानी की निकासी की कोई भी व्यवस्था नहीं है। जलाशय तल जमीन से लगभग 15 फीट गहरा है।
विज्ञापन
एक समय जलाशय का पानी उत्तर की ओर निकाला जाता था। तब यह पानी एक गूल में जाता था। धीरे-धीरे आबादी बढ़ने से गूल बंद हो गई है। अब उसमें पानी निकालना संभव नहीं है।
विज्ञापन
ऐसे में पर्यटन विभाग ने पानी की निकासी के लिए सिंचाई विभाग व आईआईटी रुड़की से सुझाव मांगा। आईआईटी ने प्रोफेसर अरुण कुमार और सिंचाई विभाग के एसडीओ मोहम्मद इमरान को जिम्मेदारी सौंपी। मोहम्मद इमरान ने बताया कि जलाशय से पानी निकासी के लिए प्रोफेसर अरुण कुमार के नेतृत्व में कार्य होगा। जलाशय से पानी की निकासी के लिए रुद्रपुर मार्ग के किनारे से नाली बनाकर पानी छोड़ने के लिए सर्वे किया गया लेकिन जलाशय का लेबिल गहरा होने से पानी की निकासी असंभव है। इस मामले पर आईआईटी के प्रोफेसर निर्णय लेंगे। उन्हीं के बताने के अनुसार पानी निकासी की व्यवस्था होगी।