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ख्वाजा-ए-हिंद के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान
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जसपुर जलसे को खिताब करते मौलाना साजिद रजा।
- फोटो : KASHIPUR
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ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के 810वें उर्स के मौके पर जलसे का आयोजन कर फातेहा ख्वानी की गई। लंगर वितरण कर विश्व के लिए अमन की दुआ मांगी गई। मंगलवार को बाबा भरपूर शाह रहमतुल्लाह अलैह के मजार पर ख्वाजा-ए-हिंद के अकीदतमंद जमा हुए। कुरान की तिलावत के बाद मौलाना साजिद रजा ने ख्वाजा के बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि सूफी संतों ने परोपकार को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जिसका उदाहरण ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का जीवन चरित्र है। हमारा कर्तव्य है कि हमारे पूर्वजों ने कौमी एकता बनाए रखने के लिए जो प्रयास किए हैं उन्हें हम आगे बढ़ाएं। उनके बताए मिशन पर चलकर इस्लाम की खिदमत करें। तमाम तरह की बुरी बातों ने समाज में घर कर लिया है, यह सब दीन-ए-इस्लाम से दूर होने की वजह है।
ख्वाजा ने हमें पैगंबर साहब के दीन पर चलने की ताकीद की है। इस मौके पर एकत्र नगर क्षेत्र के उलेमाओं समेत लोगों ने ख्वाजा को खिराजे अकीदत पेश की। मौलाना साजिद ने विश्व में अमन, चैन भाईचारे की दुआ कराई। सलातो सलाम और लंगर वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। बाबा भरपूर शाह रहमतुल्लाह अलेह एवं मदरसा बदरूल उलूम की प्रबंध कमेटी के सदस्यों ने कार्यक्रम का आयोजन किया। यहां दिलशाद, मो. वसीम, इस्लाम हुसैन, शाहनवाज वारसी, मौलाना शुऐब, कारी हसनेन, कारी नईम, मौलना जानिसार आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि सूफी संतों ने परोपकार को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जिसका उदाहरण ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का जीवन चरित्र है। हमारा कर्तव्य है कि हमारे पूर्वजों ने कौमी एकता बनाए रखने के लिए जो प्रयास किए हैं उन्हें हम आगे बढ़ाएं। उनके बताए मिशन पर चलकर इस्लाम की खिदमत करें। तमाम तरह की बुरी बातों ने समाज में घर कर लिया है, यह सब दीन-ए-इस्लाम से दूर होने की वजह है।
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ख्वाजा ने हमें पैगंबर साहब के दीन पर चलने की ताकीद की है। इस मौके पर एकत्र नगर क्षेत्र के उलेमाओं समेत लोगों ने ख्वाजा को खिराजे अकीदत पेश की। मौलाना साजिद ने विश्व में अमन, चैन भाईचारे की दुआ कराई। सलातो सलाम और लंगर वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। बाबा भरपूर शाह रहमतुल्लाह अलेह एवं मदरसा बदरूल उलूम की प्रबंध कमेटी के सदस्यों ने कार्यक्रम का आयोजन किया। यहां दिलशाद, मो. वसीम, इस्लाम हुसैन, शाहनवाज वारसी, मौलाना शुऐब, कारी हसनेन, कारी नईम, मौलना जानिसार आदि मौजूद रहे।
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