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बायोटेक के वैज्ञानिकों ने पानी में पैदा किया खीरा
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पंतनगर के हल्दी में निदेशक को मृदा रहित खीरे की खेती दिखाते वैज्ञानिक सुमित पुरोहित।
- फोटो : RUDRAPUR
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जैव प्रौद्योगिकी परिषद (बायोटेक) के वैज्ञानिक डॉ. सुमित पुरोहित ने हाइड्रोपोनिक्स विधि (मृदारहित) से पानी में खीरे का उत्पादन करने में सफलता प्राप्त की है। इस विधि में किसी भी पौधे के लिए आवश्यक तत्वों को पानी में घोल दिया जाता है। इससे पौधे में फल भरपूर मात्रा में एवं कीटनाशक मुक्त होता है।
बायोटेक के निदेशक प्रो. डीके सिंह के दिशा निर्देशन में वैज्ञानिक डॉ. सुमित पुरोहित ने दो सालों तक इस पर शोध किया था। इसमें पोषक तत्वों की मात्राओं को एनएफटी उपकरण (हाइड्रोपोनिक्स विधि मे उपयोग किया जाने वाला उपकरण) में घटा-बढ़ा कर उपयोग किया गया। इस विधि से उत्पादित होने वाले खीरे का वजन 100 ग्राम और लंबाई 15 सेमी पाई गई। बड़ी मात्रा में उत्पादन भी हुआ।
शोध कार्य में शामिल ललित मिश्रा, सचिन गौनियां व बबिता ने बताया कि बायोटेक के सहयोग से उत्तराखंड का प्रथम व्यावसायिक हाइड्रोपोनिक्स एक हजार स्क्वायर मीटर में बनाया जा चुका है। इसमें विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. मणिंद्र मोहन, डॉ. कंचन कार्की, अमित पुरोहित, ओपी वार्ष्णेय, पूनम सिंह, मीना नेगी, सचिन शर्मा, चंद्रशेखर, केशव सिंह, अनुज कुमार सहित अन्य ने शोध कार्य की सराहना की है।
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16 प्रकार के पोषक तत्वों से मिलकर तैयार हुआ खीरा
पंतनगर। डॉ. सुमित पुरोहित ने बताया कि हाइड्रोपोनिक्स में पैदा होने वाले खीरे के पौधों को उचित विकास के लिए 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसमें से कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन तो पौधा वायुमंडल से जल प्रकाश संश्लेषण क्रिया के दौरान प्राप्त करता है। नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैंगनीशियम, सल्फर, आयरन, मैगनीज, तांबा, जिंक, मॉलीब्डेनम, बोरोन इत्यादि तत्वों को उचित मात्रा में पानी में घोल कर पौधों को दिया जाता है। इसके लिए पौधों की प्रतिदिन देखरेख करनी चाहिए।
हाइड्रोपोनिक्स विधि से उगाई गई सब्जियां गुणवत्ता की दृष्टि से उत्तम होती हैं। इनमें खरपतवारों एवं रोगों की अनुपस्थिति के कारण हानिकारक रसायनों के प्रयोग की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसकी बाजार में अच्छी कीमत भी प्राप्त की जा सकती है।- प्रो. डीके सिंह, निदेशक बायोटेक हल्दी
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बायोटेक के निदेशक प्रो. डीके सिंह के दिशा निर्देशन में वैज्ञानिक डॉ. सुमित पुरोहित ने दो सालों तक इस पर शोध किया था। इसमें पोषक तत्वों की मात्राओं को एनएफटी उपकरण (हाइड्रोपोनिक्स विधि मे उपयोग किया जाने वाला उपकरण) में घटा-बढ़ा कर उपयोग किया गया। इस विधि से उत्पादित होने वाले खीरे का वजन 100 ग्राम और लंबाई 15 सेमी पाई गई। बड़ी मात्रा में उत्पादन भी हुआ।
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शोध कार्य में शामिल ललित मिश्रा, सचिन गौनियां व बबिता ने बताया कि बायोटेक के सहयोग से उत्तराखंड का प्रथम व्यावसायिक हाइड्रोपोनिक्स एक हजार स्क्वायर मीटर में बनाया जा चुका है। इसमें विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. मणिंद्र मोहन, डॉ. कंचन कार्की, अमित पुरोहित, ओपी वार्ष्णेय, पूनम सिंह, मीना नेगी, सचिन शर्मा, चंद्रशेखर, केशव सिंह, अनुज कुमार सहित अन्य ने शोध कार्य की सराहना की है।
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16 प्रकार के पोषक तत्वों से मिलकर तैयार हुआ खीरा
पंतनगर। डॉ. सुमित पुरोहित ने बताया कि हाइड्रोपोनिक्स में पैदा होने वाले खीरे के पौधों को उचित विकास के लिए 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसमें से कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन तो पौधा वायुमंडल से जल प्रकाश संश्लेषण क्रिया के दौरान प्राप्त करता है। नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैंगनीशियम, सल्फर, आयरन, मैगनीज, तांबा, जिंक, मॉलीब्डेनम, बोरोन इत्यादि तत्वों को उचित मात्रा में पानी में घोल कर पौधों को दिया जाता है। इसके लिए पौधों की प्रतिदिन देखरेख करनी चाहिए।
हाइड्रोपोनिक्स विधि से उगाई गई सब्जियां गुणवत्ता की दृष्टि से उत्तम होती हैं। इनमें खरपतवारों एवं रोगों की अनुपस्थिति के कारण हानिकारक रसायनों के प्रयोग की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इसकी बाजार में अच्छी कीमत भी प्राप्त की जा सकती है।- प्रो. डीके सिंह, निदेशक बायोटेक हल्दी