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यूएस नगर में नशीली दवाओं के साथ चरस का धंधा भी जोरों पर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Thu, 08 Sep 2016 11:21 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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शहर व आसपास के क्षेत्रों में नशीली दवाओं के साथ ही चरस (काला सोना) के कारोबार ने गहराई तक अपनी जड़ें जमाई हैं। नशीली दवाएं जहां शहर के चंद मेडिकल स्टोरों पर उपलब्ध हैं वहीं काला सोना कहे जाने वाले चरस के कारोबारी गलियों और चौराहों पर नशा बेचकर लोगों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं।
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नेपाल से रुद्रपुर में पहुंचने वाली चरस की सप्लाई यहां से पहाड़ोें तक है। लेकिन पुलिस प्रशासन नशे के इस कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठा रहा है। खास बात यह है कि ऊधमसिंह नगर जिले में सबसे ज्यादा नशा यहां के युवा चरस का करते हैं। रुद्रपुर के पहाड़गंज कालोनी में सबसे ज्यादा चरस तस्कर सक्रिय हैं।
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स्कूल कालेजों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ ही सिडकुल आदि क्षेत्रों में काम करने वाले सैकड़ों युवा इसकी लत लगाकर अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं। रुद्रपुर को नेपाल से सप्लाई होने वाली चरस का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। यहां पर चरस की खेप पहुंचने पर इसकी सप्लाई पहाड़ों को भी की जाती है।
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रुद्रपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी इस खेप का बड़ा हिस्सा बेचा जाता है। साल भर पहले कोतवाली पुलिस द्वारा पकड़ी गई करीब एक किलो चरस की जांच के बाद पता चला था कि सारी चरस नेपाल बार्डर से आई थी और ट्रांजिट कैंप में सप्लाई होनी थी। इसके साथ ही सिडकुल क्षेत्र में इसकी बड़ी डिमांड है। रंपुरा क्षेत्र में रहने वाले मजदूर वर्ग में भी इसका जबरदस्त नशा है। हल्द्वानी के गांधीनगर क्षेेत्र में कई बार पकड़ी गई चरस की खेप भी रुद्रपुर से ही पहुंची थी।
बस अड्डों और सिडकुल चौराहे पर जमे हैं कारोबारी
काले सोने के कारोबारियों का जमावड़ा शाम होते ही रोडवेज बस अड्डे के आसपास और सिडकुल की चौराहों पर लग जाता है। बस अड्डों पर जहां ये कारोबारी यात्रियों और टेंपो चालकों के साथ ही रात में होटल ढाबों में काम करने वाले बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं वहीं सिडकुल के चौराहों पर रात की शिफ्ट पूरी कर लौटने वाले युवा इनके ग्राहक होते हैं।
पुरानी चरस की अधिक कीमत
चरस के नशे का गहरा शौक रखने वाले लोग अक्सर पुरानी चरस को पाने के लिए जोर लगाते हैं और इसकी मुंह मांगी कीमत इसके सौदागर को देते हैं। नाम ना छापने की शर्त पर एक चरस के शौकीन युवा ने बताया कि नई चरस की अपेक्षा पुरानी चरस में अधिक नशा होता है इसलिए इसकी कीमत भी अधिक होती है। अच्छी कीमत पाने के लिए कारोबारी इसका स्टाक कर अधिक मुनाफा कमाते हैं। ट्रांजिट कैंप, रंपुरा, लालपुर आदि क्षेत्रों में इन्हें आसानी से चरस उपलब्ध हो जाती है।
पीलीभीत और रामपुर के चरस की है अच्छी डिमांड
शहर में पहुंचने वाली चरस में पीलीभीत और रामपुर की चरस की भी अच्छी डिमांड है। लोगों की मानें तो यहां पर साल के हर महीने चरस उपलब्ध होती है। यहां पर अफीम की खेती के साथ ही चरस भी बहुतायत मात्रा में उपलब्ध हो जाता है। नेपाल आदि जगहों से जब कभी चरस नहीं पहुंच पाती है तो नशे के कारोबारी यहां की चरस बेचकर अपना रोजगार चलाते हैं।
पिछले कई वर्षों से पहाड़ और नेपाल से भी चरस का धंधा चल रहा है। जब मैं इंटेलीजेंस हल्द्वानी पोस्टेड था तो हमने कई मामले चरस के पकड़े। उनमें अधिकांश में यही पाया गया कि पहाड़ से आने वाली चरस यूएस नगर में खपती हैं, वहीं नेपाल सीमा से भी चरस का धंधा जोरों पर चलता है। जब भी पुलिस ने कार्रवाई की है इसमें नेपाल के तस्कर भी लिप्त पाए गए हैं। चरस के इस कारोबार को तस्कर काला सोना के नाम से जानते हैं। चरस के तस्करों की धरपकड़ जारी है।
- पंकज भट्ट, एएसपी रुद्रपुर।