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प्रेमी की शादी से थी नाराज, दूर होने का डर बना हत्या की वजह, प्रेमिका गिरफ्तार
Sun, 16 Jun 2019 11:51 PM IST
yashwant yashwant
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: yashwant yashwant
Updated Sun, 16 Jun 2019 11:51 PM IST
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ओमकार हत्याकांड की आरोपी तारा देवी।
- फोटो : अमर उजाला
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तीन दिन पहले हुए ओमकार हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा करते हुए आरोपी प्रेमिका तारा देवी को गिरफ्तार कर लिया है। दस साल से चल रहे प्रेम और अवैध संबंध की कहानी का अंत ओमकार की हत्या के साथ हुआ। पुलिस ने तारा को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। पुलिस को नामजद तारा के पति की संलिप्तता इस मामले में नहीं मिली है।
रविवार को पुलिस कार्यालय में एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने ओमकार गुप्ता हत्याकांड का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि मूल रूप से ग्राम बेलाव थाना कलेर अरावल बिहार निवासी ओमकार गुप्ता (35) पुत्र कामेश्वर प्रसाद ठाकुरनगर में रहता था। सिडकुल की एक कंपनी में काम करता था। बृहस्पतिवार को घर में ओमकार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई थी। मृतक की पत्नी पिंकी कुमारी ने किरायेदार तारा देवी और उसके पति राममूरत निवासी ग्राम लोकापट्टी थाना चंदवक जोनपुर यूपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
इसके बाद पुलिस टीम गठित कर मामले के खुलासे में लगाई गई थी। जांच में पता चला कि मृतक दस साल से उक्त दंपति के साथ रहता था। डेढ़ साल पहले ओमकार और तारा ने मिलकर वार्ड दस ठाकुरनगर में मकान खरीदा था। मकान का एक कमरा किराए पर और दूसरे कमरे में तारा, उसके पति, तीन बच्चों के साथ ओमकार रहता था। ओमकार के तारा से अवैध संबंध थे। करीब तीन साल पहले ओमकार ने बिहार में शादी कर ली थी और ओमकार को पति की तरह मानने वाली तारा को जानकारी नहीं थी। जब तारा को जानकारी हुई तो उसने ओमकार से झगड़ा किया।
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ओमकार चार माह के लिए घर चला गया था, जब वह नहीं लौटा तो तारा बिहार उसके घर जा धमकी। ओमकार ने साथ रहने का भरोसा देकर तारा को वापस भेज दिया था। पति राममूरत को भी जानकारी थी। बहनोई की मौत पर दसवीं क्रियाकर्म के लिए 13 जून को ओमकार को बिहार जाना था, लेकिन तारा ने न सिर्फ विरोध किया बल्कि साथ जाने की जिद भी की।
तारा को अहसास हो रहा था कि ओमकार बिहार से नहीं लौटेगा और पत्नी के साथ रहेगा। 13 जून की सुबह ओमकार ड्यूटी से लौटा और हाथ में बने जख्म की दवाई खाकर सो गया। इसके बाद तारा ने मौका पाकर नींद में ही ओमकार की गला दबाकर हत्या कर दी। एसएसपी ने बताया कि रविवार को तारा को उसके घर से गिरफ्तार किया गया। घटना में नामजद राममूरत की अब तक जांच में भूमिका नहीं मिली है।
टीम में शामिल कर्मी
विद्यादत्त जोशी थानाध्यक्ष ट्रांजिट कैंप, एसआई योगेश कुमार, जितेंद्र सिंह, दिनेश सिंह, गोल्डी घुघत्याल, कांस्टेबल उमेश पंत, नरेश जोशी, महेंद्र कुमार, नवनी गिरि, एसओजी हेड कांस्टेबल प्रकाश भगत
प्रेमी से बिछड़ने के डर ने बना दिया कातिल
रुद्रपुर। पति और बच्चों के होते हुए अवैध संबंध रखना महिला के साथ ही प्रेेमी के लिए घातक साबित हुआ। प्रेमिका के गुस्से ने प्रेमी की जान ले ली वहीं, खुद भी सलाखों के पीछे जाना पड़ा। दोनों की ही बड़ी गलती उनके साथ ही उनके परिवारों के लिए बेहद भारी पड़ गई।
मूल रूप से जौनपुर यूपी निवासी तारा देवी की शादी 17 साल पहले राममूरत से हुई थी। कई सालों पहले राममूरत परिवार के साथ रुद्रपुर आ गया था और सिडकुल की फैक्ट्री में काम करता था। दस साल पहले तारा की जिंदगी में ओमकार गुप्ता आया और दोनों के बीच प्रेम पनप गया। इसके बाद पति की रजामंदी के बाद तारा के परिवार के साथ ही ओमकार रहने लगा था। राममूरत के साथ ही ओमकार को भी तारा पति मानती थी। बताया जा रहा है कि तारा के सिर पर इस कदर प्रेम हावी था कि वह ज्यादा दिन तक ओमकार को दूर नहीं होने देती थी। इसी वजह से ओमकार कम ही बिहार जा पाता था।
एक ही कमरे में तीन बच्चे, पति और ओमकार के साथ तारा रह लेती थी। तारा के यही अंधे प्रेम की वजह थी कि ओमकार ने तीन साल पहले गुपचुप बिहार में घर जाकर शादी कर ली थी। लेकिन जब तारा को शादी की बात पता चली तो वह अंदर टूट गई थी। इसको लेकर उसका ओमकार से काफी दिनों तक झगड़ा होता रहा था।
ओमकार की शादी के बाद तारा को लगने लगा था कि ओमकार उससे दूर जा सकता है। ओमकार से बिछुड़ने का यह डर तब और पुख्ता हुआ जब कुछ माह पहले ओमकार बिहार गया और तीन माह तक नहीं लौटा। इसके बाद तारा बिहार में ओमकार के घर पहुंची थी और हंगामे के बाद पंचायत भी हुई थी। ओमकार के समझाने के बाद तारा वापस तो आ गई मगर उसके जेहन में ओमकार से बिछुडने का डर और बढ़ गया। यही वजह थी कि ओमकार के बहनोई की दसवीं में उसने भी बिहार जाने की जिद पकड़ ली थी। लेकिन ओमकार ने उसकी यह जिद नहीं मानी तो वह आगबबूला हो गई।
इसी गुस्से ने उसके हाथों ओमकार की हत्या करवा दी। शादीशुदा तारा से अवैध संबंध रखना जहां ओमकार की जान पर भारी पड़ा, वहीं खुद शादीशुदा और तीन बच्चों की मां होने के बावजूद दूसरे व्यक्ति से अंधा प्रेम करना तारा को सलाखों के पीछे ले गया। बस तारा के पति, तीन बच्चे और मृतक ओमकार की पत्नी और परिवार वाले दोनों की कारगुजारियों पर अफसोस ही करते रह गए।
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रविवार को पुलिस कार्यालय में एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने ओमकार गुप्ता हत्याकांड का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि मूल रूप से ग्राम बेलाव थाना कलेर अरावल बिहार निवासी ओमकार गुप्ता (35) पुत्र कामेश्वर प्रसाद ठाकुरनगर में रहता था। सिडकुल की एक कंपनी में काम करता था। बृहस्पतिवार को घर में ओमकार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई थी। मृतक की पत्नी पिंकी कुमारी ने किरायेदार तारा देवी और उसके पति राममूरत निवासी ग्राम लोकापट्टी थाना चंदवक जोनपुर यूपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
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इसके बाद पुलिस टीम गठित कर मामले के खुलासे में लगाई गई थी। जांच में पता चला कि मृतक दस साल से उक्त दंपति के साथ रहता था। डेढ़ साल पहले ओमकार और तारा ने मिलकर वार्ड दस ठाकुरनगर में मकान खरीदा था। मकान का एक कमरा किराए पर और दूसरे कमरे में तारा, उसके पति, तीन बच्चों के साथ ओमकार रहता था। ओमकार के तारा से अवैध संबंध थे। करीब तीन साल पहले ओमकार ने बिहार में शादी कर ली थी और ओमकार को पति की तरह मानने वाली तारा को जानकारी नहीं थी। जब तारा को जानकारी हुई तो उसने ओमकार से झगड़ा किया।
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ओमकार चार माह के लिए घर चला गया था, जब वह नहीं लौटा तो तारा बिहार उसके घर जा धमकी। ओमकार ने साथ रहने का भरोसा देकर तारा को वापस भेज दिया था। पति राममूरत को भी जानकारी थी। बहनोई की मौत पर दसवीं क्रियाकर्म के लिए 13 जून को ओमकार को बिहार जाना था, लेकिन तारा ने न सिर्फ विरोध किया बल्कि साथ जाने की जिद भी की।
तारा को अहसास हो रहा था कि ओमकार बिहार से नहीं लौटेगा और पत्नी के साथ रहेगा। 13 जून की सुबह ओमकार ड्यूटी से लौटा और हाथ में बने जख्म की दवाई खाकर सो गया। इसके बाद तारा ने मौका पाकर नींद में ही ओमकार की गला दबाकर हत्या कर दी। एसएसपी ने बताया कि रविवार को तारा को उसके घर से गिरफ्तार किया गया। घटना में नामजद राममूरत की अब तक जांच में भूमिका नहीं मिली है।
टीम में शामिल कर्मी
विद्यादत्त जोशी थानाध्यक्ष ट्रांजिट कैंप, एसआई योगेश कुमार, जितेंद्र सिंह, दिनेश सिंह, गोल्डी घुघत्याल, कांस्टेबल उमेश पंत, नरेश जोशी, महेंद्र कुमार, नवनी गिरि, एसओजी हेड कांस्टेबल प्रकाश भगत
प्रेमी से बिछड़ने के डर ने बना दिया कातिल
रुद्रपुर। पति और बच्चों के होते हुए अवैध संबंध रखना महिला के साथ ही प्रेेमी के लिए घातक साबित हुआ। प्रेमिका के गुस्से ने प्रेमी की जान ले ली वहीं, खुद भी सलाखों के पीछे जाना पड़ा। दोनों की ही बड़ी गलती उनके साथ ही उनके परिवारों के लिए बेहद भारी पड़ गई।
मूल रूप से जौनपुर यूपी निवासी तारा देवी की शादी 17 साल पहले राममूरत से हुई थी। कई सालों पहले राममूरत परिवार के साथ रुद्रपुर आ गया था और सिडकुल की फैक्ट्री में काम करता था। दस साल पहले तारा की जिंदगी में ओमकार गुप्ता आया और दोनों के बीच प्रेम पनप गया। इसके बाद पति की रजामंदी के बाद तारा के परिवार के साथ ही ओमकार रहने लगा था। राममूरत के साथ ही ओमकार को भी तारा पति मानती थी। बताया जा रहा है कि तारा के सिर पर इस कदर प्रेम हावी था कि वह ज्यादा दिन तक ओमकार को दूर नहीं होने देती थी। इसी वजह से ओमकार कम ही बिहार जा पाता था।
एक ही कमरे में तीन बच्चे, पति और ओमकार के साथ तारा रह लेती थी। तारा के यही अंधे प्रेम की वजह थी कि ओमकार ने तीन साल पहले गुपचुप बिहार में घर जाकर शादी कर ली थी। लेकिन जब तारा को शादी की बात पता चली तो वह अंदर टूट गई थी। इसको लेकर उसका ओमकार से काफी दिनों तक झगड़ा होता रहा था।
ओमकार की शादी के बाद तारा को लगने लगा था कि ओमकार उससे दूर जा सकता है। ओमकार से बिछुड़ने का यह डर तब और पुख्ता हुआ जब कुछ माह पहले ओमकार बिहार गया और तीन माह तक नहीं लौटा। इसके बाद तारा बिहार में ओमकार के घर पहुंची थी और हंगामे के बाद पंचायत भी हुई थी। ओमकार के समझाने के बाद तारा वापस तो आ गई मगर उसके जेहन में ओमकार से बिछुडने का डर और बढ़ गया। यही वजह थी कि ओमकार के बहनोई की दसवीं में उसने भी बिहार जाने की जिद पकड़ ली थी। लेकिन ओमकार ने उसकी यह जिद नहीं मानी तो वह आगबबूला हो गई।
इसी गुस्से ने उसके हाथों ओमकार की हत्या करवा दी। शादीशुदा तारा से अवैध संबंध रखना जहां ओमकार की जान पर भारी पड़ा, वहीं खुद शादीशुदा और तीन बच्चों की मां होने के बावजूद दूसरे व्यक्ति से अंधा प्रेम करना तारा को सलाखों के पीछे ले गया। बस तारा के पति, तीन बच्चे और मृतक ओमकार की पत्नी और परिवार वाले दोनों की कारगुजारियों पर अफसोस ही करते रह गए।