‘मे आई कम इन सर’ 

चंदन बंगारी/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर Updated Fri, 24 Nov 2017 12:33 AM IST
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एसएसपी दफ्तर में प्रवेश की अनुमति लेता डीपी सिंह।
एसएसपी दफ्तर में प्रवेश की अनुमति लेता डीपी सिंह। - फोटो : अमर उजाला

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करीब एक महीने से एसआईटी की नजरें जिस डीपी सिंह को तलाश रही थीं वो बेहद नाटकीय ढंग से एसएसपी की चौखट पर हाजिर हो गया। जैसे ही डीपी ने कक्ष का दरवाजा खोलकर ‘मे आई कम इन सर’ कहा तो अंदर बैठे एसएसपी, एसपी क्राइम और सीओ सिटी एकबारगी चौंक उठे। यह लाजमी था क्योंकि वे डीपी सिंह के कोर्ट में आत्मसमर्पण करने को लेकर आश्वस्त थे।
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बृहस्पतिवार दोपहर पौने दो बजे एसएसपी डॉ. सदानंद दाते अपने दफ्तर में एसपी क्राइम कमलेेश उपाध्याय और सीओ स्वतंत्र कुमार के साथ भूमि मुुआवजा घोटाले को लेकर मंथन कर रहे थे। किसी को भी अंदर आने की इजाजत नहीं थी। करीब आधा घंटे तक डीपी की गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण के बारे में भी चर्चा हो रही थी। इसी बीच अचानक डीपी सिंह बेहद आत्मविश्वास की मुद्रा में एसएसपी कक्ष के दरवाजे पर पहुंच गया। उसने दरवाजा खोलकर एसएसपी से भीतर आने की इजाजत मांगी तो उसे देख तीनों अफसर भौचक्के रह गए। 
हों भी क्यों नहीं, जिस डीपी सिंह को पकड़ने के लिए एसआईटी ने पूरी ताकत झोंक दी थी, वह अचानक बेहद आत्मविश्वास के साथ हाजिर भी हो गया। एसएसपी दफ्तर में तैनात चाहे पुलिस हो या एलआईयू कर्मी सभी की जुबां पर डीपी के एसएसपी दफ्तर आने की चर्चा थी। एसआईटी में शामिल कर्मी भी डीपी को दफ्तर में देख अचरज में पड़ गए। एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने कहा कि डीपी के पास कोई रास्ता नहीं बचा था। हमें उसके कोर्ट में आत्मसमर्पण करने की उम्मीद थी।
अधिवक्ता सहित दो बनाते रहे वीडियो
पूर्व एसएलओ डीपी सिंह फिल्मी अंदाज में दो अधिवक्ताओं सहित तीन लोगों के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचा। पूरी योजना के साथ आए डीपी के साथ चल रहे एक अधिवक्ता और एक व्यक्ति मोबाइल से वीडियो बनाते चल रहे थे। कार्यालय गेट से लेकर एसएसपी कक्ष तक ये लोग सारी गतिविधि को मोबाइल के कैमरे में कैद करते रहे। इतना ही नहीं जब मीडियाकर्मी डीपी की फोटो खींचने लगे तो उनको भी उक्त लोगों ने मोबाइल में कैद किया।

इस खेल में कई और भी शामिल
एसआईटी ने करीब ढाई घंटे तक पूर्व एसएलओ डीपी सिंह से पूछताछ की, लेकिन एसआईटी डीपी से बहुत कुछ उगलवा नहीं सकी। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक कईं बार डीपी यह कहता रहा कि वह अपने पुराने बयान पर ही कायम है। उसे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उसने कुछ गलत नहीं किया। इस मामले मेें मुझे ही आरोपी बनाया गया जबकि गलत कार्य में दूसरे लोग भी शामिल हैं।

तो और अफसरों की हो सकती है गिरफ्तारी
एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में काशीपुर और जसपुर तहसील के घोटाले की जांच के बाद एसआईटी घोटाले में लिप्त दो पीसीएस अधिकारियों को अभी तक जेल भेज चुकी है। एसआईटी की जांच की रफ्तार को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि एसआईटी अभी बाजपुर और रुद्रपुर के भी कुछ तत्कालीन पीसीएस अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर सकती है। डीपी के गिरफ्त में आने के बाद जहां घोटाले में शामिल अन्य आरोपियों में हड़कंप मचा है, वहीं एसआईटी का मनोबल बढ़ गया है। माना जा रहा है कि अब अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी में एसआईटी को अधिक पसीना नहीं बहाना पड़ेगा।
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