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जमीन किसी की अधिग्रहीत मुआवजा किसी और को बंटा
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
Updated Thu, 08 Feb 2018 12:39 AM IST
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नेशनल हाईवे
- फोटो : अमर उजाला
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एनएच-74 घोटाले में एसआईटी की जांच से इतर ऐसे मामले उजागर हो रहे हैं, जिनमें जमीन किसी और की अधिग्रहीत हुई है और मुआवजा किसी और के खाते में चला गया है। एक पखवाड़े के भीतर किच्छा तहसील के दो ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। इनमें जमीन के असली मालिक के खाते में मुआवजा नहीं पहुंचा। भू-स्वामियों की शिकायत पर एसएलओ कार्यालय में गलती को ठीक करने की कार्रवाई की जा रही है।
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भूमि मुआवजा घोटाले में तत्कालीन अफसरों द्वारा जमीनों की पिछली तारीख में 143 कराकर करोड़ों का कमीशन लेने के कई मामले जांच में पकड़ में आए हैं। लेकिन ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिनमें अधिग्रहीत की गई जमीन का मुआवजा जमीन मालिक के बजाए किसी दूसरे के खाते में चला गया। एक पखवाड़े पहले किच्छा तहसील के बरा गांव का मामला लेकर एक महिला एसएसपी कार्यालय आई थी। महिला का कहना था कि उसकी जमीन का मुआवजा किसी और को दिया गया है।
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इधर, बुधवार को भी किच्छा के किशनपुर गांव से एसएसपी दफ्तर पहुंचे जीवन सिंह नेगी ने बताया कि उनका खसरा संख्या 353 को एनएच 74 के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहीत किया गया था। इसमें एक आवासीय मकान बना हुआ था। चार जनवरी को उन्हें एसएलओ कार्यालय से एक नोटिस मिला था। इसमें उनके अधिग्रहीत किये गये खसरे का मुआवजा तीन लाख 32 हजार नौ सौ 65 रुपये प्राप्त करने को कहा गया था।
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जीवन सिंह के अनुसार जब वह एसएलओ कार्यालय में अपने मुआवजे की रकम लेने पहुंचे तो पता चला कि उक्त मुआवजा किसी जगदीश प्रसाद त्यागी के खाते में पहले ही डाला जा चुका है। उन्होंने इस संबंध में अपनी शिकायत एसएलओ कार्यालय में दर्ज कराई है। जब एसएलओ यूएस चौहान से संपर्क साधा गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।