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ट्रिब्यूनल ने खारिज किया था महिला का दावा
Updated Fri, 06 Jul 2018 12:05 AM IST
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रुद्रपुर। विधवा महिला की ओर से सहमति के बगैर जमीन को बैंक में बंधक रखकर ऋण लेने को लेकर किच्छा थाने में दर्ज मुकदमे में नया मोड़ आ गया है। डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल देहरादून ने जाली दस्तखत बनाकर जमीन बंधक रखने के महिला के दावों को अस्वीकार कर दिया है। इधर, दूसरे पक्ष ने भी एसएसपी को पत्र सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बता दें कि ग्राम जवाहरनगर निवासी सरोज भंडारी ने जमीन की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए किच्छा थाने में शांतिपुरी निवासी ललित मोहन जोशी पर मुकदमा दर्ज कराया था। महिला का आरोप था कि ललित ने उसकी मर्जी के बिना जमीन को बैंक में बंधक रखकर एक करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
इधर, ललित मोहन जोशी निवासी ग्राम खमिया नंबर दो शांतिपुरी ने एसएसपी डॉ. सदानंद दाते को शिकायती पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कहा कि सरोज की जमीन को उनकी सहमति के बिना बैंक में बंधक रखने और जाली दस्तखत कर ऋण लेने के आरोप झूठे हैं। उन्होंने सरोज के साथ हुए एग्रीमेंट की कॉपी संलग्न करते हुए कहा कि सरोज को उनकी जमीन के बैंक ऑफ बड़ौदा में बंधक रखे जाने की पूरी जानकारी थी।
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उन्होंने डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल देहरादून का आदेश दिखाते हुए कहा कि सरोज ने बिना सहमति और जाली दस्तखत बनाकर बैंक में जमीन बंधक रखने का वाद ट्रिब्यूनल में दायर किया था, लेकिन 28 अप्रैल को ट्रिब्यूनल ने दावों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने फर्म तपस्या मिनरल्स के लिए ऋण लिया था, लेकिन इसमें पार्टनर की कोई भूमिका नहीं थी। इधर, एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि मामले में मुकदमे के बाद जांच की जा रही है। बैंक में ऋण के समय महिला के दस्तखत की भी जांच हो रही है।
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बता दें कि ग्राम जवाहरनगर निवासी सरोज भंडारी ने जमीन की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए किच्छा थाने में शांतिपुरी निवासी ललित मोहन जोशी पर मुकदमा दर्ज कराया था। महिला का आरोप था कि ललित ने उसकी मर्जी के बिना जमीन को बैंक में बंधक रखकर एक करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
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इधर, ललित मोहन जोशी निवासी ग्राम खमिया नंबर दो शांतिपुरी ने एसएसपी डॉ. सदानंद दाते को शिकायती पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कहा कि सरोज की जमीन को उनकी सहमति के बिना बैंक में बंधक रखने और जाली दस्तखत कर ऋण लेने के आरोप झूठे हैं। उन्होंने सरोज के साथ हुए एग्रीमेंट की कॉपी संलग्न करते हुए कहा कि सरोज को उनकी जमीन के बैंक ऑफ बड़ौदा में बंधक रखे जाने की पूरी जानकारी थी।
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उन्होंने डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल देहरादून का आदेश दिखाते हुए कहा कि सरोज ने बिना सहमति और जाली दस्तखत बनाकर बैंक में जमीन बंधक रखने का वाद ट्रिब्यूनल में दायर किया था, लेकिन 28 अप्रैल को ट्रिब्यूनल ने दावों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने फर्म तपस्या मिनरल्स के लिए ऋण लिया था, लेकिन इसमें पार्टनर की कोई भूमिका नहीं थी। इधर, एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि मामले में मुकदमे के बाद जांच की जा रही है। बैंक में ऋण के समय महिला के दस्तखत की भी जांच हो रही है।