{"_id":"5a5a58544f1c1bed408b4b86","slug":"16-crore-tdc-scam","type":"story","status":"publish","title_hn":"वितरकों के साथ मिलकर टीडीसी कर्मचारियों ने खेला था 16 करोड़ का खेल","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
वितरकों के साथ मिलकर टीडीसी कर्मचारियों ने खेला था 16 करोड़ का खेल
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
Updated Sun, 14 Jan 2018 12:34 AM IST
विज्ञापन
31 दिसंबर तक ही होगा फसल बीमा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंतनगर तराई बीज विकास निगम में गेहूं बीज बिक्री के नाम पर 16 करोड़ रुपये का घोटाला टीडीसी कर्मचारियों ने वितरकों के साथ मिलकर किया था। अधिकारियों और कर्मचारियों ने गेहूं बीज बुवाई का सीजन खत्म होने के बाद किसानों के लिए योजना निकाली और किसानों द्वारा बीज ना उठाने पर उसे यूपी और बिहार के वितरकों के गोदामों में भिजवा दिया। मामले में कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य एसआईटी के हाथ लगे हैं। जल्द ही एसआईटी बिहार और यूपी के लिए रवाना होगी।
विज्ञापन
साल 2015-16 में टीडीसी गेहूं बीज बेचने में 16 करोड़ का घोटाला उजागर हुआ था। इसकी जांच के लिए शासन के आदेश पर टीडीसी के ही वरिष्ठ उप कार्मिक अधिकारी सीके सिंह ने जुलाई 2017 को टीडीसी के ही दस कर्मचारियों के खिलाफ पंतनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। अगस्त में घोटाले की जांच के लिए एसपी सिटी देवेंद्र पींचा के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। जांच के लिए एसआईटी अब तक टीडीसी के निदेशकों और कर्मचारियों सहित 20 से अधिक लोगों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज कर चुकी है।
विज्ञापन
अब तक की जांच में एसआईटी के सामने इस बात का खुलासा हुआ कि घोटाले में लिप्त कर्मचारियों ने टीडीसी बीज वितरकों के साथ मिलकर घोटाले को अंजाम दिया। करोड़ों के बीज का घोटाला करने के लिए टीडीसी ने दो कट्टे गेंहू के बीज पर एक कट्टा बीज निशुल्क देने की योजना उत्तराखंड, यूपी और बिहार के किसानों के लिए निकाली। लेकिन तब तक गेहूं बीज बुआई का समय निकल चुका था जिसके चलते किसानों ने बीज नहीं खरीदा और टीडीसी ने करोड़ों का बीज बिहार और यूपी के वितरकों के गोदामों तक पहुंचा कर करोड़ों की रकम डकार ली।
विज्ञापन
दस्तावेजों में किसानों को बीज बिक्री करना दिखा दिया। सूत्र बताते हैं कि योजना निकालने से पहले ही बीज वितरकों तक पहुंच गया था। उत्तराखंड में तो बीज की बिक्री की ही नहीं की गई। करोड़ों के बीज में से करीब 80 प्रतिशत बिहार और 20 प्रतिशत यूपी के वितरकों के पास पहुंच गया। वर्तमान में टीडीसी के यूपी और बिहार में तीन वितरक हैं और कुछ पश्चिमी बंगाल में भी हैं। लेकिन बीज की सबसे अधिक खपत बिहार में होती है। घोटाले के कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने के बाद अब एसआईटी अगले सप्ताह तक बिहार और यूपी का रुख कर सकती है। इससे काफी हद तक घोटाले के खुलने की संभावना जताई जा रही है।
घोटाले में लिप्त कर्मचारियों ने लिया है कोर्ट से स्टे
टीडीसी गेहूं बीज बिक्री में घोटाले की पुष्टि होने के बाद टीडीसी के ही जिन दस कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें से एक की मौत हो चुकी है। आरोपी बनाए गए बाकी नौ लोगों ने कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे लिया है। इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि एसआईटी मामले में जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सकती है। चिन्हित नौ कर्मचारियों के साथ ही वितरकों के खिलाफ भी एसआईटी ने आवश्यक साक्ष्य जुटा लिऐ हैं।
एसआईटी को नहीं मिल रहा टीडीसी का सहयोग
बीज घोटाले की जांच कर रही एसआइटी को जांच में टीडीसी का ही सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इससे टीडीसी की जांच रफ्तार को गति नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही अब तक एसआईटी को टीडीसी मुख्यालय से भी मूल दस्तावेज नहीं मिल पाये हैं। इसके लिए मंगलवार को एसआईटी देहरादून जाने की तैयारी भी कर रही है।
पंतनगर टीडीसी बीज घोटाले की जांच के लिए टीडीसी निदेशकों के साथ ही कर्मचारियों से पूछताछ के बाद कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। जांच के लिए जल्द ही एसआईटी यूपी और बिहार के लिए रवाना होगी। टीडीसी के नौ कर्मचारियों के साथ ही कुछ और लोगों को भी चिन्हित किया गया है।
देवेंद्र पींचा, एसपी सिटी/प्रभारी एसआईटी