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Udham Singh Nagar News: डिजिटल अरेस्ट कर 45.40 लाख वसूलने वाला साइबर ठग गिरफ्तार
Sun, 08 Dec 2024 12:25 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sun, 08 Dec 2024 12:25 AM IST
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रुद्रपुर। एसटीएफ की साइबर पुलिस ने एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट कर 45.40 लाख रुपये वसूलने वाले गिरोह के मुख्य अभियुक्त को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। गिरोह ने पीड़ित को 36 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा था। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अभियुक्त के बैंक खाते में दिसम्बर 2023 से जुलाई 2024 तक करोड़ों रुपयों का लेनदेन मिला है और उसके पास से घटना में प्रयुक्त एक मोबाइल, दो सिम कार्ड, एक पीएनबी का चेक बुक बरामद किया गया है।
दरअसल, बीते जुलाई में काशीपुर निवासी एक व्यक्ति ने साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कराया था। पीड़ित का कहना था कि नौ जुलाई को उनके मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप काल आया था। कॉलर ने खुद को ट्राई डिपार्टमेंट का अधिकारी बताया था। कहा था कि मुंबई क्राइम ब्रांच पुलिस ने पीड़ित के आधार नंबर व रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर पर 17 केस पंजीकृत होने की सूचना दी है और पीड़ित का सिम बंद किया जा रहा है। इसके बाद उसने मुंबई क्राइम ब्रांच पुलिस तिलकनगर के पुलिस अधिकारी हेमराज कोहली से बात कराने की बात कही और ऑटो रिकार्डिंग कॉल ट्रांसफर की गई।
वीडियो काल में एक व्यक्ति पुलिस अधिकारी की वर्दी पहने हुए नजर आ रहा था। उनके नाम पर दर्ज एफआईआर की कॉपी भेजकर बताया कि आपका नंबर और आधार कार्ड कैनरा बैंक मुंबई में 20 करोड़ के हवाला घोटाले में संलिप्त पाए गए हैं। इसके बाद उनके नाम से एक एटीएम कार्ड व कैनरा बैंक का स्टेटमेंट व्हाटसएप पर भेजा गया। कहा गया कि वे अभियुक्त हैं। जांच पूरी होने तक वे कॉल नहीं रखेंगे।
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इसके बाद उनके बैंक खाते की डिटेल पूछी गई और लेनदेन व जमा धनराशि की जानकारी की गई। कह कि उनके खाते की धनराशि रिफाइन होगी। जांच में निर्दोष पाए जाने पर रुपये वापस किए जाएंगे। इस पर उन्होंने बताए गए बैंक खाते में आरटीजीएस से 19 जुलाई को 45 लाख 40 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। इसके बाद उनको धोखाधड़ी का एहसास हुआ था।
एसटीएफ एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि साइबर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त बैंक खातों, मोबाइल नंबरों को खंगाला था। इस पर एक अभियुक्त को चिह्नित किया गया, लेकिन वह लगातार ठिकाने बदलता रहा। शुक्रवार को टीम ने मुख्य अभियुक्त पंकज कुमार निवासी ग्राम चमनपुरा थाना बरियारपुर जिला देवरिया, यूपी को लखनऊ से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अभियुक्त की ओर से धोखाधडी में प्रयुक्त किए जा रहे बैंक खाते के विरुद्ध देश भर के विभिन्न राज्यों में अनेक शिकायतें होने के साथ ही दो एफआईआर दर्ज पाई गई हैं।
गुजरात पुलिस से बचने के लिए होटल में छिपा था पंकज
रुद्रपुर। साइबर पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार पंकज और उसके गिरोह के सदस्यों ने कोलकाता में एक करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की थी और उसका केस दर्ज है। इसके अलावा गुजरात में साइबर धोखाधड़ी का मामला गिरोह पर दर्ज है। इस मामले में पंकज का साथी गुजरात पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस पंकज की तलाश कर रही थी और पुलिस से बचने के लिए पंकज लखनऊ के एक होटल में छिपा था और उत्तराखंड पुलिस के हत्थे चढ़ गया। ब्यूरो
12वीं पास है आरोपी, पटना से संचालित है गैंग
रुद्रपुर। डिजिटल अरेस्ट कर लोगों को डरा धमकाकर वसूली करने वाला गैंग बिहार के पटना से संचालित होता है। पंकज पटना में प्राइवेट नौकरी करता था और इस गैंग के संपर्क में आकर साइबर ठग बन गया। वह 12वीं तक पढ़ा हुआ है। उसने अपनी फर्जी फर्म के लिए खुलवाए खाते में पीड़ित से पूरे 45.40 लाख रुपये आरटीजीएस कराए थे। इसके बाद यह रुपया अन्य खातों में हस्तांतरित किया गया था। अभियुक्त फर्जी फर्म के करेन्ट बैक खाता खोलकर पीड़ित व्यक्तियों को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी गई धनराशि अपने बैक खातों में स्थानान्तरित करवाते हैं। अभियुक्त अन्य व्यक्तियों के करेन्ट बैंक खाते खोलकर उसमें इन्टरनेट बैंकिंग एक्टिव करवाकर स्वयं इन्टरनेट बैंकिंग किट प्राप्त कर लॉग-इन आईडी पासवर्ड बनाकर खातों का प्रयोग धोखाधड़ी के लिए करते हैं। ब्यूरो
दूसरे राज्यों की पुलिस को दी गई सूचना
रुद्रपुर। इस गिरोह के खिलाफ आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, ओडिशा में साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। अभियुक्त के पकड़े जाने के बाद दूसरे राज्यों की पुलिस को सूचना दी गई है। एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह ने लोगों से अपील की कि डिजिटल अरेस्ट एक स्कैम है जो वर्तमान में पूरे भारत वर्ष में चल रहा है। कोई भी ट्राई डिपार्टमेंट/ सीबीआई अफसर, मुम्बई क्राइम ब्रान्च, साइबर क्राइम, ईडी अफसर या कोई भी एजेंसी आपको व्हाट्सएप के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट करने के लिए नोटिस नहीं भेजती है। कोई व्यक्ति आपको फर्जी दस्तावेज, अवैध सामग्री आदि के नाम पर डरा धमका रहा है या पैसों की मांग कर रहा है तो इस संबंध में साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार के लोक लुभावने अवसरों/फर्जी साइट/धनराशि दोगुना करने व टिकट बुक करने वाले अंनजान अवसरों के प्रलोभन में न आएं । ब्यूरो
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दरअसल, बीते जुलाई में काशीपुर निवासी एक व्यक्ति ने साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कराया था। पीड़ित का कहना था कि नौ जुलाई को उनके मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप काल आया था। कॉलर ने खुद को ट्राई डिपार्टमेंट का अधिकारी बताया था। कहा था कि मुंबई क्राइम ब्रांच पुलिस ने पीड़ित के आधार नंबर व रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर पर 17 केस पंजीकृत होने की सूचना दी है और पीड़ित का सिम बंद किया जा रहा है। इसके बाद उसने मुंबई क्राइम ब्रांच पुलिस तिलकनगर के पुलिस अधिकारी हेमराज कोहली से बात कराने की बात कही और ऑटो रिकार्डिंग कॉल ट्रांसफर की गई।
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वीडियो काल में एक व्यक्ति पुलिस अधिकारी की वर्दी पहने हुए नजर आ रहा था। उनके नाम पर दर्ज एफआईआर की कॉपी भेजकर बताया कि आपका नंबर और आधार कार्ड कैनरा बैंक मुंबई में 20 करोड़ के हवाला घोटाले में संलिप्त पाए गए हैं। इसके बाद उनके नाम से एक एटीएम कार्ड व कैनरा बैंक का स्टेटमेंट व्हाटसएप पर भेजा गया। कहा गया कि वे अभियुक्त हैं। जांच पूरी होने तक वे कॉल नहीं रखेंगे।
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इसके बाद उनके बैंक खाते की डिटेल पूछी गई और लेनदेन व जमा धनराशि की जानकारी की गई। कह कि उनके खाते की धनराशि रिफाइन होगी। जांच में निर्दोष पाए जाने पर रुपये वापस किए जाएंगे। इस पर उन्होंने बताए गए बैंक खाते में आरटीजीएस से 19 जुलाई को 45 लाख 40 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। इसके बाद उनको धोखाधड़ी का एहसास हुआ था।
एसटीएफ एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि साइबर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त बैंक खातों, मोबाइल नंबरों को खंगाला था। इस पर एक अभियुक्त को चिह्नित किया गया, लेकिन वह लगातार ठिकाने बदलता रहा। शुक्रवार को टीम ने मुख्य अभियुक्त पंकज कुमार निवासी ग्राम चमनपुरा थाना बरियारपुर जिला देवरिया, यूपी को लखनऊ से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अभियुक्त की ओर से धोखाधडी में प्रयुक्त किए जा रहे बैंक खाते के विरुद्ध देश भर के विभिन्न राज्यों में अनेक शिकायतें होने के साथ ही दो एफआईआर दर्ज पाई गई हैं।
गुजरात पुलिस से बचने के लिए होटल में छिपा था पंकज
रुद्रपुर। साइबर पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार पंकज और उसके गिरोह के सदस्यों ने कोलकाता में एक करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की थी और उसका केस दर्ज है। इसके अलावा गुजरात में साइबर धोखाधड़ी का मामला गिरोह पर दर्ज है। इस मामले में पंकज का साथी गुजरात पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस पंकज की तलाश कर रही थी और पुलिस से बचने के लिए पंकज लखनऊ के एक होटल में छिपा था और उत्तराखंड पुलिस के हत्थे चढ़ गया। ब्यूरो
12वीं पास है आरोपी, पटना से संचालित है गैंग
रुद्रपुर। डिजिटल अरेस्ट कर लोगों को डरा धमकाकर वसूली करने वाला गैंग बिहार के पटना से संचालित होता है। पंकज पटना में प्राइवेट नौकरी करता था और इस गैंग के संपर्क में आकर साइबर ठग बन गया। वह 12वीं तक पढ़ा हुआ है। उसने अपनी फर्जी फर्म के लिए खुलवाए खाते में पीड़ित से पूरे 45.40 लाख रुपये आरटीजीएस कराए थे। इसके बाद यह रुपया अन्य खातों में हस्तांतरित किया गया था। अभियुक्त फर्जी फर्म के करेन्ट बैक खाता खोलकर पीड़ित व्यक्तियों को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी गई धनराशि अपने बैक खातों में स्थानान्तरित करवाते हैं। अभियुक्त अन्य व्यक्तियों के करेन्ट बैंक खाते खोलकर उसमें इन्टरनेट बैंकिंग एक्टिव करवाकर स्वयं इन्टरनेट बैंकिंग किट प्राप्त कर लॉग-इन आईडी पासवर्ड बनाकर खातों का प्रयोग धोखाधड़ी के लिए करते हैं। ब्यूरो
दूसरे राज्यों की पुलिस को दी गई सूचना
रुद्रपुर। इस गिरोह के खिलाफ आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, ओडिशा में साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। अभियुक्त के पकड़े जाने के बाद दूसरे राज्यों की पुलिस को सूचना दी गई है। एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह ने लोगों से अपील की कि डिजिटल अरेस्ट एक स्कैम है जो वर्तमान में पूरे भारत वर्ष में चल रहा है। कोई भी ट्राई डिपार्टमेंट/ सीबीआई अफसर, मुम्बई क्राइम ब्रान्च, साइबर क्राइम, ईडी अफसर या कोई भी एजेंसी आपको व्हाट्सएप के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट करने के लिए नोटिस नहीं भेजती है। कोई व्यक्ति आपको फर्जी दस्तावेज, अवैध सामग्री आदि के नाम पर डरा धमका रहा है या पैसों की मांग कर रहा है तो इस संबंध में साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार के लोक लुभावने अवसरों/फर्जी साइट/धनराशि दोगुना करने व टिकट बुक करने वाले अंनजान अवसरों के प्रलोभन में न आएं । ब्यूरो