{"_id":"5a79f8774f1c1b8e238b719e","slug":"correct-payment-of-compensation","type":"story","status":"publish","title_hn":"गलती सुधार दोगुने के बजाय अब हो रहा मुआवजे का सही भुगतान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गलती सुधार दोगुने के बजाय अब हो रहा मुआवजे का सही भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर।
Updated Wed, 07 Feb 2018 12:18 AM IST
विज्ञापन
नेशनल हाईवे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर से काठगोदाम हाइवे (एनएच-87) के चौड़ीकरण की जद में आए रुद्रपुर के सात गांवों में मुआवजे को लेकर बड़ी गलती हुई थी। सरकारी जमीन पर खड़े ढांचों का मूल्यांकन दोगुना कर दिया गया था। इसके चलते जहां मुआवजा 22 करोड़ होना था, वो 33 करोड़ रुपये निर्धारित हो गया था। हालांकि, एसएलओ दफ्तर से हुई गलती को एनएचएआई ने पकड़ लिया और नियमानुसार दोगुने की बजाए एकल मुआवजे का ही भुगतान कर रहा है।
विज्ञापन
एनएच-87 में रामपुर से काठगोदाम तक हाइवे चौड़ीकरण का काम चल रहा है। चौड़ीकरण की जद में रुद्रपुर क्षेत्र के जगतपुरा, फाजलपुर महरौला, मटकोटा, नगला, रम्पुरा, कल्याणपुर और एक अन्य गांव की जमीनें आई हैं। ज्यादातर सरकारी जमीन होने की वजह से उनमें मौजूद भवन और दुकानों का मूल्यांकन कर एसएलओ दफ्तर से मुआवजा निर्धारित कर एनएचएआई को भेजा गया था। लेकिन, मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया में बड़ी चूक हुई थी।
विज्ञापन
नियमानुसार भूमिधरी की जमीन पर खड़े ढांचे में मूल्यांकन दोगुना होता है, लेकिन तत्कालीन अफसरों ने सरकारी जमीन पर खड़े ढांचों का मूल्यांकन भी एकल की बजाए दोगुना कर दिया था। इस वजह से जहां सात गांवों का मुआवजा करीब 22 करोड़ रुपये निर्धारित होना चाहिए था, वह 33 करोड़ कर दिया गया था। एनएचएआई के अधिकारियों ने मुआवजा निर्धारण में हुई गलती को पकड़ लिया था। इसी वजह से एनएचएआई की तरफ से सरकारी जमीन पर बने ढांचों का भुगतान की राशि दोगुने की बजाए एकल के आधार पर एलएलओ दफ्तर को जारी की जा रही है।
विज्ञापन
ढाई महीनों में केवल 15 लोगों ने लिया मुआवजा
एनएच-87 की जद में आ रहे रुद्रपुर के जगतपुरा, कल्याणपुर और नगला के 143 लोगों को एसएलओ दफ्तर की तरफ सरे ढाई महीने पहले नोटिस भेजा गया था। नोटिस में मुआवजे के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई करने और 60 दिन के भीतर जमीन से कब्जा छोड़ने को कहा गया था। लेकिन, तय समय बीतने के बाद भी मुआवजे लेने वालों की संख्या बेहद कम रही थी, इसी वजह से कुछ समय पहले ही इन लोगों को अंतिम नोटिस भेजा गया था।
एसएलओ दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार तीन गांवों के 143 लोगों में से अभी तक महज 15 लोगों ने ही मुआवजा लिया है। तीन गांवों के लिए जारी एक करोड़ 17 लाख रुपयों में से महज 13 लाख ही मुआवजा बंट सका है। मुआवजे के प्रति बेरुखी की बड़ी वजह से उक्त लोगों का सरकारी जमीन पर काबिज होना है। बताया जा रहा है कि अंतिम नोटिस में कब्जा छोड़ने के लिए कोई मीयाद नहीं दी गई है। रुद्रपुर क्षेत्र के बाकी अन्य गांवों की मुआवजा राशि अभी नहीं आई है। एसएलओ दफ्तर से उन लोगों को ही नोटिस दिया जा रहा है, जिनकी मुआवजा राशि एनएचएआई से मिल रही है।