फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   Corbett Park Link Express hit the elephant, death

कॉर्बेट पार्क लिंक एक्सप्रेस से टकराया हाथी, मौत

Thu, 15 Sep 2016 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर Updated Thu, 15 Sep 2016 12:58 AM IST
विज्ञापन
Corbett Park Link Express hit the elephant, death
काशीपुर में ट्रेन की टक्कर से मरा नर हाथी - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन


तराई पश्चिमी वन प्रभाग के आमपोखरा रेंज के जंगल से पटरी पार कर गोपीपुरा गांव की ओर आ रहे तीन हाथियों में से एक हाथी की दिल्ली जा रही कार्बेट पार्क लिंक एक्सप्रेस से टकराकर मौत हो गई। हाथी की मौत की सूचना से वन महकमे में हड़कंप मच गया। शव से दोनों दांत अलग करने के साथ ही शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद दफना दिया गया।  


मंगलवार रात आमपोखरा रेंज के जंगल से तीन हाथी रेलवे पटरी पार कर गोपीपुरा गांव में धान के खेतों की ओर जा रहे थे। इसी बीच एक हाथी रामनगर से दिल्ली जा रही कार्बेट पार्क लिंक एक्सप्रेस से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि भारीभरकम हाथी लुढ़क कर खेत के पास जा गिरा। साथी हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज सुनकर ग्रामीण घरों से बाहर निकले तो हाथी को मरा हुआ देखा। ग्राम प्रधान बाबू चौधरी की सूचना पर बीट अधिकारी प्रेम सिंह घटनास्थल पर पहुंचे।
विज्ञापन


नर हाथी के दोनों दांत सुरक्षित थे और एक दांत की लंबाई 1.45 मीटर थी। बुधवार सुबह वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते, डीएफओ कहकशां नसीम सहित अनेक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। कार्बेट टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत और काशीपुर के पशु चिकित्सक डॉ. राजीव कुमार ने शव का पोस्टमार्टम किया। हाथी के पेट में चोट लगने से उसकी आंतें फट गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पेट में खून भी जमा हो गया था। डीएफओ कहकशां ने बताया कि नर हाथी की उम्र करीब 35 से 40 साल की है। शव का पीएम कराकर दफना दिया गया है। हाथी शेड्यूल वन का जानवर है, इसलिए ट्रेन चालक के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।


वन्य जीवों के साथ पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी है। 2010 में सीमैप लालकुआं के पास ट्रेन की चपेट में आने से एक हाथी की टांग टूट गई थी। काफी दिनों के इलाज के बाद हाथी की मौत हो गई। अक्तूबर 2011 में इसी रेंज में सात चीतल ट्रेन से कटकर मारे गए थे। 28 नवंबर 2014 को चांदपुर के निकट ट्रेन से कटकर एक बाघिन की मौत हो गई थी। वहीं करीब चार साल पहले हेमपुर डिपो के पास टाइगर की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।


 ग्राम प्रधान बाबू चौधरी ने बताया कि कुछ दिनों से हाथियों का झुंड खेतों में घुसकर धान की फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। रात में जब हाथी ट्रेन से टकराया तो बाकी हाथी चिंघाड़ने लगे थे। हाथियों की दस्तक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। उन्हें डर है कि हाथी फिर से गांव में घुसकर उत्पात न मचाएं। रेंजर लक्ष्मण सिंह बिष्ट ने बताया कि कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने हाथियों के गांव में घुसने की शिकायत की थी। जिसके बाद वहां श्रमिक रखे गए थे। हादसे के बाद अब गश्त बढ़ा दी गई है।



अपने करीबी की मौत पर हाथी भी इनसानों की तरह गुस्से और गम का इजहार करते हैं। मंगलवार रात तराई पश्चिमी वन प्रभाग की आमपोखरा रेंज में रेल पटरी पार करते एक हाथी की ट्रेन की टक्कर से हुई मौत के बाद इसका नजारा समाने आया। गोपीपुरा गांव में भी साथी हाथी की मौत के बाद दो साथियों ने करीब एक घंटे तक जमकर उत्पात मचाया।

जोर-जोर से चिंघाड़ रहे हाथियों के क्रोध को देखते हुए ग्रामीण भी सहम गए। दिल्ली जा रही कार्बेट लिंक एक्सप्रेस जिस दिशा को गई, हाथी उसके पीछे-पीछे कुछ दूरी तक दौड़े। पटरी किनारे लगे दो पिलर गिरा दिए। हाथियों को भगाने के लिए ग्रामीण और वनकर्मियों को शोरगुल के साथ ही हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी।


हाथी को सामाजिक जानवर माना जाता है। अगर झुंड से कोई हाथी बिछुड़ गया या गड्ढे में कोई बच्चा फंस जाता है तो झुंड के सारे हाथी मिलकर उसे मुसीबत से बाहर निकालने को खड़े हो जाते हैं। वे अपने साथी की मौत पर इंसानों की तरह दुख और गुस्सा जताते हैं। गोपीपुरा के पास हाथी की मौत के बाद दो हाथियों ने जमकर गुस्सा दिखाया।

वे पहले तो मृत हाथी के पास खड़े होकर काफी देर तक चिंघाड़ते रहे। फिर चिंघाड़ते हुए जिस दिशा में ट्रेन गई थी उस और दौड़े। उन्होंने रास्ते में आए दो पिलर भी टक्कर मारकर तिरछे कर दिए। हाथियों के गुस्से से ग्रामीण भी कांप उठे। उन्होंने वनकर्मियों के साथ हाथियों को भगाने की कोशिश की, मगर वे काफी देर तक चिंघाड़ते रहे।

बताया जा रहा है कि गौशाला स्टेशन का स्टाफ भी हाथियों को देखकर सहम गया था। रेंजर लक्ष्मण सिंह बिष्ट ने बताया कि करीब एक घंटे तक चिंघाड़ने और इधर-उधर भागने के बाद लोगों के शोर मचाने पर हाथी जंगल को लौट गए।


बुधवार सुबह मुख्य वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते, डीएफओ कहकशां नसीम सहित अनेक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कार्बेट पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत और काशीपुर के पशु चिकित्सक डॉ. राजीव कुमार ने शव का पोस्टमार्टम किया। हाथी के पेट में चोट लगने से उसकी आंतें फट गई थीं, उसके पेट में खून जमा हो गया था। मृतक हाथी के दोनों दांत अलग करने के साथ ही शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद दफना दिया गया है।



ग्राम प्रधान बाबू चौधरी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से हाथियों का झुंड खेतों में धान की फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। रेंजर लक्ष्मण सिंह बिष्ट ने बताया कि कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने हाथियों के गांव में घुसने की शिकायत की थी, जिसके बाद वहां श्रमिक रखे गए थे। हादसे के बाद अब गश्त बढ़ा दी गई है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed