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एस्कार्ट फार्म में तीन साल में भी पूरा नहीं हो सका निर्माण

आरडी खान काशीपुर। Updated Sat, 16 Dec 2017 12:51 AM IST
काशीपुर में बनने के बाद उखड़ने लगी स्कॉर्ट फार्म सिडकुल की सड़के।
काशीपुर में बनने के बाद उखड़ने लगी स्कॉर्ट फार्म सिडकुल की सड़के। - फोटो : Amar Ujala
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आईआईएम के सामने ज्ञान केंद्र के तौर पर प्रस्तावित औद्योगिक आस्थान (एस्कार्ट फार्म) में तीन वर्ष बाद भी अवस्थापना सुविधाएं पूर्ण नहीं हो सकी है। यहां प्रस्तावित फोरलेन से लेकर सड़कों, नहर, तार और सीवर लाइन बिछाने का कार्य अधूरा पड़ा है। जबकि कार्यदायी संस्था को तीन चौथाई से अधिक भुगतान हो चुका है। विश्वस्तरीय ज्ञान केंद्र स्थापित करने की मंशा से विकसित किए जा रहे इस सिडकुल में अभी तक एक भी निवेशक ने रुचि नहीं दिखाई है।


कुंडेश्वरी के ग्राम दोहरी वकील, पच्चावाला की करीब 503 एकड़ भूमि सीलिंग एक्ट के तहत सरप्लस घोषित की गई थी। इसमें से 187 एकड़ भूमि भारतीय प्रबंध संस्थान को उपलब्ध करा दी गई। पांच एकड़ भूमि पर बिक्री कर का कार्यालय स्थापित किया जा रहा है। 311 एकड़ भूमि पर  विश्वस्तरीय ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें से 144.24 एकड़ भूमि पर उद्योग, 30.22 एकड़ भूमि पर वाणिज्यिक भवन, 11.66 एकड़ पर आवासीय भवन, 23.61 एकड़ भूमि पर सामुदायिक भवन का निर्माण प्रस्तावित है।


जबकि 41.56 एकड़ भूमि सड़कों व 59.69 एकड़ भूमि ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित की जानी है। यहां औद्योगिक आस्थान में अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने का जिम्मा यूपी निर्माण निगम की पिथौरागढ़ इकाई को सौंपा गया है। कार्यदायी संस्था ने सड़क, नाली व केनाल निर्माण का काम वुडहिल को सौंपा है। जबकि खंभे लगाने व तार बिछाने का काम शिवा इलेक्ट्रिक कंपनी कर रही है। सीवर व पानी निकासी का ठेका कुर्मांचल कंपनी को दिया गया। कार्यदायी संस्था के अधिकारी सिडकुल में अवस्थापना सुविधाओं का 90 फीसदी काम पूरा हो जाने का दावा रहे हैं। उनका कहना है कि रोड साइड के पेड़ काटने की अनुमति न मिल पाने के कारण कुछ काम रुका पड़ा है। जो अप्रैल माह तक पूर्ण कर लिया जाएगा।

लेकिन इससे इतर अभी सिडकुल की सड़कों का बीस फीसदी काम भी नही हो पाया है। जो सड़कें बनाई गई हैं वो भी रखरखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हो रही है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर अभी कोई तैयारी नहीं है। सिडकुल में पोल तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन उन पर तार नहीं बिछाए जा सके हैं। पावर स्टेशन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। सिडकुल के आरएम गिरधर रावत स्वीकारते हैं कि निर्माणदायी संस्था को करीब तीन चौथाई भुगतान किया जा चुका है।

खर्च एक हजार करोड़, नहीं लगा एक भी उद्योग
 औद्योगिक आस्थान विकसित करने को लेकर सिडकुल प्रबंधन सवालों के घेरे में है।  वर्ष 2004 से 2013 के बीच हरिद्वार, काशीपुर व सितारगंज आदि स्थानों पर करीब आठ हजार एकड़ भूमि विकसित की गई। इन आस्थानों में अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने पर करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये का व्यय हुआ। इस दौरान विभिन्न आस्थानों में करीब 2000 से अधिक उद्योग स्थापित हुए। वहीं पिछले तीन वर्षों में सिडकुल द्वारा करीब 1250 एकड़ भूमि में औद्योगिक आस्थान विकसित किए जा रहे हैं। इन आस्थानों को विकसित करने में अब तक एक हजार करोड़ से अधिक का व्यय हो चुका है। इससे इतर इन आस्थानों में अभी तक एक भी निवेशक ने उद्योग लगाने में रुचि नहीं दिखाई है। यहीं आंकड़े सिडकुल की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।

औद्योगिक विकास को गंभीर पहल की दरकार
केजीसीसीआई के अध्यक्ष विकास जिंदल का कहना है कि औद्योगिक विकास को लेकर उत्तराखंड सरकार गंभीर नहीं है। जबकि महाराष्ट्र व गुजरात औद्योगिक विकास की दृष्टि से बेहद समृद्ध है। उत्तराखंड सरकार ने उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष पैकेज नहीं दिया है। वहीं सिडकुल में जमीनों की कीमतें बहुत अधिक है। औद्योगिक आस्थान को लेकर सरकार की कोई स्पष्ट नीति न होने से अभी तक निवेशक रूचि नही दिखा रहे है। चैंबर के पूर्व अध्यक्ष राजीव घई ने कहा कि आईआईएम के सामने शैक्षिक ज्ञान केंद्र स्थापित करने लिए सरकार को औद्योगिक संगठनों के साथ अपना दृष्टिकोण साझा करना चाहिए। यहां आईआईटी, क्लिनिकल सेंटर व उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थान स्थापित करने के लिए सरकार को गंभीर पहल करनी चाहिए। साथ ही निवेशकों को विशेष पैकेज दिए जाने पर भी विचार करना चाहिए। ताकि सिडकुल को आईआईएम का लाभ मिल सके। 

 

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