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Udham Singh Nagar News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसानों को दी राहत, बेमौसमी धान की खेती को सशर्त छूट

Thu, 27 Feb 2025 12:46 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर
अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 27 Feb 2025 12:46 PM IST
सार

तराई में सरकार ने किसानों को ग्रीष्मकालीन धान लगाने की सशर्त छूट दी है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह व्यवस्था केवल 31 मार्च 2025 तक लागू रहेगी। गेहूं की कटाई के बाद खाली खेतों में किसी भी दशा में ग्रीष्मकालीन धान नहीं लगाया जाएगा।

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Conditional exemption for off-season paddy cultivation in udham singh nagar
सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तराई में सरकार ने किसानों को ग्रीष्मकालीन धान लगाने की सशर्त छूट दी है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह व्यवस्था केवल 31 मार्च 2025 तक लागू रहेगी। गेहूं की कटाई के बाद खाली खेतों में किसी भी दशा में ग्रीष्मकालीन धान नहीं लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से तराई के कई किसानों को राहत मिली है।

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सीएम ने बताया कि वर्ष 2024-25 में खेती के लिए फसल चक्र नहीं अपना सके किसानों को मक्के के बीज उपलब्ध न होने के कारण राहत दी गई है। एक अप्रैल से एक जून तक धान की रोपाई पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इस दौरान धान की नर्सरी होने या लगाए जाने की सूचना प्राप्त होगी तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने किसानों से खेती एवं पर्यावरण को बचाने में सहयोग करने की अपील की।

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कहा कि जो किसान मार्च में ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसल लगाना चाहते हैं, वे साइलेज के लिए मक्के को बो सकते हैं। यह 60-65 दिन में तैयार हो जाएगी। गन्ना, उड़द, सूरजमुखी आदि फसल भी लगाई जा सकती है। इस दौरान कई किसान संगठनों ने नगला तराई स्थित आवास में सीएम से मुलाकात कर उन्हें ग्रीष्मकालीन धान न लगाने का आश्वासन दिया।

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अगले साल बेमौसमी धान न लगाने का देना होगा शपथपत्र
मुख्यमंत्री की ओर से ग्रीष्मकालीन धान की खेती करने के लिए दी गई छूट के क्रम में डीएम नितिन सिंह भदौरिया ने भी इस बाबत आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा है कि जो किसान ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलें ले पाने की स्थिति में नहीं हैं, उनको मार्च 2025 तक प्रतिबंध के साथ अनुमति प्रदान की गई है।

आदेश में कहा गया है कि ऐसे किसान ग्रीष्मकालीन धान को लगाने के लिए अपनी खेती के क्षेत्रफल के साथ अपने निकटस्थ कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी कार्यालय, खंड विकास अधिकारी कार्यालय में स्वहस्ताक्षरित घोषणापत्र देंगे। इसमें उल्लेख करना होगा कि धान की जो नर्सरी डाली है, उसका क्षेत्रफल क्या है। कुल कितने क्षेत्रफल में ग्रीष्मकालीन धान की खेती की जा रही है इसका उल्लेख करना होगा। घोषणापत्र में यह भी इंगित करना आवश्यक होगा कि उनकी ओर से वर्ष 2025-26 से ग्रीष्मकालीन धान नहीं लगाया जाएगा।

70 फुट तक गिर गया भूजल स्तर
धान के कटोरे के नाम से मशहूर तराई का भूजल स्तर करीब 65 से 70 फुट तक गिर चुका है। इसके लिए बेमौमसी धान को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है। इसकी रोपाई व सिंचाई में सबमर्सिबल पंप और अन्य माध्यमों से पानी की बहुत खपत होती है। इसे देखते हुए जिले में इस धान की खेती को प्रतिबंधित किया गया था। गिरते भूजल स्तर को देख 70 मीटर से अधिक गहरे नलकूप की बोरिंग के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से मिलने वाला अनुदान भी रोक दिया गया है।

मक्के की खेती को किया जा रहा प्रोत्साहित
वर्ष 2019 में जिला प्रशासन ने बेमौसमी धान के स्थान पर मक्के की खेती को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसकी खेती में पानी की बहुत कम लगता है। विकल्प के रूप में गन्ना, उड़द, सूरजमुखी की फसलें भी लगाईं जा सकती हैं। कई किसानों को इस बार मक्के के बीज और इसकी बुआई से संबंधित उपकरण उपलब्ध नहीं हो पाए। इस कारण उनके खेत खाली रह गए हैं।

किसानों की बात
ग्रीष्मकालीन धान लगाने का मौका देकर सरकार ने किसान हित में निर्णय लिया है। इससे जिले के किसानों की आय बढ़ेगी। जो किसान वैकल्पिक फसल नहीं लगा पाए थे उनके खेत खाली थे। अब वे इनमें ग्रीष्मकालीन धान बो सकते हैं। - मनजिंदर सिंह भुल्लर, जिला अध्यक्ष भाकियू (चढूनी)

 

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