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विधानसभा में उठाया सड़कों के निर्माण में धांधली का मुद्दा
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देहरादून विधानसभा में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के साथ विधायक राजकुमार ठुकराल।
- फोटो : RUDRAPUR
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विधायक राजकुमार ठुकराल ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन नियम 300 के तहत सिडकुल की ओर से पूर्व में स्वीकृत दो सड़कों में हुए घोटाले का मुद्दा उठाया और कार्रवाई की मांग की। उन्होंने नियम-53 के तहत महतोष-संजयनगर से नवाबगंज तक हाटमिक्स सड़क निर्माण कराने की मांग उठाई।
ठुकराल ने कहा कि 26 जुलाई 2013 को उनकी मांग पर दो सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी गयी थी। सिडकुल के तत्कालीन अधिकारियों ने बिना निविदा प्रक्रिया के यूपी राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था बना दिया था। इस संस्था ने बिना निविदा के ही कंस्ट्रक्शन कंपनी को दो सड़कों का काम दे दिया था। इनमें एक सड़क ग्राम छत्तरपुर से ओमेक्स, मेट्रोपोलिस कॉलोनी के पीछे, शांति विहार कॉलोनी, भूरारानी के शमशान घाट होते हुए एनएच-74 राष्ट्रीय राजमार्ग तक निर्मित होनी थी। यह सड़क छह महीने भी नहीं चल सकी थी। सड़क के लिए स्वीकृत चार करोड़ 11 लाख 68 हजार रुपये की बंदरबांट कर ली गई थी।
14 दिसंबर 2012 को तत्कालीन सीएम की ओर से मंजूर दूसरी सड़क ग्राम छत्तरपुर से बिंदुखेड़ा होते हुए एनएच-74 तक का कार्य भी एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला था लेकिन यह सड़क आज तक नहीं बन सकी है। इस सड़क के निर्माण में 3 करोड़ 93 लाख 25 हजार का भुगतान नियम विपरीत मिलीभगत से प्राप्त कर लिया गया। कहा कि लोनिकव रुद्रपुर ने ग्राम छत्तरपुर से ग्राम धर्मपुर फौजी मटकोटा और भूरारानी होते हुए एनएच 74 तक और ग्राम भूरारानी से एलायंस सिटी-1 के सामने से होते हुए एन 74 तक दोनों सड़कों का 10 करोड़ 61 लाख की लागत से निर्माण कराया था।
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दोनों योजनाओं में कंस्ट्रक्शन कंपनी ने दोहरा भुगतान प्राप्त कर लिया। उन्होंने इस विषय पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। उन्होंने नियम 53 के तहत एनएच 74 पर महतोष संजय नगर से नवाबगंज स्थित शहीद बलजीत सिंह की मूर्ति तक चार किमी हॉटमिक्स सड़क का निर्माण भी शीघ्र कराए जाने की स्वीकृति देने की मांग की।
पेंशन का मामला धामी ने विधानसभा में उठाया
खटीमा। क्षेत्रीय विधायक पुष्कर धामी ने सदन में नियम 300 के तहत घायल राज्य आंदोलनकारियों को पांच हजार एवं सक्रिय आंदोलनकारियों को 3100 प्रतिमाह पेंशन देने की मांग की। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी की मृत्यु के बाद यह पेंशन परिवार के किसी सदस्य को देय नहीं है, जबकि शासनादेश संख्या दिनांक 13-12-2011 तथा तत्क्रम में संशोधित शासनादेश संख्या 25-03-2013 के अंतर्गत पेंशन प्रारंभ कर रहे आंदोलनकारी की मृत्यु के बाद यह पेंशन आश्रितों को देय होगी। (संवाद)
धौराडैम को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग
रुद्रपुर। किच्छा विधायक राजेश शुक्ला ने विधानसभा सत्र के तीसरे दिन नियम 53 के तहत भूमिहीनों को खुरपिया फार्म में बसाने, नियम 300 के तहत किच्छा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नजीमाबाद, धौराडैम को राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि ग्राम खुरपिया में सीलिंग में राज्य सरकार में निहित पंद्रह सौ एकड़ भूमि में से लगभग 498 एकड़ भूमि भूमिहीनों के लिए आरक्षित की गई थी। इसमें से 85 एकड़ भूमि राजस्व विभाग को सरकारी कार्यालय स्थापित करने के लिए दे दी गई थी। करीब 400 एकड़ भूमि पांच वर्षों से पड़ी हुई है।
सरकार सीलिंग कानून के तहत निकाली गई 1500 एकड़ भूमि में से भूमिहीनों के लिए आरक्षित की गई 400 एकड़ भूमि भूमिहीनों को आवंटित करने पर विचार कर रही है तो कब तक जमीन दी जाएगी, इसकी जानकारी दी जाए। कहा कि ग्राम नजीमाबाद के धौराडैम समेत सितारगंज, गदरपुर, नानकमत्ता, बाजपुर, खटीमा, काशीपुर व जसपुर के कुल सात जलाशयों (डैम) में निष्प्रयोज्य भूमि पर लगभग 50 वर्षों से भी अधिक समय से निवास कर रहे व खेती कर रहे नागरिकों को उक्त क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित न होने से तमाम सुविधाओं/योजनाओं से वंचित हैं। (ब्यूरो)
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ठुकराल ने कहा कि 26 जुलाई 2013 को उनकी मांग पर दो सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी गयी थी। सिडकुल के तत्कालीन अधिकारियों ने बिना निविदा प्रक्रिया के यूपी राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था बना दिया था। इस संस्था ने बिना निविदा के ही कंस्ट्रक्शन कंपनी को दो सड़कों का काम दे दिया था। इनमें एक सड़क ग्राम छत्तरपुर से ओमेक्स, मेट्रोपोलिस कॉलोनी के पीछे, शांति विहार कॉलोनी, भूरारानी के शमशान घाट होते हुए एनएच-74 राष्ट्रीय राजमार्ग तक निर्मित होनी थी। यह सड़क छह महीने भी नहीं चल सकी थी। सड़क के लिए स्वीकृत चार करोड़ 11 लाख 68 हजार रुपये की बंदरबांट कर ली गई थी।
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14 दिसंबर 2012 को तत्कालीन सीएम की ओर से मंजूर दूसरी सड़क ग्राम छत्तरपुर से बिंदुखेड़ा होते हुए एनएच-74 तक का कार्य भी एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला था लेकिन यह सड़क आज तक नहीं बन सकी है। इस सड़क के निर्माण में 3 करोड़ 93 लाख 25 हजार का भुगतान नियम विपरीत मिलीभगत से प्राप्त कर लिया गया। कहा कि लोनिकव रुद्रपुर ने ग्राम छत्तरपुर से ग्राम धर्मपुर फौजी मटकोटा और भूरारानी होते हुए एनएच 74 तक और ग्राम भूरारानी से एलायंस सिटी-1 के सामने से होते हुए एन 74 तक दोनों सड़कों का 10 करोड़ 61 लाख की लागत से निर्माण कराया था।
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दोनों योजनाओं में कंस्ट्रक्शन कंपनी ने दोहरा भुगतान प्राप्त कर लिया। उन्होंने इस विषय पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। उन्होंने नियम 53 के तहत एनएच 74 पर महतोष संजय नगर से नवाबगंज स्थित शहीद बलजीत सिंह की मूर्ति तक चार किमी हॉटमिक्स सड़क का निर्माण भी शीघ्र कराए जाने की स्वीकृति देने की मांग की।
पेंशन का मामला धामी ने विधानसभा में उठाया
खटीमा। क्षेत्रीय विधायक पुष्कर धामी ने सदन में नियम 300 के तहत घायल राज्य आंदोलनकारियों को पांच हजार एवं सक्रिय आंदोलनकारियों को 3100 प्रतिमाह पेंशन देने की मांग की। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी की मृत्यु के बाद यह पेंशन परिवार के किसी सदस्य को देय नहीं है, जबकि शासनादेश संख्या दिनांक 13-12-2011 तथा तत्क्रम में संशोधित शासनादेश संख्या 25-03-2013 के अंतर्गत पेंशन प्रारंभ कर रहे आंदोलनकारी की मृत्यु के बाद यह पेंशन आश्रितों को देय होगी। (संवाद)
धौराडैम को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग
रुद्रपुर। किच्छा विधायक राजेश शुक्ला ने विधानसभा सत्र के तीसरे दिन नियम 53 के तहत भूमिहीनों को खुरपिया फार्म में बसाने, नियम 300 के तहत किच्छा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नजीमाबाद, धौराडैम को राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि ग्राम खुरपिया में सीलिंग में राज्य सरकार में निहित पंद्रह सौ एकड़ भूमि में से लगभग 498 एकड़ भूमि भूमिहीनों के लिए आरक्षित की गई थी। इसमें से 85 एकड़ भूमि राजस्व विभाग को सरकारी कार्यालय स्थापित करने के लिए दे दी गई थी। करीब 400 एकड़ भूमि पांच वर्षों से पड़ी हुई है।
सरकार सीलिंग कानून के तहत निकाली गई 1500 एकड़ भूमि में से भूमिहीनों के लिए आरक्षित की गई 400 एकड़ भूमि भूमिहीनों को आवंटित करने पर विचार कर रही है तो कब तक जमीन दी जाएगी, इसकी जानकारी दी जाए। कहा कि ग्राम नजीमाबाद के धौराडैम समेत सितारगंज, गदरपुर, नानकमत्ता, बाजपुर, खटीमा, काशीपुर व जसपुर के कुल सात जलाशयों (डैम) में निष्प्रयोज्य भूमि पर लगभग 50 वर्षों से भी अधिक समय से निवास कर रहे व खेती कर रहे नागरिकों को उक्त क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित न होने से तमाम सुविधाओं/योजनाओं से वंचित हैं। (ब्यूरो)