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काशीपुर के आंगनबाड़ी केंद्रों को चार माह से नहीं मिला किराया
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काशीपुर में स्थित एक कमरे का आंगनबाड़ी केंद्र।
- फोटो : KASHIPUR
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किराए के भवन में चल रहे नगर के 81 आंगनबाड़ी केंद्रों को चार माह से किराया नहीं मिला है। ऐसे में 81 केंद्र संचालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकार की ओर से पैसा जारी न होने के चलते ऐसी स्थिति बन रही है।
सरकार की कई योजनाएं जनगणना, चुनाव आदि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूरी करती हैं। सरकार उन्हें भवन किराए के नाम पर हर माह तीन हजार रुपये देती है जिससे वह केंद्र का संचालन करती हैं। नगर में 125 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 42 सरकारी हैं और 81 किराए के भवनों में चल रहे हैं। चार माह पहले तक इन केंद्रों को किराया मिल जाता था लेकिन चार माह से इन केंद्रों को किराया तक नहीं मिल पा रहा है।
इसके चलते संचालन में परेशानी आ रही है। नगर में तीन हजार रुपये में एक कमरा तक नहीं मिलता। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि कई बार उन्हें किराया तक अपने पास से देना पड़ता है। कई बार सरकार से किराया बढ़ाने को लेकर मांग की जा चुकी है लेकिन सरकार ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई बार उन्हें अपने पास से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पैसा खर्च करना पड़ता है। इसके बाद भी वह लगन के साथ काम करती हैं। बाल विकास विभाग के अधिकारियों का फोन अक्सर उठता नहीं है। शिकायत करने पर भी सुनवाई नहीं होती है।
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बीते वर्ष से आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए का पैसा बाकी है। अब बजट आया है। जल्द ही इसका आवंटन शुरू कर रहे हैं। पहले पुराना भुगतान किया जाएगा। बाद में नया भुगतान किया जाएगा। -
पूनम रौतेला , सीडीपीओ काशीपुर।
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सरकार की कई योजनाएं जनगणना, चुनाव आदि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूरी करती हैं। सरकार उन्हें भवन किराए के नाम पर हर माह तीन हजार रुपये देती है जिससे वह केंद्र का संचालन करती हैं। नगर में 125 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 42 सरकारी हैं और 81 किराए के भवनों में चल रहे हैं। चार माह पहले तक इन केंद्रों को किराया मिल जाता था लेकिन चार माह से इन केंद्रों को किराया तक नहीं मिल पा रहा है।
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इसके चलते संचालन में परेशानी आ रही है। नगर में तीन हजार रुपये में एक कमरा तक नहीं मिलता। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि कई बार उन्हें किराया तक अपने पास से देना पड़ता है। कई बार सरकार से किराया बढ़ाने को लेकर मांग की जा चुकी है लेकिन सरकार ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई बार उन्हें अपने पास से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पैसा खर्च करना पड़ता है। इसके बाद भी वह लगन के साथ काम करती हैं। बाल विकास विभाग के अधिकारियों का फोन अक्सर उठता नहीं है। शिकायत करने पर भी सुनवाई नहीं होती है।
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बीते वर्ष से आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए का पैसा बाकी है। अब बजट आया है। जल्द ही इसका आवंटन शुरू कर रहे हैं। पहले पुराना भुगतान किया जाएगा। बाद में नया भुगतान किया जाएगा। -
पूनम रौतेला , सीडीपीओ काशीपुर।