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चैती मेला ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ ही व्यापारिक भी

Thu, 06 Apr 2017 12:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, काशीपुर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, काशीपुर। Updated Thu, 06 Apr 2017 12:55 AM IST
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Chaitila fair seen in Kashipur
काशीपुर में लग रहा चैती मेला - फोटो : अमर उजाला

काशीपुर। चैती मेला ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ ही व्यापारिक मेला भी है। 20 दिन के मेले में लाखों रुपये का कारोबार होने का अनुमान है। मेले में छोटी-बड़ी करीब सात सौ दुकानें और एक सौ से अधिक फड़ लगे हैं। मेले में कपड़ों का भी कारोबार हो रहा है। चैती मंदिर के पीछे हैंडलूम मार्केट है। हैंडलूम बाजार में हरियाणा, पंजाब की कई हैंडलूम बनाने वाली सहकारी समितियों की दुकानें लगी हैं। जिला रामपुर के मिलक, बिलारी, मेरठ, सहारनपुर की हैंडलूम के कपड़ों की 12 से अधिक दुकानें लगी हैं।

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यह मेला का सबसे बड़ा कपड़ा बाजार है। इसमें केवल हैंडलूम प्रोडक्ट का ही उत्पादन बिकता है। इन दुकानों में हैंडलूम की चादरें, दरियां, बेडशीट बिकते हैं। यह बाजार सबसे पहले लगता है और सबसे बाद में उठता है। मिलक निवासी रियासत ने बताया कि उसके पिता भी यहीं पर हैंडलूम के उत्पादों की दुकान लगाते थे। पिता के बाद वह 24 साल से दुकान लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मार्केट में शुद्ध हैंडलूम का कपड़ा बिकता है। इस मार्केट में सबसे अधिक दरियां बिकती हैं।
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इसके खरीदारों में बुक्सा जाति के लोग अधिक है। हैंडलूम मार्केट के पीछे ही एक्स्पो की प्रदर्शनी लगी है। इसमें हथकरघा वस्त्रों, हस्तशिल्प वस्तुओं के तकरीबन 40 स्टॉल लगे हैं। इसमें भी अच्छा कारोबार है। मेला क्षेत्र में ढोलक बाजार, मीना बाजार में अच्छी बिक्री है। खेल तमाशा बाजार में काफी भीड़ रहती है। घोड़ा बाजार में भी लाखों के घोड़े बिकते हैं। मेला में दूर-दूर से व्यापारी, खरीदार भी आते हैं।
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काशीपुर। मेले में अमेठी, बरेली का सिंदूर बेचने वाले 24 से अधिक लोग फड़ लगा रहे हैं। अमेठी निवासी आबिद ने बताया कि सिंदूर बना कर बेचना उनका खानदानी काम है। उसके पिता अब्दुल माजिद भी चैती मेला आते थे। पिता के बाद वह 30 साल से आ रहा है। उन्होंने कहा कि सारा मुनाफा फड़ के किराए में चला जाता है। पूरे मेले के दौरान एक दुकानदार का 15 किलों तक सिंदूर बिक जाता है। मेले में 24 से अधिक लोग फड़ लगाकर सिंदूर बेचते हैं।

काशीपुर। भगवती बाल सुंदरी के दर्शनों को मंदिर के प्रवेश द्वार से मोटेश्वर महादेव मंदिर तक लोगों की कतार लगी थी। पुलिस को व्यवस्था बनाने में पसीने छूट गए। बड़ी संख्या में लोग मन्नत पूरी होने पर देवी को चढ़ाने के लिए बकरे लेकर आए। बली प्रथा बंद होने के कारण केवल बली चढ़ाने की रस्म पूरी की गई। लोग चढ़ाने वाला बकरे को अपने साथ ले गए।

काशीपुर। जेबकतरों, झपटमारों को पकड़ने के लिए मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। सादी वर्दी में पुलिस मौजूद है, लेकिन बुधवार प्रात: पांच बजे अचानक बिजली गुल हो गई। अंधेरे का लाभ उठा कर उचक्कों ने कई महिलाओं के गले से चेन खींच ली। पांच महिलाओं ने चेन निकलने की शिकायत की, लेकिन किसी ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। सादी वर्दी में तैनात एक महिला पुलिस कर्मी ने एक महिला को सामान खरीद रही एक महिला के पर्स से रुपये निकालते रंगे-हाथ पकड़ लिया। जेबकतरी महिला ने अपने को अहमदाबाद का निवासी बताया।

काशीपुर। चैती मेले में मां भगवती बाल सुंदरी देवी के दर्शन के लिए उत्तराखंड, यूपी के कई क्षेत्रों से श्रद्धालु आ रहे हैं। इनकी सुविधा के लिए रोडवेज की बसों का मार्ग परिवर्तन कर बिजनौर भेजा गया है। बुधवार को चैती मेले में आने वाले भारी संख्या में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोडवेज बसों को बिजनौर, नजीबाबाद तक भेजा गया। मेले में बिजनौर, नजीबाबाद, धामपुर, नगीना समेत आसपास के शहर, ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं।


उनकी सुविधा के लिए दिल्ली की दो बसों को हटाकर बिजनौर तक भेजा गया है। हरिद्वार, देहरादून चलने वाली नौ अनुबंधित बसों को नजीबाबाद तक भेजा गया है। डिपो से रोजाना 38 बसों का संचालन होता है। समय संचालन कक्ष प्रभारी डूंगर सिंह ने बताया कि बिजनौर जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक होने पर 11 बसें बिजनौर, नजीबाबाद तक दो-दो चक्कर लगा रही हैं। इससे निगम को अतिरिक्त लाभ हो रहा है।

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