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जेब में हो नकद तो ही पड़ें बीमार
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
Updated Sat, 17 Dec 2016 11:38 PM IST
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जिला अस्पताल में नोटबंदी के बाद लोगों के लिए इलाज और जांच कराना मुुश्किल हो रहा है। हालांकि जिला अस्पताल में इलाज तो मुफ्त ही है, लेकिन इलाज के दौरान जांच कराने वाला खर्चा लोगों के लिए परेशानी बन रहा है। बैंकों की मानें तो जिले भर में दो हजार के नए नोट के मुकाबले सिर्फ दो फीसद ही पांच सौ के नए नोट अभी तक आए हैं।
वहीं जिला अस्पताल में जांच कराने के दौरान लोगों को खुले नोट नहीं होने के कारण इधर-उधर भागना पड़ रहा है। हालांकि लोग काउंटर पर बिल के लिए दो हजार के नये नोट दे रहे हैं तो उन्हें खुले पैसे लाने के लिए कहा जा रहा है। कुछ लोग कार्ड से पैमेंट करने के लिए कहते हैं तो अस्पताल का कर्मचारी स्वाइप मशीन नहीं होने का हवाला दे रहा है। जिला अस्पताल में यह हालत तब है जब सरकार लोगों को कैशलेस होने के लिए जागरूक कर रही है।
जिला अस्पताल में रोजाना अल्ट्रासाउंड और एक्सरे के लिए करीब पचास से अधिक लोग आ रहे हैं। हालांकि उत्तराखंड निवासियों के लिए जिला अस्पताल में जांच फ्री है, लेकिन उसमें अल्ट्रासाउंड जांच शामिल नहीं है जो कि तीन सौ से अधिक है। जब तीमारदार अपने मरीज के लिए बिलिंग काउंटर पर जा रहे हैं तो उन्हें खुले रुपए नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परेशानी देख कुछ समझदार लोग कार्ड से पैमेंट करने का आग्रह करते हैं तो अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए स्वाइप मशीन ही उपलब्ध नहीं है। यानि के जेब में नक़द रुपये होने वाले लोगों को ही जिला अस्पताल में सरकारी अस्पताल की सुविधा मिल रही है।
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जांच फीस
अल्ट्रासाउंड 354
एक्सरे (डिजिटल) 177
एक्सरे ( नार्मल) 124
नोटबंदी का असर अभी तक तो कारोबारियों और अन्य विभागों में ही पड़ रहा था, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग भी इसकी जद में आने लगा है। जिला अस्पताल के बिलिंग काउंटर से जुटाई जानकारी के अनुसार नोटबंदी से पहले 17 रुपए कीमत वाली इलाज पर्ची साढ़े छह सौ से अधिक प्रतिदिन बनती थीं। जो अब नीचे गिरकर सिर्फ चार सौ तक सीमित रह गई हैं। कर्मचारियों के अनुसार एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की फीस के रुप में खुले पैसे नहीं होने के कारण इलाज पर्ची में गिरावट आई है।
जिला अस्पातल में स्वाइप मशीन होनी तो चाहिए, लेकिन निदेशालय की ओर से ही हमें कोई लिखित रुप में आदेश नहीं मिला है। मरीजों को फीस देने में परेशानी हो रही है। अगर निदेशालय से स्वाइप मशीन लगाने का आदेश मिलता है तो जल्द इसका प्रबंध किया जाएगा।
-डा. टीसी पंत, प्रमुख अधिक्षक जिला अस्पताल
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वहीं जिला अस्पताल में जांच कराने के दौरान लोगों को खुले नोट नहीं होने के कारण इधर-उधर भागना पड़ रहा है। हालांकि लोग काउंटर पर बिल के लिए दो हजार के नये नोट दे रहे हैं तो उन्हें खुले पैसे लाने के लिए कहा जा रहा है। कुछ लोग कार्ड से पैमेंट करने के लिए कहते हैं तो अस्पताल का कर्मचारी स्वाइप मशीन नहीं होने का हवाला दे रहा है। जिला अस्पताल में यह हालत तब है जब सरकार लोगों को कैशलेस होने के लिए जागरूक कर रही है।
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जिला अस्पताल में रोजाना अल्ट्रासाउंड और एक्सरे के लिए करीब पचास से अधिक लोग आ रहे हैं। हालांकि उत्तराखंड निवासियों के लिए जिला अस्पताल में जांच फ्री है, लेकिन उसमें अल्ट्रासाउंड जांच शामिल नहीं है जो कि तीन सौ से अधिक है। जब तीमारदार अपने मरीज के लिए बिलिंग काउंटर पर जा रहे हैं तो उन्हें खुले रुपए नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परेशानी देख कुछ समझदार लोग कार्ड से पैमेंट करने का आग्रह करते हैं तो अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए स्वाइप मशीन ही उपलब्ध नहीं है। यानि के जेब में नक़द रुपये होने वाले लोगों को ही जिला अस्पताल में सरकारी अस्पताल की सुविधा मिल रही है।
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जांच फीस
अल्ट्रासाउंड 354
एक्सरे (डिजिटल) 177
एक्सरे ( नार्मल) 124
नोटबंदी का असर अभी तक तो कारोबारियों और अन्य विभागों में ही पड़ रहा था, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग भी इसकी जद में आने लगा है। जिला अस्पताल के बिलिंग काउंटर से जुटाई जानकारी के अनुसार नोटबंदी से पहले 17 रुपए कीमत वाली इलाज पर्ची साढ़े छह सौ से अधिक प्रतिदिन बनती थीं। जो अब नीचे गिरकर सिर्फ चार सौ तक सीमित रह गई हैं। कर्मचारियों के अनुसार एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की फीस के रुप में खुले पैसे नहीं होने के कारण इलाज पर्ची में गिरावट आई है।
जिला अस्पातल में स्वाइप मशीन होनी तो चाहिए, लेकिन निदेशालय की ओर से ही हमें कोई लिखित रुप में आदेश नहीं मिला है। मरीजों को फीस देने में परेशानी हो रही है। अगर निदेशालय से स्वाइप मशीन लगाने का आदेश मिलता है तो जल्द इसका प्रबंध किया जाएगा।
-डा. टीसी पंत, प्रमुख अधिक्षक जिला अस्पताल